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शिशुओं के टीकाकरण में बाधा बनी कोरोना की दूसरी लहर
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हरदोई। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण शिशुओं का टीकाकरण बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। लक्ष्य के सापेक्ष बेहद कम टीकाकरण जनपद में हो पाया है। अब कोरोना संक्रमण की रफ्तार कुछ कम हुई है, तो शिशुओं के टीकाकरण की रफ्तार को बढ़ाने की कवायद भी शुरू हो गई है।
शिशुओं को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण कराया जाता है। आम तौर पर हर सप्ताह के बुधवार और शनिवार को शिशुओं को टीका लगाया जाता है।
जनपद के सभी सरकारी अस्पतालों में बीसीजी, पेंटा वेलेंट, मिजल्स आदि के टीके निशुल्क लगाए जाते हैं, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में शुल्क देकर यह टीके लगवाए जा सकते हैं।
टीकाकरण का कार्य आम तौर पर एएनएम और आशा करती हैं। आम तौर पर लक्ष्य के सापेक्ष आठ फीसदी टीकाकरण हर माह होता है, लेकिन जनपद में कोरोना के कारण यह आंकड़ा पांच फीसदी तक भी नहीं पहुंच सका है।
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इसकी एक वजह ये भी है कि आशा और एएनएम को कोरोना की रोकथाम के लिए चल रहे प्रयासों में भी लगाया गया है, तो कुछ जगहों पर अभिभावकों द्वारा भी जागरुकता न दिखाया जाना इसकी बड़ी वजह है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन कहते हैं कि टीकाकरण प्रभावित होने की एक अलग वजह भी है। ग्रामीण इलाकों में लोग भ्रम में हैं। लोगों को लगता है कि उनके बच्चे को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है। डॉ. प्रशांत कहते हैं कि इस भ्रम से लोगों को बाहर निकलना चाहिए। नियमित टीकाकरण बच्चों के लिए जरूरी है। बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन अभी आई नहीं है। ऐसे में कोई कोरोना की वैक्सीन बच्चों को नहीं लगा देगा।
इतने फीसदी ही हो पाया टीकाकरण
बीसीजी 3.83 फीसदी
पेंटा वेलेंट 4.55 फीसदी
मिजिल्स 4.46 फीसदी
जे ई 4.49 फीसदी
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शिशुओं को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण कराया जाता है। आम तौर पर हर सप्ताह के बुधवार और शनिवार को शिशुओं को टीका लगाया जाता है।
जनपद के सभी सरकारी अस्पतालों में बीसीजी, पेंटा वेलेंट, मिजल्स आदि के टीके निशुल्क लगाए जाते हैं, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में शुल्क देकर यह टीके लगवाए जा सकते हैं।
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टीकाकरण का कार्य आम तौर पर एएनएम और आशा करती हैं। आम तौर पर लक्ष्य के सापेक्ष आठ फीसदी टीकाकरण हर माह होता है, लेकिन जनपद में कोरोना के कारण यह आंकड़ा पांच फीसदी तक भी नहीं पहुंच सका है।
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इसकी एक वजह ये भी है कि आशा और एएनएम को कोरोना की रोकथाम के लिए चल रहे प्रयासों में भी लगाया गया है, तो कुछ जगहों पर अभिभावकों द्वारा भी जागरुकता न दिखाया जाना इसकी बड़ी वजह है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन कहते हैं कि टीकाकरण प्रभावित होने की एक अलग वजह भी है। ग्रामीण इलाकों में लोग भ्रम में हैं। लोगों को लगता है कि उनके बच्चे को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है। डॉ. प्रशांत कहते हैं कि इस भ्रम से लोगों को बाहर निकलना चाहिए। नियमित टीकाकरण बच्चों के लिए जरूरी है। बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन अभी आई नहीं है। ऐसे में कोई कोरोना की वैक्सीन बच्चों को नहीं लगा देगा।
इतने फीसदी ही हो पाया टीकाकरण
बीसीजी 3.83 फीसदी
पेंटा वेलेंट 4.55 फीसदी
मिजिल्स 4.46 फीसदी
जे ई 4.49 फीसदी