{"_id":"60a14ba58ebc3edd4717b7dc","slug":"hardoi-news-corona-no-relationship-blood-donear-short-blood-hardoi-news-knp628652064","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल में अनजानों से नहीं बनाना चाहता कोई रिश्ता!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल में अनजानों से नहीं बनाना चाहता कोई रिश्ता!
विज्ञापन
हरदोई। कोरोना काल क्या आया संक्रमितों के पास अपनों ने आना छोड़ दिया तो रक्तदानियों से अनजानों से रिश्ता बनाना बंद कर दिया। इसी का नतीजा ये है कि 500 यूनिट वाली ब्लड बैंक में रविवार को सिर्फ 77 यूनिट ब्लड ही शेष रह गया। यही नहीं निगेटिव ग्रुप वाले अधिकांश रक्त ब्लड बैंक में नहीं हैं।
जिला चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक में 500 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है। यहां कैंप कराने एवं उसमें रक्त संजोने में यह बैंक हमेशा प्रदेश में वरीयता क्रम में ही दिखाई दिया है।
इस बार कोरोना काल में ऐसा कुछ हुआ कि लोगों ने इधर से मुंह ही फेर लिया। स्वैच्छिक रक्तदान बंद सा हो गया। रक्तदान करने वाले लोग भी संक्रमण के डर से इधर से मुंह मोड़ गए।
विज्ञापन
आलम ये हुआ कि रक्त की कमी कही न कहीं दिखाई देने लगी है। रविवार को ओ निगेटिव, एबी निगेटिव, बी निगेटिव ब्लड बिल्कुल नहीं था। जबकि ए निगेटिव ब्लड सिर्फ तीन यूनिट शेष रह गया।
शेष ब्लड ग्रुप भी सीमित संख्या में हैं। लैब टेक्नीशियन मो. अकील ने बताया कि इन दिनों सिर्फ डोनर के आने के बाद ही ब्लड दिया जा पा रहा है। कोविड-19 के रोगियों को तत्काल आवश्यकता पड़ने पर आवश्यकता के अनुसार तत्काल ऐसे ही ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा इन दिनों एनीमिया व टायफाइड के रोगियों को ब्लड की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने बताया कि इन दिनों अधिकांश हास्पिटल में आपरेशन बंद हैं अन्यथा आपरेशन के दौरान डिमांड होने से ब्लड की कमी काफी हो सकती थी। जिससे निपट पाना काफी मुश्किल होता।
ब्लड बैंक में रविवार को यह उपलब्ध रहा रक्त
ग्रुप ब्लड यूनिट
ए पॉजीटिव 25
ए निगेटिव 3
बी पॉजीटिव 30
बी निगेटिव 0
एबी पॉजीटिव 2
एबी निगेटिव 0
ओ पॉजीटिव 17
ओ निगेटिव 0
15 मार्च को हुआ था अंतिम कैंप
कोरोना संक्रमण ने मार्च माह में ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। 15 मार्च को सीतापुर में मानवता सेवा संस्थान की ओर से कैंप आयोजित हुआ था। जिसमें सीतापुर, लखनऊ व हरदोई ब्लड बैंक की टीम शामिल हुई थी। जिसमें जिले में 160 यूनिट ब्लड एकत्र हुआ था। उसके बाद से कोई भी ब्लड कैंप आयोजित नहीं हुए।
वैक्सीनेशन के बाद भी रक्तदाताओं की आई कमी
जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. वीपी गौतम बताते हैं कि वैक्सीनेशन के बाद से लोगों में यह भ्रम आ जाता है कि अब वह रक्तदान नहीं कर सकते। लेकिन यह भ्रम है स्वास्थ्य मंत्रालय भी कह रहा है कि अब वैक्सीनेशन के 14 दिन बाद रक्तदाता रक्त दे सकता है। अभी तक 28 दिन का समय दिया गया था। लेकिन वैक्सीनेशन कराने वाले रक्तदान करने से अभी बच रहे हैं।
माह में औसतन दो कैंपों का होता आया है आयोजन
ब्लड बैंक के रिकार्ड के अनुसार माह में औसतन दो कैंप लग जाया करते थे। जिससे कम से 50 और अधिक से अधिक 150 यूनिट तक का ब्लड प्राप्त हो जाया करता था लेकिन इस समय कैंप न लगे होने से कमी आई है।
रक्तदान इम्यूनिटी घटाती नहीं बल्कि बढ़ाती है
जिला चिकित्सालय ब्लड बैंक में लेखा जोखा तैयार करने वाले लैब टेक्नीशियन मो. अकील का कहना है कि इन दिनों लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका व शरीर में इम्यूनिटी कम होने की शंका है। इसलिए वह अस्पताल की तरफ रुख नहीं कर रहे। जिससे रक्तदान कहीं न कहीं बंद है। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से इम्यूनिटी बढ़ती है। रक्त तेजी से बनता है। रक्तदानियों व स्वैच्छिक संगठनों को आगे आना चाहिए।
विज्ञापन
जिला चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक में 500 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है। यहां कैंप कराने एवं उसमें रक्त संजोने में यह बैंक हमेशा प्रदेश में वरीयता क्रम में ही दिखाई दिया है।
विज्ञापन
इस बार कोरोना काल में ऐसा कुछ हुआ कि लोगों ने इधर से मुंह ही फेर लिया। स्वैच्छिक रक्तदान बंद सा हो गया। रक्तदान करने वाले लोग भी संक्रमण के डर से इधर से मुंह मोड़ गए।
विज्ञापन
आलम ये हुआ कि रक्त की कमी कही न कहीं दिखाई देने लगी है। रविवार को ओ निगेटिव, एबी निगेटिव, बी निगेटिव ब्लड बिल्कुल नहीं था। जबकि ए निगेटिव ब्लड सिर्फ तीन यूनिट शेष रह गया।
शेष ब्लड ग्रुप भी सीमित संख्या में हैं। लैब टेक्नीशियन मो. अकील ने बताया कि इन दिनों सिर्फ डोनर के आने के बाद ही ब्लड दिया जा पा रहा है। कोविड-19 के रोगियों को तत्काल आवश्यकता पड़ने पर आवश्यकता के अनुसार तत्काल ऐसे ही ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा इन दिनों एनीमिया व टायफाइड के रोगियों को ब्लड की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने बताया कि इन दिनों अधिकांश हास्पिटल में आपरेशन बंद हैं अन्यथा आपरेशन के दौरान डिमांड होने से ब्लड की कमी काफी हो सकती थी। जिससे निपट पाना काफी मुश्किल होता।
ब्लड बैंक में रविवार को यह उपलब्ध रहा रक्त
ग्रुप ब्लड यूनिट
ए पॉजीटिव 25
ए निगेटिव 3
बी पॉजीटिव 30
बी निगेटिव 0
एबी पॉजीटिव 2
एबी निगेटिव 0
ओ पॉजीटिव 17
ओ निगेटिव 0
15 मार्च को हुआ था अंतिम कैंप
कोरोना संक्रमण ने मार्च माह में ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। 15 मार्च को सीतापुर में मानवता सेवा संस्थान की ओर से कैंप आयोजित हुआ था। जिसमें सीतापुर, लखनऊ व हरदोई ब्लड बैंक की टीम शामिल हुई थी। जिसमें जिले में 160 यूनिट ब्लड एकत्र हुआ था। उसके बाद से कोई भी ब्लड कैंप आयोजित नहीं हुए।
वैक्सीनेशन के बाद भी रक्तदाताओं की आई कमी
जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. वीपी गौतम बताते हैं कि वैक्सीनेशन के बाद से लोगों में यह भ्रम आ जाता है कि अब वह रक्तदान नहीं कर सकते। लेकिन यह भ्रम है स्वास्थ्य मंत्रालय भी कह रहा है कि अब वैक्सीनेशन के 14 दिन बाद रक्तदाता रक्त दे सकता है। अभी तक 28 दिन का समय दिया गया था। लेकिन वैक्सीनेशन कराने वाले रक्तदान करने से अभी बच रहे हैं।
माह में औसतन दो कैंपों का होता आया है आयोजन
ब्लड बैंक के रिकार्ड के अनुसार माह में औसतन दो कैंप लग जाया करते थे। जिससे कम से 50 और अधिक से अधिक 150 यूनिट तक का ब्लड प्राप्त हो जाया करता था लेकिन इस समय कैंप न लगे होने से कमी आई है।
रक्तदान इम्यूनिटी घटाती नहीं बल्कि बढ़ाती है
जिला चिकित्सालय ब्लड बैंक में लेखा जोखा तैयार करने वाले लैब टेक्नीशियन मो. अकील का कहना है कि इन दिनों लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका व शरीर में इम्यूनिटी कम होने की शंका है। इसलिए वह अस्पताल की तरफ रुख नहीं कर रहे। जिससे रक्तदान कहीं न कहीं बंद है। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से इम्यूनिटी बढ़ती है। रक्त तेजी से बनता है। रक्तदानियों व स्वैच्छिक संगठनों को आगे आना चाहिए।