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रूबी नाज की पहल से आत्मनिर्भर बनीं समूह की महिलाएं
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फोटो-22- कार्य करती समूह की सदस्य महिलाएं
- फोटो : HARDOI
बेहंदर। मेहनत और लगन से किया गया कार्य बड़ी पहचान और सम्मान दिलाता है। यह बात बेहंदर ब्लॉक के गौसापुर निवासी इंशाल्लाह समूह की सचिव रूबी नाज ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से सम्मानित होकर सच साबित की है।
तीन साल पहले एक लाख 25 हजार से समूह बनाकर सिटीजन इंफार्मेशन बोर्ड बनाने का शुरू किया कारोबार अब करोड़ों रुपये में पहुंच चुका है। इस काम से उनके परिवार के पुरुषों को भी रोजगार मिल रहा है। वहीं समूह से जुड़ी महिलाओं को तकदीर भी बदल गई है।
ग्राम पंचायत अलावलपुर के मजरा गौसापुर की रूबी नाज ने तीन साल पहले आत्मनिर्भर बनने की ठानी। इस क्रम में वर्ष 2019 में राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर गांव की 10 महिलाओं को अपने साथ जोड़कर इंशाल्लाह समूह का गठन किया।
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नवंबर 2020 में तत्कालीन सीडीओ निधि गुप्ता वत्स ने उन्हें सीआईबी (सिटीजन इंफार्मेशन बोर्ड) बनाने के लिए प्रेरित किया। बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक सामान आपूर्ति की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई।
शुरूआत में दो लाख 25 हजार रुपये से सीआईबी बोर्ड बनाने का काम शुरू किया। यह कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया। उनके समूह के बनाए सीआईबी बेहंदर के अलावा कछौना, मल्लावां, माधौगंज और बिलग्राम समेत कई ब्लॉकों, पीडब्ल्यूडी, नहर व वन विभाग में आपूर्ति होने लगे। तीन सालों में ही उनका यह कारोबार एक करोड़ 30 लाख रुपये का हो गया है।
300 रुपये तक होती है एक बोर्ड पर बचत
मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों पर दो तरह के सीआईबी लगवाए जाते हैं। एक (सीआईबी) मांग के अनुसार तीन से पांच हजार रुपये का बनता है। कार्यस्थल पर कौन सा सीआईबी लगेगा, ये कराए जाने वाले कार्य पर होने वाले खर्च पर निर्भर करता है। एक सीआईबी का निर्माण करने और उसे रंग-रोगन के बाद कार्यस्थल तक पहुंचाने के बाद स्वयं सहायता समूह को 300 रुपये की बचत होती है।
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तीन साल पहले एक लाख 25 हजार से समूह बनाकर सिटीजन इंफार्मेशन बोर्ड बनाने का शुरू किया कारोबार अब करोड़ों रुपये में पहुंच चुका है। इस काम से उनके परिवार के पुरुषों को भी रोजगार मिल रहा है। वहीं समूह से जुड़ी महिलाओं को तकदीर भी बदल गई है।
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ग्राम पंचायत अलावलपुर के मजरा गौसापुर की रूबी नाज ने तीन साल पहले आत्मनिर्भर बनने की ठानी। इस क्रम में वर्ष 2019 में राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर गांव की 10 महिलाओं को अपने साथ जोड़कर इंशाल्लाह समूह का गठन किया।
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नवंबर 2020 में तत्कालीन सीडीओ निधि गुप्ता वत्स ने उन्हें सीआईबी (सिटीजन इंफार्मेशन बोर्ड) बनाने के लिए प्रेरित किया। बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक सामान आपूर्ति की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई।
शुरूआत में दो लाख 25 हजार रुपये से सीआईबी बोर्ड बनाने का काम शुरू किया। यह कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया। उनके समूह के बनाए सीआईबी बेहंदर के अलावा कछौना, मल्लावां, माधौगंज और बिलग्राम समेत कई ब्लॉकों, पीडब्ल्यूडी, नहर व वन विभाग में आपूर्ति होने लगे। तीन सालों में ही उनका यह कारोबार एक करोड़ 30 लाख रुपये का हो गया है।
300 रुपये तक होती है एक बोर्ड पर बचत
मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों पर दो तरह के सीआईबी लगवाए जाते हैं। एक (सीआईबी) मांग के अनुसार तीन से पांच हजार रुपये का बनता है। कार्यस्थल पर कौन सा सीआईबी लगेगा, ये कराए जाने वाले कार्य पर होने वाले खर्च पर निर्भर करता है। एक सीआईबी का निर्माण करने और उसे रंग-रोगन के बाद कार्यस्थल तक पहुंचाने के बाद स्वयं सहायता समूह को 300 रुपये की बचत होती है।