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एस्टीमेट से अधिक के भुगतान में दोबारा होगी जांच
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हरदोई। भरखनी विकास खंड की ग्राम पंचायत आमतारा में मनरेगा के तहत एस्टीमेट से अधिक का भुगतान किए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। पूरे मामले में लीपापोती की कवायद में विकास खंड भरखनी में तैनात ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता को दोषी मानते हुए स्पष्टीकरण तलब किया गया था। स्पष्टीकरण मिलने के बाद अब सीडीओ ने पूरे मामले की जांच दोबारा कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ग्राम्य विकास अभिकरण के तकनीकी निदेशक और लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता की संयुक्त टीम गठित की गई है।
भरखनी विकास खंड की ग्राम पंचायत आमतारा में शंभू रतन के खेत से पूरब पुलिया तक भूमि विकास कार्य कराया गया था। इस कार्य के लिए दो लाख दो हजार रुपये का आगणन स्वीकृत था, लेकिन इसके सापेक्ष तीन लाख चालीस हजार रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया था। 12 अगस्त के अंक में अमर उजाला ने इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी। खबर को संज्ञान में लेकर सीडीओ आकांक्षा राना ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल को सौंपी थी।
मनरेगा उपायुक्त ने बीडीओ भरखनी प्रमेंद्र पांडेय और लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नवीन सहगल की आख्या के आधार पर ब्लाक में तैनात आरईडी के अवर अभियंता दीपक राजपूत को दोषी मानते हुए स्पष्टीकरण तलब किया था। दीपक राजपूत ने स्पष्टीकरण में कई खेल खोल दिए थे। दीपक राजपूत के मुताबिक इस कार्य का नाम ही गलत है। यह कोई चकमार्ग नहीं है, बल्कि नहर पटरी है। साथ ही यह भी बताया कि मौके पर 38,806 रुपये का ही कार्य कराया गया है।
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जेई के स्पष्टीकरण देने के बाद अब मामले की जांच दोबारा कराने के लिए सीडीओ ने कमेटी गठित की है। सीडीओ आकांक्षा राना ने लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता धर्मेंद्र सिंह और जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के तकनीकी अनुदेशक मनोज शर्मा की जांच टीम बनाई है। स्थलीय निरीक्षण कर पूरी पत्रावली का परीक्षण कर तीन दिन में आख्या मांगी गई है।
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भरखनी विकास खंड की ग्राम पंचायत आमतारा में शंभू रतन के खेत से पूरब पुलिया तक भूमि विकास कार्य कराया गया था। इस कार्य के लिए दो लाख दो हजार रुपये का आगणन स्वीकृत था, लेकिन इसके सापेक्ष तीन लाख चालीस हजार रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया था। 12 अगस्त के अंक में अमर उजाला ने इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी। खबर को संज्ञान में लेकर सीडीओ आकांक्षा राना ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल को सौंपी थी।
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मनरेगा उपायुक्त ने बीडीओ भरखनी प्रमेंद्र पांडेय और लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नवीन सहगल की आख्या के आधार पर ब्लाक में तैनात आरईडी के अवर अभियंता दीपक राजपूत को दोषी मानते हुए स्पष्टीकरण तलब किया था। दीपक राजपूत ने स्पष्टीकरण में कई खेल खोल दिए थे। दीपक राजपूत के मुताबिक इस कार्य का नाम ही गलत है। यह कोई चकमार्ग नहीं है, बल्कि नहर पटरी है। साथ ही यह भी बताया कि मौके पर 38,806 रुपये का ही कार्य कराया गया है।
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जेई के स्पष्टीकरण देने के बाद अब मामले की जांच दोबारा कराने के लिए सीडीओ ने कमेटी गठित की है। सीडीओ आकांक्षा राना ने लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता धर्मेंद्र सिंह और जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के तकनीकी अनुदेशक मनोज शर्मा की जांच टीम बनाई है। स्थलीय निरीक्षण कर पूरी पत्रावली का परीक्षण कर तीन दिन में आख्या मांगी गई है।