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हरदोईः बसपा के पूर्व एमएलसी अब्दुल हन्नान को होगा डीएनए टेस्ट
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संडीला (हरदोई)। लखनऊ स्थित फैमिली कोर्ट संख्या-10 के अपर प्रधान न्यायाधीश देवेंद्र नाथ सिंह ने पूर्व एमएलसी अब्दुल हन्नान का डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया है।
फैमिली कोर्ट के अपर न्यायाधीश ने मास्टर अब्दुल मलिक बनाम अब्दुल हन्नान में 2 सितंबर को डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया है। इसकी सत्यापित प्रति पांच सितंबर को डॉ. समन किदवई को मिली है।
कोर्ट ने अपने आदेश में डीएनए टेस्ट के लिए 22 सितंबर की तिथि नियत की है। सीएमओ लखनऊ के यहां डीएनए टेस्ट होगा। आदेश की प्रति मिलने के बाद मंगलवार को समन किदवई ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अपने बेटे मास्टर अब्दुल मलिक की तरफ से केस लड़ रही हैं।
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कई सालों से लड़ रही थीं लड़ाई
डॉ. समन किदवई कई वर्षों से अदालती लड़ाई लड़ रही थीं। उन्होंने मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, एसपी, आईजी सहित तमाम आला अधिकारियों के यहां फरियाद की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
आईजी के आदेश पर हन्नान के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज हुई थी, लेकिन हन्नान ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। फैमिली कोर्ट ने उन पर एक हजार रुपये प्रति माह गुजारा भी बांधा लेकिन उसे भी हन्नान ने नहीं माना।
डॉ. समन किदवई का दावा है कि उनके संबंध हन्नान के साथ थे। 28 जुलाई 2011 को पुत्र पैदा हुआ, लेकिन हन्नान ने उसे अपनी संतान नहीं माना। इसी को लेकर डॉ. समन ने लखनऊ की फैमिली कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।
पिछले करीब 11 वर्षों से वह लड़ाई लड़ रही हैं। पुत्र की जान बचाने के लिए उन्हें घर तक छोड़ना पड़ा। जब उन्होंने बच्चे का प्रवेश लखनऊ के एक स्कूल में कराया तो हन्नान ने स्कूल को नोटिस भेज कर पिता का नाम काटने के लिए कहा। जब हन्नान ने बच्चे को अपना पुत्र स्वीकार नहीं किया तो कोर्ट से डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी।
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फैमिली कोर्ट के अपर न्यायाधीश ने मास्टर अब्दुल मलिक बनाम अब्दुल हन्नान में 2 सितंबर को डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया है। इसकी सत्यापित प्रति पांच सितंबर को डॉ. समन किदवई को मिली है।
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कोर्ट ने अपने आदेश में डीएनए टेस्ट के लिए 22 सितंबर की तिथि नियत की है। सीएमओ लखनऊ के यहां डीएनए टेस्ट होगा। आदेश की प्रति मिलने के बाद मंगलवार को समन किदवई ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अपने बेटे मास्टर अब्दुल मलिक की तरफ से केस लड़ रही हैं।
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कई सालों से लड़ रही थीं लड़ाई
डॉ. समन किदवई कई वर्षों से अदालती लड़ाई लड़ रही थीं। उन्होंने मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, एसपी, आईजी सहित तमाम आला अधिकारियों के यहां फरियाद की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
आईजी के आदेश पर हन्नान के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज हुई थी, लेकिन हन्नान ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। फैमिली कोर्ट ने उन पर एक हजार रुपये प्रति माह गुजारा भी बांधा लेकिन उसे भी हन्नान ने नहीं माना।
डॉ. समन किदवई का दावा है कि उनके संबंध हन्नान के साथ थे। 28 जुलाई 2011 को पुत्र पैदा हुआ, लेकिन हन्नान ने उसे अपनी संतान नहीं माना। इसी को लेकर डॉ. समन ने लखनऊ की फैमिली कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।
पिछले करीब 11 वर्षों से वह लड़ाई लड़ रही हैं। पुत्र की जान बचाने के लिए उन्हें घर तक छोड़ना पड़ा। जब उन्होंने बच्चे का प्रवेश लखनऊ के एक स्कूल में कराया तो हन्नान ने स्कूल को नोटिस भेज कर पिता का नाम काटने के लिए कहा। जब हन्नान ने बच्चे को अपना पुत्र स्वीकार नहीं किया तो कोर्ट से डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी।