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हरदोई: 34 साल बाद चार को सात साल की सजा, चुनावी रंजिश में की थी हत्या
Thu, 25 Nov 2021 07:02 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 25 Nov 2021 07:02 PM IST
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।)
- फोटो : iStock
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हरदोई में लगभग 34 वर्ष पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय संजीव कुमार सिंह ने अंग भंग किए जाने में तीन सगे भाइयों समेत चार लोगों को दोषी ठहराया है। चारों को सात वर्ष की सजा और दस-दस हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर त्रिपाठी ने बताया कि पाली थाना क्षेत्र के ग्राम बाबरपुर निवासी राम सुशील ने 23 दिसंबर 1987 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि चुनावी रंजिश में गांव निवासी नारायण स्वरूप, देव स्वरूप और ब्रम्हस्वरूप उर्फ छोटे लल्ला ने मुन्नूलाल के साथ मिलकर उन्हें घेर लिया।
इसके बाद फायरिंग कर दी। फायरिंग में राम सुशील और वहीं खड़ा देव कुमार गोली लगने से घायल हो गया। इसके चलते राम सुशील का कोहनी के नीचे एक हाथ काटना पड़ा। अंग भंग की धारा 326 आईपीसी के तहत आरोपियों को दोषी पाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय संजीव कुमार सिंह ने सात वर्ष की सजा सुनाई है।
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दस - दस हजार रुपये का जुर्माना किया है और जुर्माने की आधी रकम राम सुशील को देने का आदेश भी पारित किया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मामले की सुनवाई धारा 307 के तहत हुई थी, लेकिन 326 के तहत आरोपी दोषी पाए गए हैं।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर त्रिपाठी ने बताया कि पाली थाना क्षेत्र के ग्राम बाबरपुर निवासी राम सुशील ने 23 दिसंबर 1987 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि चुनावी रंजिश में गांव निवासी नारायण स्वरूप, देव स्वरूप और ब्रम्हस्वरूप उर्फ छोटे लल्ला ने मुन्नूलाल के साथ मिलकर उन्हें घेर लिया।
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इसके बाद फायरिंग कर दी। फायरिंग में राम सुशील और वहीं खड़ा देव कुमार गोली लगने से घायल हो गया। इसके चलते राम सुशील का कोहनी के नीचे एक हाथ काटना पड़ा। अंग भंग की धारा 326 आईपीसी के तहत आरोपियों को दोषी पाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय संजीव कुमार सिंह ने सात वर्ष की सजा सुनाई है।
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दस - दस हजार रुपये का जुर्माना किया है और जुर्माने की आधी रकम राम सुशील को देने का आदेश भी पारित किया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मामले की सुनवाई धारा 307 के तहत हुई थी, लेकिन 326 के तहत आरोपी दोषी पाए गए हैं।