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एक फोन काल से बिखर गईं सारी खुशियां

Fri, 12 Jun 2015 12:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Fri, 12 Jun 2015 12:34 AM IST
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Happiness was shattered by a phone call

देहात कोतवाली के भरिगवां में बीती दूल्हे की कार

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पहुंचते परिवार के लोग स्वागत सत्कार में लग गए। वहीं बारातियों की अगवानी की तैयारियां तेज हो गई, जनवासे में व्यवस्था दुुरुस्त की जा रही थी, इसी बीच दूल्हे के पास मोबाइल काल आई और चीख पुकार मच गई।

जानकारी मिलते हो कन्या पक्ष के घर में हो रहे गाने बजाने की जगह चीख पुकार मच गई। परिवार के साथ साथ गांव के लोग भी गमगीन हो गए। भरिगवां में दूल्हा शिवकरन कुछ साथियों के साथ आठ बजे पहुंच गया था। ट्रैक्टर के आने का इंतजार किया जा रहा था। दुल्हन के घर के बाहर द्वारचार की तैयारी की जा रही थी।

दुल्हन के घर की महिलाएं बारात के स्वागत के लिए सज संवर रही थी। इसी बीच रात साढ़े नौ बजे दूल्हा शिवकरन के पास मोबाइल से घटना की सूचना दी गई। यह सुनकर शिव करण अचेत हो गया। घटना की सूचना जैसे ही दुल्हन के घर पहुंची दुल्हन सुमन बेहोश हो गई। घर में चीख पुकार मच गई।

ग्रामीणों ने संगीत बंद कराया और दुल्हन का पिता और रिश्तेदार जिला अस्पताल की ओर भागे। पल भर में ही जहां खुशी का माहौल था। वहां पर मातम छा गया। हर तरफ सिसकियां सुनाई दे रही थी। गांव में जिसने सुना वह बृजपाल के घर की ओर दौड़ पड़ा।

उधर, बृजपाल के दो पुत्रियां और तीन पुत्र थे। सुमन सबसे बड़ी थी। उसको पोलियो की शिकायत थी, जिससे उसे अपनी पुत्री की शादी करने में काफी दिक्कतें आ रही थी। पुत्री की शादी को वर खोजने में उसे काफी परेशान होना पड़ा था और बड़ी मुश्किल से रिश्तेदारी में उसकी बात बनी थी।

बृजपाल की आर्थिक स्थित ठीक नहीं थी। उसने गांव में लोगों से बीस हजार रुपये कर्ज लिया था। इसके अलावा उसके भाइयों आदि ने व्यवस्था कर शादी की तैयारी पूरी की थी। इसके लिए वह कई दिनों से तैयारियों को लेकर शहर से गांव और गांव से शहर की दौड़ लगा रहा था। घटना के बाद शादी की रस्में नहीं हुई।

शादी के लिए तैयार मंडप सूना रह गया। वहां पर भांवर नहीं पड़ सकी। वहीं दुल्हन के हाथों की मेहंदी रची रह गई। घर में सजा मंडप और दुल्हन की हाथों की मेहंदी देख लोगों की आंखों से आंसू निकल रहे थे। बारातियोें के स्वागत को बृजपाल ने बेहतर खाना तैयार कराया था, पर घटना के बाद बारातियों के लिए बनाया गया भोजन धरा रह गया और सुबह जानवरों को खिलाना पड़ा।

बृजलाल और उसकी पत्नी बिटन्ना अपनी पुत्री के हाथ पीले करने और उसकी विदाई करने का सपना संजोए हुए थे। इस घटना के कारण उसकी पुत्री सुमन भी बार बार बेहोश हो रही थी। उधर, घटना के आधे घंटे बाद जब दूल्हा शिवकरन कुछ संभला, इसके बाद वह और उसके साथ आए साथी वापस लौट गए। घटना के बाद वह लोग अस्पताल पहुंचे और बाद में घर लौट गए।

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