{"_id":"622cdcb38c7a424bb34c7c98","slug":"hanuman-burnt-lanka-of-gold-hardoi-news-knp6853088134","type":"story","status":"publish","title_hn":"हनुमान ने जला डाली सोने की लंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हनुमान ने जला डाली सोने की लंका
विज्ञापन
हरदोई। नुमाइश मैदान में चल रहे रामलीला मंचन कार्यक्रम में शनिवार को सुंदरकांड के प्रसंगों का मंचन हुआ। वानर सेना एवं जामवंत सहित हनुमान आदि की वेशभूषा में किरदार कर रहे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया।
मंचन के दौरान कलाकारों ने दिखाया कि बालि के वध के बाद महाराज सुग्रीव बानर सेना को जामवंत के साथ सीता माता की खोज के लिए लंका की ओर रवाना करते हैं।
वानर सेना समुद्र तट पर बैठ कर विचार कर रही कि कौन सा वीर है जो समुद्र को लांघ कर लंका जा सके। सोच विचार कर रहे वानरों में हनुमान भी बैठे हुए हैं।
जामवंत कहते है कि कहइ रीछपति सुन हनुमाना का चुप साधि रहेउ बलवाना। पवन तनय बल पवन समाना, बुधि विवेक विग्यान निधाना। इसके बाद जामवंत कहते हैं कि आपका जन्म रामसेवा के लिए हुआ है।
यह सुन हनुमान जी अपना विराट रूप धारण कर लेते है और जामवंत की आज्ञा लेकर लंका प्रस्थान कर जाते हैं। लंका पहुंच कर उनका सामना लंकिनी से होता है, जिसे ज्ञान देकर वह लंका में प्रवेश कर जाते हैं।
विज्ञापन
विभीषण को राम कथा सुनाते हुए वो सीता माता की खोज में अशोक वाटिका पहुंच जाते हैं। यहां सीता से मिलकर सब हाल सुनाते हैं। उनकी आज्ञा लेकर फल खाते हैं और जब बाग के रक्षक राक्षस उन्हें रोकते हैं, तो वो गर्जना करते हुए संहार करने लगते हैं।
मेघनाथ के ब्रह्मपास में बंधकर रावण के समक्ष जाते है। राम का को भगवान का अवतार बताते हुए रावण से राम की शरण में चलने का निवेदन करते हैं। रावण पूछ में आग लगाने का आदेश देता है। हनुमान जी पूछ को बढ़ाते हुए खेल करते हैं।
राक्षसों द्वारा आग लगाने के बाद हनुमान जी सोने की लंका को जलाकर खाक कर देते है। विभीषण की कुटिया को छोड़कर पूरी लंका जल जाती है। यह देखकर राक्षसों के होश उड़ जाते हैं।
लंका में हनुमान जी जय श्रीराम का उद्घोष करते है। भारी गर्जना के साथ हनुमान जी समुद्र में आग बुझाकर सीता माता के पास आते हैं। उनको भरोसा दिलाते हुए कि श्रीराम जल्द रावण का समूल नाश करने आ रहे हैं।
चूडामणि लेकर वापस लौटते हैं। इसके आगे के प्रसंगों का मंचन रविवार को दोपहर दो बजे से होगा।
विज्ञापन
मंचन के दौरान कलाकारों ने दिखाया कि बालि के वध के बाद महाराज सुग्रीव बानर सेना को जामवंत के साथ सीता माता की खोज के लिए लंका की ओर रवाना करते हैं।
वानर सेना समुद्र तट पर बैठ कर विचार कर रही कि कौन सा वीर है जो समुद्र को लांघ कर लंका जा सके। सोच विचार कर रहे वानरों में हनुमान भी बैठे हुए हैं।
जामवंत कहते है कि कहइ रीछपति सुन हनुमाना का चुप साधि रहेउ बलवाना। पवन तनय बल पवन समाना, बुधि विवेक विग्यान निधाना। इसके बाद जामवंत कहते हैं कि आपका जन्म रामसेवा के लिए हुआ है।
विज्ञापन
यह सुन हनुमान जी अपना विराट रूप धारण कर लेते है और जामवंत की आज्ञा लेकर लंका प्रस्थान कर जाते हैं। लंका पहुंच कर उनका सामना लंकिनी से होता है, जिसे ज्ञान देकर वह लंका में प्रवेश कर जाते हैं।
विज्ञापन
विभीषण को राम कथा सुनाते हुए वो सीता माता की खोज में अशोक वाटिका पहुंच जाते हैं। यहां सीता से मिलकर सब हाल सुनाते हैं। उनकी आज्ञा लेकर फल खाते हैं और जब बाग के रक्षक राक्षस उन्हें रोकते हैं, तो वो गर्जना करते हुए संहार करने लगते हैं।
मेघनाथ के ब्रह्मपास में बंधकर रावण के समक्ष जाते है। राम का को भगवान का अवतार बताते हुए रावण से राम की शरण में चलने का निवेदन करते हैं। रावण पूछ में आग लगाने का आदेश देता है। हनुमान जी पूछ को बढ़ाते हुए खेल करते हैं।
राक्षसों द्वारा आग लगाने के बाद हनुमान जी सोने की लंका को जलाकर खाक कर देते है। विभीषण की कुटिया को छोड़कर पूरी लंका जल जाती है। यह देखकर राक्षसों के होश उड़ जाते हैं।
लंका में हनुमान जी जय श्रीराम का उद्घोष करते है। भारी गर्जना के साथ हनुमान जी समुद्र में आग बुझाकर सीता माता के पास आते हैं। उनको भरोसा दिलाते हुए कि श्रीराम जल्द रावण का समूल नाश करने आ रहे हैं।
चूडामणि लेकर वापस लौटते हैं। इसके आगे के प्रसंगों का मंचन रविवार को दोपहर दो बजे से होगा।