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34 लाख के गबन में बरखेरा प्रधान पर रिपोर्ट दर्ज
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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में 34 लाख रुपये से अधिक के गबन के मामले में आरोपी प्रधान का राजनीतिक रसूख और पहुंच डीएम के आगे बेदम साबित हुआ।
डीएम के नाराजगी जताए जाने के बाद गुरुवार देर रात आरोपी प्रधान, एक एडीओ पंचायत और एक ग्राम पंचायत अधिकारी के विरुद्ध गबन की रिपोर्ट बेहटागोकुल थाने में दर्ज कर ली गई।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंर्तगत बावन विकास खंड की ग्राम पंचायत बरखेरा को 566 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए 67 लाख 92 हजार रुपये अवमुक्त किए गए थे।
डीएम पुलकित खरे को शिकायत मिली थी कि धन का आहरण कर लिया गया, लेकिन शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया। जांच हुई तो 34 लाख 44 हजार 69 रुपये के गबन की पुष्टि हुई।
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छह जून को डीएम ने बरखेरा के प्रधान नरेश पाल सिंह, ग्राम सचिव के पद पर तैनात रहीं आकांक्षा सिंह और नरेंद्र द्विवेदी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। ग्राम पंचायत का खाता सीज किए जाने और गबन की गई राशि की रिकवरी के निर्देश भी दिए। बावजूद इसके 19 जून तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई।
गुरुवार को डीएम ने इस मामले पर डीपीआरओ आलोक सिन्हा से रिपोर्ट मांगी तो पता चला कि एफआईआर दर्ज नहीं है।
डीएम के नाराजगी जताए जाने पर देर रात शाहाबाद के एडीओ पंचायत दीपक श्रीवास्तव ने बेहटा गोकुल थाने पहुंचकर ग्राम प्रधान नरेशपाल सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी आकांक्षा सिंह और एडीओ पंचायत रहे नरेंद्र द्विवेदी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दी।
डीपीआरओ बोले
डीपीआरओ आलोक सिन्हा ने बताया कि राजनीतिक दबाव में एफआईआर दर्ज न होने की बात गलत है।
एडीओ पंचायत का प्रभार संभाल रहे सचिव नरेंद्र द्विवेदी को एफआईआर करानी थी, लेकिन वह खुद इस मामले में आरोपी थे।
ऐसे में गुरुवार को नरेंद्र द्विवेदी को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया और शाहाबाद के एडीओ पंचायत दीपक श्रीवास्तव से तहरीर दिलवाकर एफआईआर दर्ज करवा दी गई है।
34 लाख के गबन में बरखेरा प्रधान पर रिपोर्ट दर्ज
एडीओ पंचायत के भी आरोपी होने के चलते अटका था मामला
डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ ने शाहाबाद के एडीओ से कराई रिपोर्ट
बावन के एडीओ पंचायत जिला मुख्यालय से संबद्ध
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डीएम के नाराजगी जताए जाने के बाद गुरुवार देर रात आरोपी प्रधान, एक एडीओ पंचायत और एक ग्राम पंचायत अधिकारी के विरुद्ध गबन की रिपोर्ट बेहटागोकुल थाने में दर्ज कर ली गई।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंर्तगत बावन विकास खंड की ग्राम पंचायत बरखेरा को 566 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए 67 लाख 92 हजार रुपये अवमुक्त किए गए थे।
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डीएम पुलकित खरे को शिकायत मिली थी कि धन का आहरण कर लिया गया, लेकिन शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया। जांच हुई तो 34 लाख 44 हजार 69 रुपये के गबन की पुष्टि हुई।
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छह जून को डीएम ने बरखेरा के प्रधान नरेश पाल सिंह, ग्राम सचिव के पद पर तैनात रहीं आकांक्षा सिंह और नरेंद्र द्विवेदी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। ग्राम पंचायत का खाता सीज किए जाने और गबन की गई राशि की रिकवरी के निर्देश भी दिए। बावजूद इसके 19 जून तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई।
गुरुवार को डीएम ने इस मामले पर डीपीआरओ आलोक सिन्हा से रिपोर्ट मांगी तो पता चला कि एफआईआर दर्ज नहीं है।
डीएम के नाराजगी जताए जाने पर देर रात शाहाबाद के एडीओ पंचायत दीपक श्रीवास्तव ने बेहटा गोकुल थाने पहुंचकर ग्राम प्रधान नरेशपाल सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी आकांक्षा सिंह और एडीओ पंचायत रहे नरेंद्र द्विवेदी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दी।
डीपीआरओ बोले
डीपीआरओ आलोक सिन्हा ने बताया कि राजनीतिक दबाव में एफआईआर दर्ज न होने की बात गलत है।
एडीओ पंचायत का प्रभार संभाल रहे सचिव नरेंद्र द्विवेदी को एफआईआर करानी थी, लेकिन वह खुद इस मामले में आरोपी थे।
ऐसे में गुरुवार को नरेंद्र द्विवेदी को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया और शाहाबाद के एडीओ पंचायत दीपक श्रीवास्तव से तहरीर दिलवाकर एफआईआर दर्ज करवा दी गई है।
34 लाख के गबन में बरखेरा प्रधान पर रिपोर्ट दर्ज
एडीओ पंचायत के भी आरोपी होने के चलते अटका था मामला
डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ ने शाहाबाद के एडीओ से कराई रिपोर्ट
बावन के एडीओ पंचायत जिला मुख्यालय से संबद्ध