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गल्ला और सब्जी मंडी की दरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 05 Jun 2015 12:49 AM IST
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क्षेत्र में कृषि उत्पादन मंडी समिति न बनने से करीब
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20 हजार किसानों को उपज का पर्याप्त दाम नहीं मिल पा रहा, जिससे सड़क
किनारे फड़ लगाए बैठे आढ़ती किसानों का गल्ला व सब्जी आदि औने पौने दामों
में खरीदकर मंडी के भाव में बेंच रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना
पड़ रहा है।
हैरत की बात है कि जनप्रतिनिधियोें ने मंडी बनवाने का आश्वासन दिया, पर इस पर अमल नहीं किया। मंडी न बनने से फसल पर मिलने वाले सरकार को मंडी टैक्स का भी लाखों रुपयों का नुकसान प्रतिमाह हो रहा है। बिलग्राम तहसील मुख्यालय होने के बावजूद माधौगंज मंडी की उपमंडी यहां है, पर यहां आने वाले किसानों के लिए सुविधाओं का टोटा है।
यहां धूप से बचाव के लिए न ही टीन शेड की व्यवस्था और न ही पेयजल के इंतजाम किए गए हैं, जिससे दूर दराज से गल्ला व सब्जी लेकर आने वाले किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि किसानों का गेहूं सड़क किनारे फड़ लगाए बैठे आढ़ती करीब 1370 रुपये क्विंटल की दर पर खरीद कर माधौगंज मंडी में 1395 रुपये क्विंटल की दर पर और हरदोई की मंडी मेें 1405 से 1410 रुपये क्विंटल की दर से बेंच रहे हैं।
इस तरह किसानों को प्रति क्विंटल 30 से 40 रुपये का नुकसान हो रहा। इतना ही नहीं इन दुकानाें पर गेहूं की खरीद और बिक्री के दौरान मंडी शुल्क में भी खेल हो रहा है। आढ़तियों का कहना है कि यहां पर खरीदने वाले गेहूं को जब माधौगंज या हरदोई की मंडी में ले जाते हैं, तो भाड़ा भी उन्हें भरना पड़ता है।
फिलहाल इस खेल में सरकार को मंडी शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। उधर, क्षेत्र के किसानों द्वारा तोरई, भिंडी, मिर्च, खीरा ककड़ी, तरबूज, खरबूजा की बडे़ पैमाने पर पैदावार की जाती है। सैकड़ों क्विंटल सब्जी प्रतिदिन सड़क किनारे लगी मंडी में ब्रिकी को आती है।
आढ़ती मनमानी से किसानों का उत्पादन खरीदते और इंकार करने पर किसान कम दामों में बेंचकर लौट जाते हैं, जिससे किसानों का उपज का लाभ नहीं मिल पा रहा। आलू की खेती ज्यादा होने से पैदावार को पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद, कन्नौज, उन्नाव व लखनऊ की मंडी मेें बेचने को किसानों को जाना पड़ता है।
हैरत की बात है कि जनप्रतिनिधियोें ने मंडी बनवाने का आश्वासन दिया, पर इस पर अमल नहीं किया। मंडी न बनने से फसल पर मिलने वाले सरकार को मंडी टैक्स का भी लाखों रुपयों का नुकसान प्रतिमाह हो रहा है। बिलग्राम तहसील मुख्यालय होने के बावजूद माधौगंज मंडी की उपमंडी यहां है, पर यहां आने वाले किसानों के लिए सुविधाओं का टोटा है।
यहां धूप से बचाव के लिए न ही टीन शेड की व्यवस्था और न ही पेयजल के इंतजाम किए गए हैं, जिससे दूर दराज से गल्ला व सब्जी लेकर आने वाले किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि किसानों का गेहूं सड़क किनारे फड़ लगाए बैठे आढ़ती करीब 1370 रुपये क्विंटल की दर पर खरीद कर माधौगंज मंडी में 1395 रुपये क्विंटल की दर पर और हरदोई की मंडी मेें 1405 से 1410 रुपये क्विंटल की दर से बेंच रहे हैं।
इस तरह किसानों को प्रति क्विंटल 30 से 40 रुपये का नुकसान हो रहा। इतना ही नहीं इन दुकानाें पर गेहूं की खरीद और बिक्री के दौरान मंडी शुल्क में भी खेल हो रहा है। आढ़तियों का कहना है कि यहां पर खरीदने वाले गेहूं को जब माधौगंज या हरदोई की मंडी में ले जाते हैं, तो भाड़ा भी उन्हें भरना पड़ता है।
फिलहाल इस खेल में सरकार को मंडी शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। उधर, क्षेत्र के किसानों द्वारा तोरई, भिंडी, मिर्च, खीरा ककड़ी, तरबूज, खरबूजा की बडे़ पैमाने पर पैदावार की जाती है। सैकड़ों क्विंटल सब्जी प्रतिदिन सड़क किनारे लगी मंडी में ब्रिकी को आती है।
आढ़ती मनमानी से किसानों का उत्पादन खरीदते और इंकार करने पर किसान कम दामों में बेंचकर लौट जाते हैं, जिससे किसानों का उपज का लाभ नहीं मिल पा रहा। आलू की खेती ज्यादा होने से पैदावार को पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद, कन्नौज, उन्नाव व लखनऊ की मंडी मेें बेचने को किसानों को जाना पड़ता है।