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‘ईश्वर पक्षपात नहीं निभाता सबसे मित्रता’
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:09 AM IST
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ईश्वर के लिए उसके सारे बंदे बराबर है। वह पक्षपात से
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दूर रहकर जिस प्रकार लोगों से मित्रता का भाव रखता है, उसी प्रकार किसी भी
राज्य को चलाने वाले सम्राट या राजा को भी ऐसी ही मानसिकता का होना चाहिए
तभी राज्य में खुशहाली आ सकती है।
वेद मंदिर में यजुर्वेद परायण महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं को उसमें आए अध्याय के मंत्रों के बाबत जानकारी देते हुए आचार्य मातादेव उक्त बात कही। उन्होंने कहा कि जीवन इस तरह जीएं कि जो सम्मान पाने के योग्य हों उन्हें पूरा सम्मान दें। दुष्ट को दंड भी दें और निंदनीय की निंदा अवश्य करें। तभी राजा श्रेष्ठ समझा जाएगा।
सातवें अध्याय में कर्मफल के बाबत उन्होंने बताया कि गीता में योगिराज कृष्ण ने कहा कि कर्म करना तुम्हारे हाथ में है, फल ईश्वर के अधीन है। कर्म करने वाला जीव है, फल देना वाला ईश्वर है। इस तरह जीव कामना करें। वह धर्म संबंधी कार्य न करें, अधर्म संबंधी कार्य न करें।
उन्होेंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि परम पिता परमात्मा की इच्छा के बिना कोई आंखों की पलकों को भी नहीं हिला सकता। ईश्वर को हमेशा याद करते हुए धर्मानुकूल आचरण करें, तभी सबका कल्याण संभव है। इस दौरान योग के बाबत भी श्रद्धालुओं को जानकारी दी गई।
श्रद्धालुओं को अनुलोम विलोम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारण, ध्यान, समाधि के बाबत भी जानकारी दी गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां देकर विश्वशांति की कामना की। इस मौके पर सुधा विद्यावाचस्पति, युक्ता वैद्य, डा. श्याम सुंदर और सत्यवीर आर्य आदि लोग मौजूद थे।
वेद मंदिर में यजुर्वेद परायण महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं को उसमें आए अध्याय के मंत्रों के बाबत जानकारी देते हुए आचार्य मातादेव उक्त बात कही। उन्होंने कहा कि जीवन इस तरह जीएं कि जो सम्मान पाने के योग्य हों उन्हें पूरा सम्मान दें। दुष्ट को दंड भी दें और निंदनीय की निंदा अवश्य करें। तभी राजा श्रेष्ठ समझा जाएगा।
सातवें अध्याय में कर्मफल के बाबत उन्होंने बताया कि गीता में योगिराज कृष्ण ने कहा कि कर्म करना तुम्हारे हाथ में है, फल ईश्वर के अधीन है। कर्म करने वाला जीव है, फल देना वाला ईश्वर है। इस तरह जीव कामना करें। वह धर्म संबंधी कार्य न करें, अधर्म संबंधी कार्य न करें।
उन्होेंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि परम पिता परमात्मा की इच्छा के बिना कोई आंखों की पलकों को भी नहीं हिला सकता। ईश्वर को हमेशा याद करते हुए धर्मानुकूल आचरण करें, तभी सबका कल्याण संभव है। इस दौरान योग के बाबत भी श्रद्धालुओं को जानकारी दी गई।
श्रद्धालुओं को अनुलोम विलोम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारण, ध्यान, समाधि के बाबत भी जानकारी दी गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां देकर विश्वशांति की कामना की। इस मौके पर सुधा विद्यावाचस्पति, युक्ता वैद्य, डा. श्याम सुंदर और सत्यवीर आर्य आदि लोग मौजूद थे।