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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज में थायराइड की जांच कराओ... दवा बाजार से खरीदकर लाओ
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय की आधुनिक पैथालाॅजी में थायराइड की जांच की सुविधा उपलब्ध है।
थायराइड की पुष्टि होने पर ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सक मरीज को दवा लिख देते हैं, लेकिन यह दवा अस्पताल में मिलती ही नहीं। दरअसल आवश्यक दवाओं की सूची में थायराइड की दवा का उल्लेख ही नहीं है। ऐसे में चिकित्सक भी मरीज को खुले बाजार से दवा लेने की सलाह दे देते हैं।
लगभग छह माह पहले जिला अस्पताल की पैथालॉजी में थायराइड की जांच मशीन लगाई गई थी। मशीन को क्रियाशील करने में काफी समय लगा। इसके बाद जब जांच शुरू हो गई तो हर रोज बड़ी संख्या में मरीज जांच के लिए पहुंचने लगे। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सक भी मरीजों को दवा लिखने से पहले आवश्यक जांच करा लेना उचित मानते हैं और इसी क्रम में थायराइड की जांच भी लिखी जाती है।
शनिवार को थायराइड दिवस था। ऐसे में थायराइड की दवाइयों की उपलब्धता के बारे में जानकारी की गई तो पता चला कि मेडिकल कॉलेज ही नहीं पूरे जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में थायराइड की दवा ही नहीं है। थायराइड के मरीजों को खुले बाजार से ही दवा खरीदनी पड़ती है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर्य देशदीपक बताते हैं कि थायराइड की दवा आवश्यक दवाओं (इजेंसियल मेडिसिंस) की सूची में ही दर्ज नहीं है। इसी वजह से यह दवा अस्पताल में नहीं मिल पाती। मरीज को आवश्यकता के अनुसार दवा देनी होती है, इसलिए चिकित्सक खुले बाजार से दवा खरीदने की सलाह मरीजों को देते हैं।
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मेडिकल कॉलेज और पैथोलॉजी से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि हर रोज औसतन 20 मरीजों की थायराइड की जांच की जाती है। इनमें से चार मरीज थायराइड से पीड़ित पाए जाते हैं। इनकी रिपोर्ट दे दी जाती है और फिर डॉक्टर इसी आधार पर इलाज शुरू करते हैं, लेकिन सरकारी स्तर से दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं है।
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थायराइड की पुष्टि होने पर ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सक मरीज को दवा लिख देते हैं, लेकिन यह दवा अस्पताल में मिलती ही नहीं। दरअसल आवश्यक दवाओं की सूची में थायराइड की दवा का उल्लेख ही नहीं है। ऐसे में चिकित्सक भी मरीज को खुले बाजार से दवा लेने की सलाह दे देते हैं।
लगभग छह माह पहले जिला अस्पताल की पैथालॉजी में थायराइड की जांच मशीन लगाई गई थी। मशीन को क्रियाशील करने में काफी समय लगा। इसके बाद जब जांच शुरू हो गई तो हर रोज बड़ी संख्या में मरीज जांच के लिए पहुंचने लगे। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सक भी मरीजों को दवा लिखने से पहले आवश्यक जांच करा लेना उचित मानते हैं और इसी क्रम में थायराइड की जांच भी लिखी जाती है।
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शनिवार को थायराइड दिवस था। ऐसे में थायराइड की दवाइयों की उपलब्धता के बारे में जानकारी की गई तो पता चला कि मेडिकल कॉलेज ही नहीं पूरे जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में थायराइड की दवा ही नहीं है। थायराइड के मरीजों को खुले बाजार से ही दवा खरीदनी पड़ती है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर्य देशदीपक बताते हैं कि थायराइड की दवा आवश्यक दवाओं (इजेंसियल मेडिसिंस) की सूची में ही दर्ज नहीं है। इसी वजह से यह दवा अस्पताल में नहीं मिल पाती। मरीज को आवश्यकता के अनुसार दवा देनी होती है, इसलिए चिकित्सक खुले बाजार से दवा खरीदने की सलाह मरीजों को देते हैं।
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मेडिकल कॉलेज और पैथोलॉजी से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि हर रोज औसतन 20 मरीजों की थायराइड की जांच की जाती है। इनमें से चार मरीज थायराइड से पीड़ित पाए जाते हैं। इनकी रिपोर्ट दे दी जाती है और फिर डॉक्टर इसी आधार पर इलाज शुरू करते हैं, लेकिन सरकारी स्तर से दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं है।