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Hardoi News: मासूमों के इलाज की सस्ती दवाइयां अस्पताल से, महंगी मेडिकल स्टोर से लें
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फोटो- 31- मेडिकल कॉलेज स्थित पीडियाट्रिक वार्ड। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में 42 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड है। इन दिनों इस वार्ड में हर रोज औसतन छह बच्चों को भर्ती किया जाता है। भरपूर दवाएं उपलब्ध होने के दावे के बीच बच्चों के तीमारदारों को मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। पीडियाट्रिक वार्ड में ग्लूकोज की बोतल और कुछ चुनिंदा दवाइयां ही उपलब्ध हैं।
मौसम में उतार चढ़ाव और इसके साथ ही भीषण गर्मी बच्चों को बीमार कर रही है। बुखार, निमोनिया, संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चे मेडिकल कॉलेज आते हैं। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को भर्ती कर लिया जाता है लेकिन उपचार के नाम पर उन्हें सिर्फ सामान्य दवाएं और ग्लूकोज की बोतलें चढ़ा दी जाती हैं जबकि गंभीर बीमारियों के इलाज में प्रभावी असर दिखाने वाले इंजेक्शन और दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं।
बच्चे को झटके आ रहे 150 रुपये में मिला इंजेक्शन
हरपालपुर के भरसाना गांव निवासी संजीव ने बताया कि उनके पुत्र राज (7) को झटके आ रहे हैं। उसको तीन दिन पहले भर्ती करवाया था। भर्ती करने के बाद ही कई बार बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाएं ला चुके हैं। डॉक्टरों ने एक इंजेक्शन भी लिखा है वह मेडिकल स्टोर से अभी 150 रुपये का खरीद कर लाए हैं।
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सीने में दर्द है 450 रुपये की खरीदकर लाए दवा
बेहटागोकुल के निकट अटवा गांव निवासी राजेश का पुत्र दीनू (6) शुक्रवार रात यहां भर्ती है। परिवार के सुनील ने बताया कि डॉक्टरों ने कुछ दवाएं लिखकर पर्चा थमाते हुए बाहर से दवा लाने के लिए भेज दिया। करीब 450 रुपये की दवाएं खरीद कर लाए हैं, इसके बाद इलाज शुरू हुआ।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी पड़ते ही डिमांड भेज दी जाती है। दवाओं की कमी नहीं है। कोई बहुत जरूरी दवा अगर फौरन नहीं मिल पाती तो अभिभावकों से मंगाई जाती है। अगर कोई दवा होगी तो उसे मंगा लिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मौसम में उतार चढ़ाव और इसके साथ ही भीषण गर्मी बच्चों को बीमार कर रही है। बुखार, निमोनिया, संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चे मेडिकल कॉलेज आते हैं। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को भर्ती कर लिया जाता है लेकिन उपचार के नाम पर उन्हें सिर्फ सामान्य दवाएं और ग्लूकोज की बोतलें चढ़ा दी जाती हैं जबकि गंभीर बीमारियों के इलाज में प्रभावी असर दिखाने वाले इंजेक्शन और दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं।
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बच्चे को झटके आ रहे 150 रुपये में मिला इंजेक्शन
हरपालपुर के भरसाना गांव निवासी संजीव ने बताया कि उनके पुत्र राज (7) को झटके आ रहे हैं। उसको तीन दिन पहले भर्ती करवाया था। भर्ती करने के बाद ही कई बार बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाएं ला चुके हैं। डॉक्टरों ने एक इंजेक्शन भी लिखा है वह मेडिकल स्टोर से अभी 150 रुपये का खरीद कर लाए हैं।
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सीने में दर्द है 450 रुपये की खरीदकर लाए दवा
बेहटागोकुल के निकट अटवा गांव निवासी राजेश का पुत्र दीनू (6) शुक्रवार रात यहां भर्ती है। परिवार के सुनील ने बताया कि डॉक्टरों ने कुछ दवाएं लिखकर पर्चा थमाते हुए बाहर से दवा लाने के लिए भेज दिया। करीब 450 रुपये की दवाएं खरीद कर लाए हैं, इसके बाद इलाज शुरू हुआ।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी पड़ते ही डिमांड भेज दी जाती है। दवाओं की कमी नहीं है। कोई बहुत जरूरी दवा अगर फौरन नहीं मिल पाती तो अभिभावकों से मंगाई जाती है। अगर कोई दवा होगी तो उसे मंगा लिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो- 31- मेडिकल कॉलेज स्थित पीडियाट्रिक वार्ड। संवाद

फोटो- 31- मेडिकल कॉलेज स्थित पीडियाट्रिक वार्ड। संवाद