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Hardoi News: सतावर की खेती कर तलाशा आर्थिक उन्नति का रास्ता

Sun, 03 Sep 2023 11:13 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Sep 2023 11:13 PM IST
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Found the way to economic progress by cultivating Satavar
संवाद न्यूज एजेंसी
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बेहंदर। पारंपरिक खेती को छोड़कर किसान औषधीय खेती की ओर बढ़ रहे हैं। क्षेत्र के अकबरपुर ताल्हू गांव के प्रगतिशील किसान ने सतावर की खेती करनी शुरू की है। मवेशियों, कीट-पतंगों से नुकसान का भी खतरा नहीं है। खेती में लागत के सापेक्ष आमदनी भी अच्छी है।
अकबरपुर ताल्हू के किसान राज ने बताया कि वैसे तो वह मक्का, धान, गेहूं की पारंपरिक खेती ही करते थे। इसमें मवेशियों, कीट-पतंगों के कारण नुकसान हो रहा था। क्षेत्र में वनरोज और छुट्टा मवेशी पारंपरिक फसल धान, गेंहू, मक्का, सरसों आदि को चट कर जाते थे। बताया कि उन्होंने आर्थिक रूप से संपन्नता के लिए औषधीय खेती की ओर रुख किया।
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उन्होंने एकड़ में औषधीय खेती से शुरुआत की। सालाना दो से तीन लाख रुपये आमदनी हो जाती है। बताया कि एक एकड़ भूमि लीज पर ली और इसी में नेपाली सतावर की की बुवाई की है। बताया कि सतावर की कंदिल जड़े मधुर व रस युक्त होती हैं। इसकी औषधि गुणवत्ता बुद्धिवर्धक, दुग्धवर्धक, शुक्रवर्धक, बलकारक, मानसिक रोग, अतिसार, वात, पित्त विकार को दूर करने के काम में आती हैं।
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औषधीय गुणों के कारण सतावर की मांग बाजार में हमेश रहती है। सतावर प्रति क्विंटल 55 हजार रुपये तक बाजार में बिकती है। एक एकड़ में प्रोसेसिंग के बाद 10 से 12 क्विंटल औसतन उत्पादन होता है। शुरूआत में प्रति एकड़ लागत दो लाख तक आती है लेकिन, बाद में लागत कम हो जाती है। एक एकड़ में दो लाख से तीन लाख तक का मुनाफा होता है। सतावार की बाजार 20 हजार से 30 हजार रुपए क्विंटल का भाव रहता है।
आमदनी बाजार भाव पर भी निर्भर करती है। सतावर की खेती इस लिए भी फायदे की खेती है कि इसमें कीट-पतंग नहीं लगते। कांटेदार पौधे होने की वजह से जानवर भी इसे नहीं खाते हैं। खास बात है कि इसमें कोई बीमारी नहीं लगती। शुरूआत के दो से तीन महीने फसल को मवेशियों से बचाना पड़ता है।

घर पर ही बनाते हैं केंचुआ खाद
खेती की लागत कम करने के लिए राज घर पर ही केंचुआ (जैविक) खाद बनाते हैं। खेती से कमाई का सूत्र है कि खाद-बीज व कीटनाशक पर कम खर्च आए। डीएपी व यूरिया का पैसा बचाने के लिए घर पर ही केंचुआ की कंपोस्ट खाद बनाना उचित रहता है।
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