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बह गए बाढ़ रोकने के इंतजाम
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सवायजपुर। रामगंगा नदी के किनारे बसे गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए कराए गए करोड़ों के कार्य पानी की भेंट चढ़ गए। बाढ़ रोकने के लिए नदी के किनारे कराए गए इंतजाम नाकाफी साबित हुए है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इंतजाम में खेल किया गया, जिसके कारण करोड़ों का खर्च बेमतलब साबित हुआ है। तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में राम गंगा नदी के कटान को रोकने के लिए करोड़ों की लागत से बनाए जाने वाले डैम्पनर कार्य में नदी के किनारे पर बालू भरकर बैग डाल दिए गए।
गांव वालों का कहना है कि नियमानुसार किनारों पर डैम्पनर (पानी को रोकने की व्यवस्था) नहीं बनाए गए। सिर्फ बालू भरकर मजदूरों से नदी के किनारे डाल दिए गए।
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निर्धारित ऊंचाई तक इन बैगों को लगाने के साथ ही इन बैगों को सेट करने के लिए निर्धारित ऊंचाई तक बांस आदि लगाए जाने चाहिए थे, मगर ऐसा नहीं किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बांध बनाने में मानक का प्रयोग न होने से कटान की रोकथाम नहीं हो पा रही है।
तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित रहने वाले गांवों में गोरिया, साईं, बरहुली, दुर्जना, बेहटा, प्रतिपालपुर, रवियापुर गांव के लिए एक साल पूर्व दो करोड़ रुपये से अधिक का बजट जारी किया गया था।
मनरेगा से सिंचाई विभाग को दिए गए बजट से प्रत्येक गांव में लगभग 40 लाख रुपये से डैम्पनर कार्य कराए जाने थे। अजीत सिंह बरौली, अवधेश सिंह, रिषीराज सांई, विमलेश आदि ने बताया कि श्रमिकों के भुगतान में भी खेल किया गया है।
सभी गांवों में खर्च की गई धनराशि के भुगतान विवरण की जांच होने पर हकीकत सामने आ जाएगी।
डैम्पनर का कार्य साठ प्रतिशत हो पाया था। शेष कार्य जलस्तर बढ़ जाने के कारण नहीं हो सका है। डैम्पनर कार्य के चलते ही नदी के किनारों का कटान पहले की अपेेक्षा कम हुआ है।
- अमित श्रीवास्तव, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग
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ग्रामीणों का आरोप है कि इंतजाम में खेल किया गया, जिसके कारण करोड़ों का खर्च बेमतलब साबित हुआ है। तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में राम गंगा नदी के कटान को रोकने के लिए करोड़ों की लागत से बनाए जाने वाले डैम्पनर कार्य में नदी के किनारे पर बालू भरकर बैग डाल दिए गए।
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गांव वालों का कहना है कि नियमानुसार किनारों पर डैम्पनर (पानी को रोकने की व्यवस्था) नहीं बनाए गए। सिर्फ बालू भरकर मजदूरों से नदी के किनारे डाल दिए गए।
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निर्धारित ऊंचाई तक इन बैगों को लगाने के साथ ही इन बैगों को सेट करने के लिए निर्धारित ऊंचाई तक बांस आदि लगाए जाने चाहिए थे, मगर ऐसा नहीं किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बांध बनाने में मानक का प्रयोग न होने से कटान की रोकथाम नहीं हो पा रही है।
तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित रहने वाले गांवों में गोरिया, साईं, बरहुली, दुर्जना, बेहटा, प्रतिपालपुर, रवियापुर गांव के लिए एक साल पूर्व दो करोड़ रुपये से अधिक का बजट जारी किया गया था।
मनरेगा से सिंचाई विभाग को दिए गए बजट से प्रत्येक गांव में लगभग 40 लाख रुपये से डैम्पनर कार्य कराए जाने थे। अजीत सिंह बरौली, अवधेश सिंह, रिषीराज सांई, विमलेश आदि ने बताया कि श्रमिकों के भुगतान में भी खेल किया गया है।
सभी गांवों में खर्च की गई धनराशि के भुगतान विवरण की जांच होने पर हकीकत सामने आ जाएगी।
डैम्पनर का कार्य साठ प्रतिशत हो पाया था। शेष कार्य जलस्तर बढ़ जाने के कारण नहीं हो सका है। डैम्पनर कार्य के चलते ही नदी के किनारों का कटान पहले की अपेेक्षा कम हुआ है।
- अमित श्रीवास्तव, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग