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Hardoi News: फर्जी चालान से वित्तविहीन विद्यालय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को लगा रहे चूना
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राजीव शर्मा
हरदोई। माध्यमिक शिक्षा विभाग में बोर्ड परीक्षा शुल्क में फर्जीवाड़ा कर विभाग को वित्त विहीन विद्यालय प्रतिवर्ष लाखाें रुपये का चूना लगा रहे है। जांच में संदिग्ध मिले चालान से करीब 20 लाख से अधिक के राजस्व का नुकसान किया गया है। पूर्ण रूप से जांच होने पर जहां विद्यालयों की संख्या बढ़ सकती है, वहीं घोटाले की धनराशि करोड़ों में पहुंच सकती है। जिले ही नहीं प्रदेश में भी इस प्रकार के फर्जीवाड़े की संभावना जताई गई हैं। जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई हैं। जिसमें कई और लपेटे में आ सकते हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा के लिए हाईस्कूल और इंटर का शुल्क निर्धारित है। हाईस्कूल के विद्यार्थियों से 500 रुपये और 75 पैसे और इंटर के विद्यार्थियों से 600 रुपये और 75 पैसे जमा कराए जाते हैं। इस शुक्ल को विद्यालय प्रशासन की ओर से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव के खाते में चालान के माध्यम से किया जाता है। विद्यालय संचालक चालन की प्रति और विद्यालय की नामावली जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करते है, जिसमें नामावली से छात्र संख्या और चालान से धनराशि का मिलन का बोर्ड को भेज दी जाती हैं। यही प्रक्रिया विगत कई वर्षों से पूरे प्रदेश में चल रही है। जिले में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा था।
इंसेट
विवरण मांगने पर खुली पोलयूपी बोर्ड की ओर से विगत तीन वर्षों में जमा किए गए शुल्क का विवरण मांगा गया था। बोर्ड की ओर से विवरण मांगें जाने पर चालान के आधार पर धनराशि का योग किया जा रहा था। योग करने के दौरान विभागीय कर्मचारियों को कुछ चालान पर संदेह हुआ, तो ट्रेजरी से चालान की सूची मांगी गई। मिलान करने पर 31 विद्यालयों के चालान में अंतर मिला। उनमें कई तो सूची के क्रमांक में नहीं थे, तो कई में जो धनराशि दर्शाई गई थी। उससे काफी कम जमा थी।
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इंसेट
ऐसे हुआ खेल
विद्यालय संचालकों ने कई चालान में विद्यार्थियों की संख्या से कम धनराशि जमा की और चालान को स्कैन कर अधिक धनराशि भर कर कार्यालय में जमा कर दिए। कई विद्यालय तो ऐसे है, जिन्होंंने चालान की धनराशि बैंक में जमा ही नहीं की और फर्जी चालान स्कैन कर कार्यालय में जमा कर दिए। जिसमें कई रंगीन चालान है। जिससे विभागीय लोगों को शक न हो।
31 विद्यालयों के संदिग्ध चालान मिले विभागीय जांच में प्रथम चरण में 31 विद्यालयों के चालान संदिग्ध मिले हैं। जिनसे करीब 20 लाख से अधिक से खेल किया गया है। धनराशि इससे भी अधिक हो सकती है।
पांच सदस्यीय टीम कर रही जांच
चालान के फर्जीवाड़े के प्रकाश में आने पर पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। जो विगत तीन वर्षों के चालान की ट्रेजरी से सूची प्राप्त कर मिलान कर रही है। टीम इस वर्ष के जमा चालान की भी जांच करेंगी।
वर्जन 31 विद्यालय प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी किया गया है। चालान की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बाल मुकुंद प्रसाद, जिला विद्यालय निरीक्षक
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हरदोई। माध्यमिक शिक्षा विभाग में बोर्ड परीक्षा शुल्क में फर्जीवाड़ा कर विभाग को वित्त विहीन विद्यालय प्रतिवर्ष लाखाें रुपये का चूना लगा रहे है। जांच में संदिग्ध मिले चालान से करीब 20 लाख से अधिक के राजस्व का नुकसान किया गया है। पूर्ण रूप से जांच होने पर जहां विद्यालयों की संख्या बढ़ सकती है, वहीं घोटाले की धनराशि करोड़ों में पहुंच सकती है। जिले ही नहीं प्रदेश में भी इस प्रकार के फर्जीवाड़े की संभावना जताई गई हैं। जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई हैं। जिसमें कई और लपेटे में आ सकते हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा के लिए हाईस्कूल और इंटर का शुल्क निर्धारित है। हाईस्कूल के विद्यार्थियों से 500 रुपये और 75 पैसे और इंटर के विद्यार्थियों से 600 रुपये और 75 पैसे जमा कराए जाते हैं। इस शुक्ल को विद्यालय प्रशासन की ओर से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव के खाते में चालान के माध्यम से किया जाता है। विद्यालय संचालक चालन की प्रति और विद्यालय की नामावली जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करते है, जिसमें नामावली से छात्र संख्या और चालान से धनराशि का मिलन का बोर्ड को भेज दी जाती हैं। यही प्रक्रिया विगत कई वर्षों से पूरे प्रदेश में चल रही है। जिले में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा था।
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विवरण मांगने पर खुली पोलयूपी बोर्ड की ओर से विगत तीन वर्षों में जमा किए गए शुल्क का विवरण मांगा गया था। बोर्ड की ओर से विवरण मांगें जाने पर चालान के आधार पर धनराशि का योग किया जा रहा था। योग करने के दौरान विभागीय कर्मचारियों को कुछ चालान पर संदेह हुआ, तो ट्रेजरी से चालान की सूची मांगी गई। मिलान करने पर 31 विद्यालयों के चालान में अंतर मिला। उनमें कई तो सूची के क्रमांक में नहीं थे, तो कई में जो धनराशि दर्शाई गई थी। उससे काफी कम जमा थी।
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ऐसे हुआ खेल
विद्यालय संचालकों ने कई चालान में विद्यार्थियों की संख्या से कम धनराशि जमा की और चालान को स्कैन कर अधिक धनराशि भर कर कार्यालय में जमा कर दिए। कई विद्यालय तो ऐसे है, जिन्होंंने चालान की धनराशि बैंक में जमा ही नहीं की और फर्जी चालान स्कैन कर कार्यालय में जमा कर दिए। जिसमें कई रंगीन चालान है। जिससे विभागीय लोगों को शक न हो।
31 विद्यालयों के संदिग्ध चालान मिले विभागीय जांच में प्रथम चरण में 31 विद्यालयों के चालान संदिग्ध मिले हैं। जिनसे करीब 20 लाख से अधिक से खेल किया गया है। धनराशि इससे भी अधिक हो सकती है।
पांच सदस्यीय टीम कर रही जांच
चालान के फर्जीवाड़े के प्रकाश में आने पर पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। जो विगत तीन वर्षों के चालान की ट्रेजरी से सूची प्राप्त कर मिलान कर रही है। टीम इस वर्ष के जमा चालान की भी जांच करेंगी।
वर्जन 31 विद्यालय प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी किया गया है। चालान की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बाल मुकुंद प्रसाद, जिला विद्यालय निरीक्षक