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Hardoi News: क्षेत्र पंचायतों के खातों में वित्त आयोग के 36.49 रुपये डंप

Thu, 27 Feb 2025 11:22 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Thu, 27 Feb 2025 11:22 PM IST
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Finance Commission's 36.49 crore rupees dumped in the accounts of area panchayats
- क्षेत्र पंचायतों की ओर से भी काम और भुगतान पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
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- मल्लावां में तो दो प्रतिशत भी विकास कार्यों में खर्च नहीं हो पाए रुपये

संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। क्षेत्र पंचायतों के खातों में विकास और निर्माण के लिए मिले राज्य और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में अभी तक 36.49 करोड़ से अधिक रुपये खातों में डंप हैं। क्षेत्र पंचायतों के जिम्मेदार भी काम और भुगतान पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। विकास खंड मल्लावां 4.73 करोड़ से अधिक रुपये पड़े हुए हैं।
क्षेत्र पंचायतों में कराए जाने वाले कामों और अन्य जरूरतों को पूरा किए जाने के लिए पंचायतीराज विभाग के माध्यम से राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग में रुपये दिए जाते हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब एक माह बचा है और क्षेत्र पंचायतों के खातों में राज्य वित्त आयोग के 7,25,88,688 रुपये और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में 29,23,76,473 रुपये खातों में पड़े हैं। क्षेत्र पंचायतों को मिले रुपये और खर्च की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया। विकास खंड मल्लावां में दोनों आयोग की मद के 4,73,99,900 रुपये खाता में पड़ा हुए हैं। राज्य वित्त आयोग में मल्लावां क्षेत्र पंचायत ने एक प्रतिशत भी खर्च नहीं किए हैं, जबकि केंद्रीय वित्त आयोग में करीब दो प्रतिशत रुपये व्यय किए गए हैं।
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खातों में भरपूर रकम और मनरेगा के कामों का रोना
क्षेत्र पंचायतों के खातों में राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में पर्याप्त रकम है, जिससे काम कराने में क्षेत्र पंचायत के जिम्मेदारों की गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है। जबकि मनरेगा मद से काम कराने के लिए कार्ययोजना की स्वीकृति के लिए सिफारिश तक कराने से नहीं चूक रहे। हकीकत यह है कि क्षेत्र पंचायतों की ओर से मनरेगा में कार्ययोजना अभी तक नहीं दी जा सकी है।
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कोट
जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी
क्षेत्र पंचायतों को राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में मिले और खर्च रुपयों की समीक्षा की गई। विकास खंड मल्लावां की स्थिति सबसे खराब है। मल्लावां में अभी तक दो प्रतिशत रुपये भी खर्च नहीं किए जा सकें और वित्तीय वर्ष समाप्त होने को हैं। जिससे लोगों की सुविधा और सहूलियत के काम भी नहीं कराए गए हैं। क्षेत्र पंचायत के जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी।-सौम्या गुरूरानी, सीडीओ
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