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धरती की विराट शक्ति को समझने की आवश्यकता

Mon, 30 Dec 2019 12:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 30 Dec 2019 12:27 AM IST
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हरदोई। धरती की विराट शक्ति को समझने की आवश्यकता है और इसकी शक्ति के संतुलन को साध कर खेती करने की अन्नदाताओं को जरूरत है।
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क्षत्रिय धर्मशाला में अक्षरम एजुकेशनल एवं वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में रविवार को आयोजित कृषक जागरूकता गोष्ठी में मुख्य अतिथि पद्मश्री भारत भूषण त्यागी ने उक्त बात कही। उन्होंने किसानों को प्रकृति एवं मानव के बीच संतुलन साधने पर बल देते हुए कहा कि मनुष्य आज ज्ञान के अभाव में धरती की प्रकृति को समझने की जगह संतुलन बिगाड़ रहा है। उन्होंने किसानों के साथ उपस्थित गणमान्य नागरिकों को खेती के नवीन प्रयोगों की जानकारी दी और किसानों की जिज्ञासाओं को शांत करके उन्हें नवीन रास्तों द्वारा प्राकृतिक रूप से कृषि के माध्यम सुझाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति उनसे उन्नत खेती के तौर तरीके सीखना चाहे तो वो बुलंदशहर आकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि वह स्वयं मिश्रित व सहफसली करके साल में एक एकड़ से तीन से चार लाख रुपए कमाते हैं। यानी एक किसान से चार गुना अधिक। इस अवसर पर उप निदेशक कृषि आशुतोष कुमार मिश्र, अक्षरम संस्था के अध्यक्ष डॉ. संजय सिंह , धर्मसुधा ट्रस्ट के प्रमुख समीर सिंह ,सचिव अभिषेक द्विवेदी, उदित पाठक, विकास सारांश, दिलीप गुप्ता, अजीत शुक्ल ,दानिश किरमानी, सैयद अम्मार जैदी ,आलोक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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