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सिंचाई के लिए चाहिए पानी, नहर में उड़ रही धूल
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कछौना। शारदा नहर की लखनऊ ब्रांच में पानी न आने के कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गेहूं की फसल में सिंचाई की आवश्यकता है, लेकिन पानी नहीं आ रहा है। इससे पहले भी बुवाई के दौरान नहर में पानी नहीं आया था और किसानों को निजी संसाधनों का इस्तेमाल कर खेतों की सिंचाई करनी पड़ी थी।
जनपद में बड़ी संख्या में किसान गेहूं और धान की फसल करते हैं। धान की कटाई के बाद अधिकांश किसान खेतों में गेहूं की बुवाई करते हैं। किसानों को बुवाई से पहले खेत की सिंचाई की जरूरत पड़ती है, लेकिन कछौना क्षेत्र में दो माह से नहर में पानी नहीं आया। इसके कारण किसानों को निजी संसाधनों का इस्तेमाल कर खेतों की सिंचाई करनी पड़ी और फिर गेहूं की बुवाई हुई। अब गेहूं की फसल में पानी की आवश्यकता है, लेकिन नहर में पानी नहीं है। इतना ही नहीं सरसों और गन्ने में भी सिंचाई की जरूरत है, लेकिन किसानों को नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है।
किसानों ने बताई समस्या
रमेश का कहना है कि अगर नहर में पानी आ जाए, तो किसानों का बोझ कम हो जाएगा। डीजल बहुत मंहगा है और पंपिंग सेट से सिंचाई करना मुसीबत से कम नहीं। बुवाई के समय भी पानी नहीं मिला था।
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राम आसरे कहते हैं कि पिछले दो माह से नहर में पानी नहीं आया है। पानी आ जाए, तो कम से कम सिंचाई का बोझ हल्का हो जाएगा। सिंचाई के लिए पंपिंग सेट भी किराए पर लेना पड़ता है।
इदरीश ने कहा कि लंबे समय से इस बार नहर में पानी नहीं आया। बुवाई करनी थी, तो पंपिंग सेट किराये पर लेकर आए थे और डीजल भी मंहगा पड़ा था। अब सिंचाई की जरूरत है, तो पानी आना जरूरी है।
राम खिलावन ने कहा कि बुवाई के समय खेतों में पलेवा करनी थी तो भी नहर में पानी नहीं आया था। अब भी पानी नहीं है। अब खेत में पानी की जरूरत है, तो फिर से पंपिंग सेट और डीजल की व्यवस्था में लगे हैं।
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जनपद में बड़ी संख्या में किसान गेहूं और धान की फसल करते हैं। धान की कटाई के बाद अधिकांश किसान खेतों में गेहूं की बुवाई करते हैं। किसानों को बुवाई से पहले खेत की सिंचाई की जरूरत पड़ती है, लेकिन कछौना क्षेत्र में दो माह से नहर में पानी नहीं आया। इसके कारण किसानों को निजी संसाधनों का इस्तेमाल कर खेतों की सिंचाई करनी पड़ी और फिर गेहूं की बुवाई हुई। अब गेहूं की फसल में पानी की आवश्यकता है, लेकिन नहर में पानी नहीं है। इतना ही नहीं सरसों और गन्ने में भी सिंचाई की जरूरत है, लेकिन किसानों को नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है।
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किसानों ने बताई समस्या
रमेश का कहना है कि अगर नहर में पानी आ जाए, तो किसानों का बोझ कम हो जाएगा। डीजल बहुत मंहगा है और पंपिंग सेट से सिंचाई करना मुसीबत से कम नहीं। बुवाई के समय भी पानी नहीं मिला था।
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राम आसरे कहते हैं कि पिछले दो माह से नहर में पानी नहीं आया है। पानी आ जाए, तो कम से कम सिंचाई का बोझ हल्का हो जाएगा। सिंचाई के लिए पंपिंग सेट भी किराए पर लेना पड़ता है।
इदरीश ने कहा कि लंबे समय से इस बार नहर में पानी नहीं आया। बुवाई करनी थी, तो पंपिंग सेट किराये पर लेकर आए थे और डीजल भी मंहगा पड़ा था। अब सिंचाई की जरूरत है, तो पानी आना जरूरी है।
राम खिलावन ने कहा कि बुवाई के समय खेतों में पलेवा करनी थी तो भी नहर में पानी नहीं आया था। अब भी पानी नहीं है। अब खेत में पानी की जरूरत है, तो फिर से पंपिंग सेट और डीजल की व्यवस्था में लगे हैं।