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सरकारी आवास में महिला लिपिक ने लगाई फांसी
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फोटो- 26- जिला अस्पताल में गमजदा बैठा मृतका का पति उमेश व बिलखतीं बहनें। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। कलक्ट्रेट में स्थानीय निकाय लिपिक के पद पर तैनात महिला कर्मचारी ने गुरुवार दोपहर सरकारी आवास में फांसी लगा ली। दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला गया। बड़ी संख्या में सहकर्मी व अन्य लोग जिला चिकित्सालय पहुंचे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। मृतका के पति ने अफसरों द्वारा कार्रवाई के भय से खुदकुशी करने की बात कही है।
शहर के कोयलबाग कालोनी निवासी मधू शुक्ला (54) कलक्ट्रेट के संयुक्त कार्यालय में तैनात थीं। वह एलबीसी (स्थानीय निकाय लिपिक) के पद पर थीं। रोज की तरह ही गुरुवार को कार्यालय गईं थीं। परिजनों के मुताबिक दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे वह कार्यालय से अपने मकान चलीं गईं। बेडरूम में उन्होंने दुपट्टे से फांसी लगा ली। पति उमेश शुक्ला व अन्य लोगों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें उतारा और निजी वाहन से जिला चिकित्सालय ले गए। जिला चिकित्सालय में डॉ. वीके चौधरी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और अन्य लोग भी अस्पताल पहुंच गए। एडीएम वंदना त्रिवेदी और अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी अनिल सिंह यादव कोयल बाग कालोनी स्थित लिपिक के सरकारी आवास पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए।
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आकस्मिक कक्ष में मौजूद पति उमेश शुक्ला ने पत्रकारों से कहा कि मधू के विरुद्ध तत्कालीन डीएम ने एक मामले में जांच शुरू कराई थी। उमेश का आरोप है कि जांच खत्म हो गई थी और अब जांच दोबारा शुरू हो गई थी। आरोप है कि अधिकारी मधू को सेवा से बर्खास्त कर जेल भेजने की बात कह रहे थे। इसके कारण उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। मृतका के एक पुत्री गैरजनपद में पढ़ती है। शहर कोतवाल दीपक शुक्ला ने बताया कि परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है। डीएम ने पैनल से पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है। मृतका की पुत्री के आते ही पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
कलक्ट्रेट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 2017 में मधू के खिलाफ गोपनीय जांच तत्कालीन डीएम ने शुरू कराई थी। मधू के पूर्व में शस्त्र लिपिक रहने के दौरान किए गए कार्यों की जांच हुई थी। जांच में 226 शस्त्र लाइसेंसों के बोर परिवर्तन का मामला पकड़ा गया था और तबसे विभागीय कार्रवाई और जांच चल रही थी। मामले में 2018 में शहर कोतवाली में मधू पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। लेकिन वह उच्च न्यायालय चलीं गईं थीं। यही वजह थी कि उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई भी नहीं हुई थी। उक्त प्रकरण में दो नोटिस देकर मधू से जवाब मांगा गया था, लेकिन उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया था।
डीएम अविनाश कुमार ने कहा कि घटना दुखद है। मधू शुक्ला के विरुद्ध कार्रवाई 2018 से ही प्रचलित है। मधू शुक्ला को नोटिस देकर अभ्यावेदन मांगा गया था। जवाब न मिलने पर उन्हें फाइनल नोटिस दिया गया था, लेकिन इसका भी जवाब नहीं मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि मधू शुक्ला के विरुद्ध अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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शहर के कोयलबाग कालोनी निवासी मधू शुक्ला (54) कलक्ट्रेट के संयुक्त कार्यालय में तैनात थीं। वह एलबीसी (स्थानीय निकाय लिपिक) के पद पर थीं। रोज की तरह ही गुरुवार को कार्यालय गईं थीं। परिजनों के मुताबिक दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे वह कार्यालय से अपने मकान चलीं गईं। बेडरूम में उन्होंने दुपट्टे से फांसी लगा ली। पति उमेश शुक्ला व अन्य लोगों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें उतारा और निजी वाहन से जिला चिकित्सालय ले गए। जिला चिकित्सालय में डॉ. वीके चौधरी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और अन्य लोग भी अस्पताल पहुंच गए। एडीएम वंदना त्रिवेदी और अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी अनिल सिंह यादव कोयल बाग कालोनी स्थित लिपिक के सरकारी आवास पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए।
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आकस्मिक कक्ष में मौजूद पति उमेश शुक्ला ने पत्रकारों से कहा कि मधू के विरुद्ध तत्कालीन डीएम ने एक मामले में जांच शुरू कराई थी। उमेश का आरोप है कि जांच खत्म हो गई थी और अब जांच दोबारा शुरू हो गई थी। आरोप है कि अधिकारी मधू को सेवा से बर्खास्त कर जेल भेजने की बात कह रहे थे। इसके कारण उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। मृतका के एक पुत्री गैरजनपद में पढ़ती है। शहर कोतवाल दीपक शुक्ला ने बताया कि परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है। डीएम ने पैनल से पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है। मृतका की पुत्री के आते ही पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
कलक्ट्रेट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 2017 में मधू के खिलाफ गोपनीय जांच तत्कालीन डीएम ने शुरू कराई थी। मधू के पूर्व में शस्त्र लिपिक रहने के दौरान किए गए कार्यों की जांच हुई थी। जांच में 226 शस्त्र लाइसेंसों के बोर परिवर्तन का मामला पकड़ा गया था और तबसे विभागीय कार्रवाई और जांच चल रही थी। मामले में 2018 में शहर कोतवाली में मधू पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। लेकिन वह उच्च न्यायालय चलीं गईं थीं। यही वजह थी कि उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई भी नहीं हुई थी। उक्त प्रकरण में दो नोटिस देकर मधू से जवाब मांगा गया था, लेकिन उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया था।
डीएम अविनाश कुमार ने कहा कि घटना दुखद है। मधू शुक्ला के विरुद्ध कार्रवाई 2018 से ही प्रचलित है। मधू शुक्ला को नोटिस देकर अभ्यावेदन मांगा गया था। जवाब न मिलने पर उन्हें फाइनल नोटिस दिया गया था, लेकिन इसका भी जवाब नहीं मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि मधू शुक्ला के विरुद्ध अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

फोटो- 27- कर्मचारी के सरकारी आवास में जांच करतीं एडीएम और साथ में एएसपी पूर्वी। संवाद- फोटो : HARDOI