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संडीला फायर भवन में बिजली कनेक्शन नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Wed, 27 Apr 2016 11:57 PM IST
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फायर ब्रिगेड
- फोटो : अमर उजाला
हरदोई। संडीला फायर भवन को बने करीब दो साल बीत गए हैं, लेकिन अभी तक इसमें बिजली का कनेक्शन नहीं कराया गया है। कर्मचारी जुगाड़ से टैंकर में पानी भरते हैं। तापमान लगातार बढ़ रहा है। फसल काटने में किसान जुटे हैं। हजारों बीघा फसल अग्निकांड की भेंट चढ़ चुकी है। संडीला के अग्निशमन विभाग के नए भवन को बने करीब दो साल से ज्यादा बीत चुका है मगर यहां बिजली कनेक्शन नहीं हुआ हुआ। फायर टैंकर में पानी भरने के लिए लगाए गए सबमर्सिबल पंप बिन बिजली शोपीस बने हुए हैं। कंट्रोल रूम भी बिना बिजली के लगभग ठप रहता है।
कर्मचारी किसी तरह बैट्री चार्ज कराकर कंट्रोल रूम तो रोशन कर लेते हैं, मगर टैंकर में पानी भरने के लिए ग्रामीणों के पंपिंग सेट अथवा सड़क किनारे बने गड्ढों और तालाबों का सहारा लेना पड़ता है। भीषण गर्मी में उसके सूख जाने पर खेतों पर सिंचाई के लिए लगे पंप ही आखिरी सहारा हैं। अग्निशमन अधिकारी छोटेलाल ने बताया कि बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया है अभी कनेक्शन मंजूर नहीं हुआ।
वहीं, हरदोई-अग्निशमन विभाग में कर्मचारियों को पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं है। करोड़ों की लागत से बने अग्निशमन भवन में एक भी हैंडपंप नहीं है। कर्मचारियों को इधर उधर से पानी भर कर लाना पड़ता है।
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एक गाड़ी के सहारे अग्निशमन
हरदोई-संडीला का अग्निशमन विभाग जहां बिजली और पानी के लिए जूझ रहा है वहीं, राजधानी की सीमा से सटी तहसील में बने अग्निशमन विभाग महज एक गाड़ी के सहारे चल रहा है। वह भी 20 साल पुरानी 1996 मॉडल की गाड़ी को अक्सर धक्का देकर स्टार्ट करना पड़ता है। औद्योगिक क्षेत्र और संडीला नगर के अलावा अतरौली, बेहंदर, कछौना, बेनीगंज तक आग की घटना सामने आने पर एक ही गाड़ी दौड़ती है। एक साथ दो घटनाएं या कोई भीषण अग्निकांड सामने आने पर स्थिति भयावह हो सकती है।
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कर्मचारी किसी तरह बैट्री चार्ज कराकर कंट्रोल रूम तो रोशन कर लेते हैं, मगर टैंकर में पानी भरने के लिए ग्रामीणों के पंपिंग सेट अथवा सड़क किनारे बने गड्ढों और तालाबों का सहारा लेना पड़ता है। भीषण गर्मी में उसके सूख जाने पर खेतों पर सिंचाई के लिए लगे पंप ही आखिरी सहारा हैं। अग्निशमन अधिकारी छोटेलाल ने बताया कि बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया है अभी कनेक्शन मंजूर नहीं हुआ।
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वहीं, हरदोई-अग्निशमन विभाग में कर्मचारियों को पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं है। करोड़ों की लागत से बने अग्निशमन भवन में एक भी हैंडपंप नहीं है। कर्मचारियों को इधर उधर से पानी भर कर लाना पड़ता है।
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एक गाड़ी के सहारे अग्निशमन
हरदोई-संडीला का अग्निशमन विभाग जहां बिजली और पानी के लिए जूझ रहा है वहीं, राजधानी की सीमा से सटी तहसील में बने अग्निशमन विभाग महज एक गाड़ी के सहारे चल रहा है। वह भी 20 साल पुरानी 1996 मॉडल की गाड़ी को अक्सर धक्का देकर स्टार्ट करना पड़ता है। औद्योगिक क्षेत्र और संडीला नगर के अलावा अतरौली, बेहंदर, कछौना, बेनीगंज तक आग की घटना सामने आने पर एक ही गाड़ी दौड़ती है। एक साथ दो घटनाएं या कोई भीषण अग्निकांड सामने आने पर स्थिति भयावह हो सकती है।