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बरातों से ज्यादा महंगी चुनावी सहालग
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हरदोई। कोरोना संक्रमण के बीच आई चुनावी सहालग ने पहली बार रोडवेज और रेलवे दोनों यात्री सेवाओं को एक साथ कमजोर कर दिया है। नतीजा यह है कि लोग प्राइवेट वाहनों पर पूरी तरह आश्रित हो गए हैं।
टैक्सी स्टैंड पर जमावड़ा लग रहा है। स्टैंड वालों ने बुकिंग की अधिकता को देखते हुए किराये में तीन गुने तक इजाफा कर दिया है। बावजूद सभी को टैक्सी उपलब्ध करा पाना मुश्किल हो रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी करीब 10,000 दैनिक यात्रियों को हो रही है। शादी-बरातों के दौरान प्राइवेट वाहनों की किल्लत बढ़ती है, लेकिन दैनिक यात्रियों पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता।
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उनके पास विकल्प के तौर पर रोडवेज सेवा हमेशा रही है, लेकिन इस बार रोडवेज बसों की बड़ी संख्या चुनावी ड्यूटी में लग गई है। रोडवेज और रेलवे दोनों की सेवाएं एक साथ तंग हैं।
लिहाजा प्राइवेट वाहन स्वामियों के जलवा कायम हो गया है। इमरजेंसी में यात्रा करने को मजबूर लोगों के पास केवल प्राइवेट वाहन ही विकल्प बचा है। उन्हें टैक्सी चालकों को मुंह मांगा किराया चुकाना पड़ रहा है।
दैनिक यात्री भी मजबूरी में डग्गामार वाहनों में ज्यादा किराया चुका कर यात्रा कर रहे हैं। अधिक खर्च के बावजूद उन्हें बेमानक चल रहे प्राइवेट वाहनों में ठूंस कर यात्रा करनी पड़ रही है।
फर्रुखाबाद की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाले सुरसा निवासी रमेश सिंह का कहना है कि रेलवे में आरक्षण की अनिवार्यता के बाद रोडवेज से ही अप-डाउन कर रहे थे, लेकिन अब रोडवेज बसों की भी उनके समय अनुसार उपलब्धता नहीं हो पा रही है।
ऐसे में उनको टैक्सी स्टैंड से बुकिंग करके जाना पड़ रहा है। हाल यह है कि जितना वेतन मिल रहा है, उससे ज्यादा दैनिक खर्च हो रहा, लेकिन नौकरी बचाए रखनी है, तो खर्चा बर्दाश्त करना पड़ रहा है।
डग्गामार वाहन खराब कर रहे सेहत
डग्गामार वाहन यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहे हैं। लखनऊ की एक इंडस्ट्री में सेल्स मैनेजर नुमाइशपुरवा निवासी अनिल राजवंशी ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से रोडवेज की कमी से प्राइवेट बसों में लखनऊ तक की यात्रा कर रहे हैं।
इन बसों में यात्रा करने से कई बार तबीयत खराब हो जाती है। क्षमता से अधिक सवारियों को ठूंसने की वजह से समस्या ज्यादा होती है। कई बार उल्टियां भी आने लगती हैं। इन वाहनों में संक्रमण का भी जोखिम है, लेकिन क्या करें, मजबूरी भी है।
जिले में तकरीबन 1,000 के आसपास निजी वाहन संचालित हैं, जो कि बुकिंग ही लेकर जाते हैं।
इसके अलावा लोकल में जिला मुख्यालय के लिए हरपालपुर, बावन, सवायजपुर, शाहाबाद, बिलग्राम, संडीला, पिहानी, टड़ियावां और सुरसा आदि से संचालित हो रहे हैं।
इन वाहनों के चालक भी करीब 60 रोडवेज बसों के चुनावी ड्यूटी में जाने से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इन टेंपो की संख्या भी काफी है।
टैक्सी और टेंपो चालकों द्वारा अधिक किराया वसूलने की किसी ने शिकायत नहीं की है। आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। जांच कराएंगे यदि बात सही तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- दयाशंकर, एआरटीओ प्रवर्तन
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टैक्सी स्टैंड पर जमावड़ा लग रहा है। स्टैंड वालों ने बुकिंग की अधिकता को देखते हुए किराये में तीन गुने तक इजाफा कर दिया है। बावजूद सभी को टैक्सी उपलब्ध करा पाना मुश्किल हो रहा है।
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सबसे ज्यादा परेशानी करीब 10,000 दैनिक यात्रियों को हो रही है। शादी-बरातों के दौरान प्राइवेट वाहनों की किल्लत बढ़ती है, लेकिन दैनिक यात्रियों पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता।
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उनके पास विकल्प के तौर पर रोडवेज सेवा हमेशा रही है, लेकिन इस बार रोडवेज बसों की बड़ी संख्या चुनावी ड्यूटी में लग गई है। रोडवेज और रेलवे दोनों की सेवाएं एक साथ तंग हैं।
लिहाजा प्राइवेट वाहन स्वामियों के जलवा कायम हो गया है। इमरजेंसी में यात्रा करने को मजबूर लोगों के पास केवल प्राइवेट वाहन ही विकल्प बचा है। उन्हें टैक्सी चालकों को मुंह मांगा किराया चुकाना पड़ रहा है।
दैनिक यात्री भी मजबूरी में डग्गामार वाहनों में ज्यादा किराया चुका कर यात्रा कर रहे हैं। अधिक खर्च के बावजूद उन्हें बेमानक चल रहे प्राइवेट वाहनों में ठूंस कर यात्रा करनी पड़ रही है।
फर्रुखाबाद की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाले सुरसा निवासी रमेश सिंह का कहना है कि रेलवे में आरक्षण की अनिवार्यता के बाद रोडवेज से ही अप-डाउन कर रहे थे, लेकिन अब रोडवेज बसों की भी उनके समय अनुसार उपलब्धता नहीं हो पा रही है।
ऐसे में उनको टैक्सी स्टैंड से बुकिंग करके जाना पड़ रहा है। हाल यह है कि जितना वेतन मिल रहा है, उससे ज्यादा दैनिक खर्च हो रहा, लेकिन नौकरी बचाए रखनी है, तो खर्चा बर्दाश्त करना पड़ रहा है।
डग्गामार वाहन खराब कर रहे सेहत
डग्गामार वाहन यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहे हैं। लखनऊ की एक इंडस्ट्री में सेल्स मैनेजर नुमाइशपुरवा निवासी अनिल राजवंशी ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से रोडवेज की कमी से प्राइवेट बसों में लखनऊ तक की यात्रा कर रहे हैं।
इन बसों में यात्रा करने से कई बार तबीयत खराब हो जाती है। क्षमता से अधिक सवारियों को ठूंसने की वजह से समस्या ज्यादा होती है। कई बार उल्टियां भी आने लगती हैं। इन वाहनों में संक्रमण का भी जोखिम है, लेकिन क्या करें, मजबूरी भी है।
जिले में तकरीबन 1,000 के आसपास निजी वाहन संचालित हैं, जो कि बुकिंग ही लेकर जाते हैं।
इसके अलावा लोकल में जिला मुख्यालय के लिए हरपालपुर, बावन, सवायजपुर, शाहाबाद, बिलग्राम, संडीला, पिहानी, टड़ियावां और सुरसा आदि से संचालित हो रहे हैं।
इन वाहनों के चालक भी करीब 60 रोडवेज बसों के चुनावी ड्यूटी में जाने से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इन टेंपो की संख्या भी काफी है।
टैक्सी और टेंपो चालकों द्वारा अधिक किराया वसूलने की किसी ने शिकायत नहीं की है। आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। जांच कराएंगे यदि बात सही तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- दयाशंकर, एआरटीओ प्रवर्तन