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दुर्गा पूजा महोत्सव में हुआ कवि सम्मेलन
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 20 Oct 2015 11:01 PM IST
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दुर्गा महोत्सव के भक्तिमय वातावरण में सोमवार की रात को कवियों ने भी अपनी
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रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। शहर के मोहल्ला ऊंचा थोक में नव
दुर्गा समिति द्वारा कवि सम्मेलन आयोजित कराया गया। नव दुर्गा समिति के
प्रथम दुर्गा महोत्सव में कवि सम्मेलन हुआ। मुख्य अतिथि एसडीएम डा. अशोक
कुमार शुक्ला व उन्मुख संस्था संरक्षक श्याम जी मिश्र ने
दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। शुरू में सीतापुर से जगजीवन मिश्र ने मइया ललना समझ दुलरावा करौ, हम बुलाई न बुलाई मुला आवा करो.. से वाणी वंदना की। लखनऊ से आए अंकुर मिश्र ने पढ़ा तुम्हीं को लिखते हैं हम तुम्हीं को गुनगुनाते हैं, तुम्हारी याद में पल पल आंसू बहाते हैं। अजीत शुक्ला ने चुनावों पर कटाक्ष किया, कहा कि जंगल में लोकतंत्र के
लिए होंगे चुनाव, सुनकर हाथी घोड़े कुत्ते घूमने लगे। श्याम त्रिवेदी पंकज ने सुनाया कि इज्जत की ठेकेदारी हो जब मुजरा करने वालों की यारों खुद्दारों की भाषा तब बागी हो जाती है। ज्ञानेंद्र शुक्ला ने सुनाया कि बिताई साथ में से भुलाए श्याम बैठे हैं नशा आंखों में उतरे पिलाए जाम बैठे हैं। शाहाबाद में आए करूणेश दीक्षित ने सुनाया कि रात प्यासी है अंधेरा भी घना है।
सुनीत बाजपेई ने कहा कि आगाज लिखता हूं, कभी अंजाम लिखता हूं, कभी मशहूर खुद को भी बदनाम लिखता हूं। कवि सम्मेलन में मनीष मिश्र, संस्थाध्यक्ष अमित शुक्ल ने कविताएं सुनाई। इस दौरान अमित त्रिवेदी, प्रीतेश दीक्षित, कमला कांत, पंकज अवस्थी, मनभावना सिंह, नीतेश सिंह, विवेक मिश्रा, हरि प्रताप सिंह, पंकज तिवारी मौजूद रहे।
दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। शुरू में सीतापुर से जगजीवन मिश्र ने मइया ललना समझ दुलरावा करौ, हम बुलाई न बुलाई मुला आवा करो.. से वाणी वंदना की। लखनऊ से आए अंकुर मिश्र ने पढ़ा तुम्हीं को लिखते हैं हम तुम्हीं को गुनगुनाते हैं, तुम्हारी याद में पल पल आंसू बहाते हैं। अजीत शुक्ला ने चुनावों पर कटाक्ष किया, कहा कि जंगल में लोकतंत्र के
लिए होंगे चुनाव, सुनकर हाथी घोड़े कुत्ते घूमने लगे। श्याम त्रिवेदी पंकज ने सुनाया कि इज्जत की ठेकेदारी हो जब मुजरा करने वालों की यारों खुद्दारों की भाषा तब बागी हो जाती है। ज्ञानेंद्र शुक्ला ने सुनाया कि बिताई साथ में से भुलाए श्याम बैठे हैं नशा आंखों में उतरे पिलाए जाम बैठे हैं। शाहाबाद में आए करूणेश दीक्षित ने सुनाया कि रात प्यासी है अंधेरा भी घना है।
सुनीत बाजपेई ने कहा कि आगाज लिखता हूं, कभी अंजाम लिखता हूं, कभी मशहूर खुद को भी बदनाम लिखता हूं। कवि सम्मेलन में मनीष मिश्र, संस्थाध्यक्ष अमित शुक्ल ने कविताएं सुनाई। इस दौरान अमित त्रिवेदी, प्रीतेश दीक्षित, कमला कांत, पंकज अवस्थी, मनभावना सिंह, नीतेश सिंह, विवेक मिश्रा, हरि प्रताप सिंह, पंकज तिवारी मौजूद रहे।