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दुमकापुर की माटी का चमत्कार, दिलाया पुरस्कार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 28 Jan 2015 12:03 AM IST
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जिले की माटी में जन्मी एक और प्रतिभा ने पूरे देश
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में अपना डंका बजाया है। भारत में स्कूली शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन करने
एवं शिक्षा को नई दिशा प्रदान करने को लोनार के गांव दुमकापुर में जन्मे
जाने माने शिक्षाविद् प्रो. जेएस राजपूत को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित
किया है।
इससे प्रो. राजपूत ही नहीं, बल्कि उनका गृह जनपद भी भारत के नक्शे पर उभरकर अपने को गौरवान्वित महसूस करने लगा है। 66वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब पद्म पुरस्कारों की घोषणा भारत सरकार ने की, जिसमें स्कूली शिक्षा में आमूल चूल परिवर्तन करने को जिले के जगमोहन सिंह राजपूत को भी शामिल किया गया। जानक ारी के मुताबिक वर्ष 43 में जिले के छोटे से गांव लोनार के ग्राम दुमकापुर में उन्होंने जन्म लिया।
उन्होंने अपनी पढ़ाई गांव स्थित प्राथमिक स्कूल और फिर जिले के आरआर इंटर कालेज में की। उसके बाद वह उच्च शिक्षा को इलाहाबाद विवि में प्रवेश लिया। भौतिक विज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और देश व विदेश में उनके शोध पत्र प्रकाशित हुए और कई वर्षों तक विवि में अध्यापन कार्य किया।
वह एक जाने माने शिक्षाविद और कुशल प्रशासक के रूप में देश विदेश में भी जाने जाते हैं। उनको सम्मानित करने की घोषणा होते ही पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। खासकर उनके गांव दुमकापुर में लोग एक दूसरे को मुंह तक मीठा कराने लगे। प्रोफेसर राजपूत ने केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया है।
वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव, नेशनल बाल भवन के अध्यक्ष, शिक्षा सलाहकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, एनसीईआरटी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद एनसीटीई संस्थापक अध्यक्ष जैसे पदों को भी सुशोभित कर चुके हैं। उन्हें यूनेस्को द्वारा भी कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
इससे प्रो. राजपूत ही नहीं, बल्कि उनका गृह जनपद भी भारत के नक्शे पर उभरकर अपने को गौरवान्वित महसूस करने लगा है। 66वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब पद्म पुरस्कारों की घोषणा भारत सरकार ने की, जिसमें स्कूली शिक्षा में आमूल चूल परिवर्तन करने को जिले के जगमोहन सिंह राजपूत को भी शामिल किया गया। जानक ारी के मुताबिक वर्ष 43 में जिले के छोटे से गांव लोनार के ग्राम दुमकापुर में उन्होंने जन्म लिया।
उन्होंने अपनी पढ़ाई गांव स्थित प्राथमिक स्कूल और फिर जिले के आरआर इंटर कालेज में की। उसके बाद वह उच्च शिक्षा को इलाहाबाद विवि में प्रवेश लिया। भौतिक विज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और देश व विदेश में उनके शोध पत्र प्रकाशित हुए और कई वर्षों तक विवि में अध्यापन कार्य किया।
वह एक जाने माने शिक्षाविद और कुशल प्रशासक के रूप में देश विदेश में भी जाने जाते हैं। उनको सम्मानित करने की घोषणा होते ही पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। खासकर उनके गांव दुमकापुर में लोग एक दूसरे को मुंह तक मीठा कराने लगे। प्रोफेसर राजपूत ने केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया है।
वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव, नेशनल बाल भवन के अध्यक्ष, शिक्षा सलाहकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, एनसीईआरटी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद एनसीटीई संस्थापक अध्यक्ष जैसे पदों को भी सुशोभित कर चुके हैं। उन्हें यूनेस्को द्वारा भी कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।