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दीवारों पर ऐसे चित्र बनाएं, जिन्हें देख कुछ सीख सकें
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माधौगंज। निपुण भारत के अंतर्गत प्री प्राइमरी पर आधारित प्रयासों से आंगनबाड़ी और रेडनेस प्रशिक्षण प्राप्त अध्यापकों की कार्यशाला शुक्रवार को बीआरसी पर हुई।
बीईओ नागेंद्र चौधरी ने प्रत्येक प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में रेडनेस प्रशिक्षण संचालन एवं बाल वाटिका विकसित करने की बात कही।
बताया कि कक्ष में वॉल पेंटिंग उपलब्ध संसाधनों और सीएसआर फंडिंग आदि का प्रयोग करते हुए बाल वाटिका गतिविधि के लिए कक्षा कक्ष तैयार किया जाना है।
बच्चों के बैठने के लिए चटाई, दरिया, टेबल-कुर्सी की व्यवस्था हो। खेल सामग्री बच्चों की पहुंच में हो। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाएं भी होनी चाहिए। दीवार पर ऐसे चित्र बने होने चाहिए, जिसे बच्चे बार-बार देख कर कुछ सीख पाएं।
हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला की संख्या एक से 100 तक फलों व सब्जियों के चित्र कई प्रकार के गोल चौकोर, सप्ताह के नाम, महीनों के नाम आदि लिखे हों।
कमरे में एक दीवाल पर हर बच्चे के लिए पोर्ट फोलियो उसके नाम के साथ लगा हो, जिससे बच्चे खुद अपने द्वारा किए गए कार्य को रख सकें। विद्यालय में प्री प्राइमरी शिक्षा पर ध्यान देना है।
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इस मौके पर शिवशंकर द्विवेदी, मनोज कुमार, प्रियतम, नीरज गुप्ता, मनीष कुमार, विमल पाठक आदि मौजूद रहे।
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बीईओ नागेंद्र चौधरी ने प्रत्येक प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में रेडनेस प्रशिक्षण संचालन एवं बाल वाटिका विकसित करने की बात कही।
बताया कि कक्ष में वॉल पेंटिंग उपलब्ध संसाधनों और सीएसआर फंडिंग आदि का प्रयोग करते हुए बाल वाटिका गतिविधि के लिए कक्षा कक्ष तैयार किया जाना है।
बच्चों के बैठने के लिए चटाई, दरिया, टेबल-कुर्सी की व्यवस्था हो। खेल सामग्री बच्चों की पहुंच में हो। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाएं भी होनी चाहिए। दीवार पर ऐसे चित्र बने होने चाहिए, जिसे बच्चे बार-बार देख कर कुछ सीख पाएं।
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हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला की संख्या एक से 100 तक फलों व सब्जियों के चित्र कई प्रकार के गोल चौकोर, सप्ताह के नाम, महीनों के नाम आदि लिखे हों।
कमरे में एक दीवाल पर हर बच्चे के लिए पोर्ट फोलियो उसके नाम के साथ लगा हो, जिससे बच्चे खुद अपने द्वारा किए गए कार्य को रख सकें। विद्यालय में प्री प्राइमरी शिक्षा पर ध्यान देना है।
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इस मौके पर शिवशंकर द्विवेदी, मनोज कुमार, प्रियतम, नीरज गुप्ता, मनीष कुमार, विमल पाठक आदि मौजूद रहे।