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Hardoi News: होली की मस्ती में केमिकल वाले रंग कहीं त्वचा को न कर दें बदरंग

Mon, 02 Mar 2026 10:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 10:45 PM IST
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Don't let the chemical colours discolour your skin during the fun of Holi.
फोटो-11- डॉ. विजय कुमार सिंह तोमर। संवाद
हरदोई। जनपद में कल रंग पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। रंगों का त्योहार होली खुशियों और उमंग का प्रतीक है लेकिन एक छोटी सी लापरवाही होली की मस्ती को सजा में बदल सकती है। बाजार में बिकने वाले सस्ते और चमकीले सिंथेटिक रंग न केवल त्वचा और आंख को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।
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होली पर हर्बल रंगों से ही खेलना बेहतर होता है लेकिन अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में बाजार सिंथेटिक रंगों से भरा हुआ है। बाजार में मिलावटी रंग काफी सस्ती कीमत पर मिल जाते हैं। इन रंगों से होली खेलने पर शरीर को कई तरफ से नुकसान पहुंचता है। शरीर पर जलन, खुजली, चकत्ते और रैशेज हो सकते हैं। अगर इन समस्याओं को नजर अंदाज किया तो त्वचा के कैंसर का भी खतरा हो सकता है।
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चर्म रोग चिकित्सक डॉ. गौरी मिश्रा ने बताया कि होली खेलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें और शरीर पर सरसों या नारियल का तेल जरूर लगाएं। यदि रंग लगने के बाद जलन महसूस हो तो तुरंत ठंडे पानी से धोएं और घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय चर्म रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। हर्बल रंगों से ही होली खेलें और पानी के रंगों का प्रयोग करते समय विद्युत लाइन वाली जगह से दूर रहें। रंग खेलने के बाद उबटन लगाए और रंग को अच्छी तरह से साफ कर लें।
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अंधेपन का भी हो सकते हैं शिकार

मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विजय प्रताप सिंह तोमर ने बताया कि कई केमिकल युक्त रंगों में कॉपर सल्फेट को मिलाया जाता है जो आंखों में एलर्जी या अंधापन पैदा कर सकता है। रंग खेलते समय आंखों का बचाव बेहद जरूरी है। आंखों में रंग जाने से कॉर्निया में जख्म और आंखों में जलन होती है। इसके अलावा गुलाल के बारीक कण फेफड़ों में जाकर दमा और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों को भी बढ़ावा देते हैं। ऐसे में त्योहार पर रंग खेलते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर कोई समस्या हो रही है तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।



केमिकलयुक्त रंग से शरीर को नुकसान

रसायन विज्ञान प्रवक्ता हिमांशु त्रिवेदी ने बताया कि रंग में लेड ऑक्साइड होता है जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा कॉपर सल्फेट, लेड ऑक्साइड, क्रोमियम आयोडाइड, एल्युमिनियम ब्रोमाइड और कार्सिनोजेनिक जैसे रासायनिक पदार्थ मिले होते हैं। रंग में उपस्थित पारा, कांच व सिलिका फेफड़ों के लिए घातक होते हैं। इनसे गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को भी नुकसान पहुंच सकता है।


रंगों में मिलाए जाते हैं यह केमिकल

काला रंग - लेड ऑक्साइड
हरा रंग - कॉपर सल्फेट व मेलेकाइट ग्रीन

लाल रंग - मरकरी सल्फाइट
नीला रंग - रशियन ब्लू
बैंगनी रंग - जंक्शन वॉयलेट
सिल्वर रंग - एल्युमिनियम ब्रोमाइड
चमक के लिए - ग्लास पार्टिकल्स
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