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डिजिटल इंडिया : यूक्रेन से गांव की प्रधानी चला रही वैशाली
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वैशाली यादव। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। डिजिटल इंडिया के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे को हरदोई की बेटी वैशाली साकार कर रहीं हैं। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं वैशाली ने अपने गांव की दशा और दिशा बदलने का ख्वाब देखकर प्रधानी का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अब डिजिटल इंडिया के जरिये यूक्रेन से ही गांव की प्रधानी चला रहीं हैं। वह अपने गांव तेरा पुरसौली को यूक्रेन के गांवों की तर्ज पर विकसित करना चाहती हैं।
सांडी विकास खंड के गांव तेरा पुरसौली की बेटी वैशाली यादव यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। शुरुआती शिक्षा जिले में ग्रहण करने के बाद लखनऊ में पढ़ाई पूरी कर चिकित्सा शिक्षा के लिए यूक्रेन पहुंचीं वैशाली ने वहां के गांव देखे। वहां व्यवस्थित विकास, जल व पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन से वैशाली खासी प्रभावित हुईं।
यहीं से उन्हें तेरा पुरसौली का विकास यूक्रेन के गांवों की तर्ज पर करने का विचार आया। दरअसल वैशाली की दादी दो बार ग्राम प्रधान रह चुकीं हैं। वैशाली ने पंचायत चुनाव लड़ने की इच्छा जताई तो पिता महेंद्र यादव ने पढ़ाई पर ही ध्यान देने के लिए कहा, लेकिन वैशाली नहीं मानीं।
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महेंद्र ने समझाया कि यूक्रेन में रहकर ग्राम पंचायत के कार्यों का संचालन नहीं हो पाएगा तो होनहार बेटी ने डिजिटल इंडिया का हवाला दिया और कहा कि डोंगल सिस्टम से कार्य होता है। ग्राम पंचायत की बैठकें वर्चुअली की जा सकतीं हैं। वैशाली चुनाव लड़ीं और जीती भी। अब वह यूक्रेन से डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कर ग्राम पंचायत की व्यवस्थाएं संभाल रहीं हैं।
जल संरक्षण और प्रबंधन प्राथमिकता
वैशाली ने कहा कि एक वर्ष की पढ़ाई बाकी रह गई है। इसके बाद वापस गांव आएगी और ग्राम पंचायत को जिस तरह से विकसित करने के बारे में सोचा है, उसी आधार पर कार्य शुरू करेंगी। जल संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में पहला कार्य होगा ताकि गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित किया जा सके।
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सांडी विकास खंड के गांव तेरा पुरसौली की बेटी वैशाली यादव यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। शुरुआती शिक्षा जिले में ग्रहण करने के बाद लखनऊ में पढ़ाई पूरी कर चिकित्सा शिक्षा के लिए यूक्रेन पहुंचीं वैशाली ने वहां के गांव देखे। वहां व्यवस्थित विकास, जल व पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन से वैशाली खासी प्रभावित हुईं।
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यहीं से उन्हें तेरा पुरसौली का विकास यूक्रेन के गांवों की तर्ज पर करने का विचार आया। दरअसल वैशाली की दादी दो बार ग्राम प्रधान रह चुकीं हैं। वैशाली ने पंचायत चुनाव लड़ने की इच्छा जताई तो पिता महेंद्र यादव ने पढ़ाई पर ही ध्यान देने के लिए कहा, लेकिन वैशाली नहीं मानीं।
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महेंद्र ने समझाया कि यूक्रेन में रहकर ग्राम पंचायत के कार्यों का संचालन नहीं हो पाएगा तो होनहार बेटी ने डिजिटल इंडिया का हवाला दिया और कहा कि डोंगल सिस्टम से कार्य होता है। ग्राम पंचायत की बैठकें वर्चुअली की जा सकतीं हैं। वैशाली चुनाव लड़ीं और जीती भी। अब वह यूक्रेन से डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कर ग्राम पंचायत की व्यवस्थाएं संभाल रहीं हैं।
जल संरक्षण और प्रबंधन प्राथमिकता
वैशाली ने कहा कि एक वर्ष की पढ़ाई बाकी रह गई है। इसके बाद वापस गांव आएगी और ग्राम पंचायत को जिस तरह से विकसित करने के बारे में सोचा है, उसी आधार पर कार्य शुरू करेंगी। जल संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में पहला कार्य होगा ताकि गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित किया जा सके।