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Hardoi News: ऑर्थो विभाग में मरीज को निजी नर्सिंगहोम भेजने पर भिड़े डॉक्टर, होगी कार्रवाई
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो विभाग में मरीजों की खींचतान के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शनिवार को भी मरीज को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भेजने को लेकर दो डॉक्टरों के बीच विवाद का मामला सामने आया। कहासुनी के बाद मामला मेडिकल कॉलेज प्रशासन तक पहुंच गया। प्रशासन की ओर से सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर कार्रवाई की तैयारी कर उन्हें नोटिस दिया जा रहा है।
सांडी के बरंडारी गांव निवासी अरमान सिंह का पिछले दिनों सड़क हादसे में कंधा टूट गया था। हाथ में चोट लगने के बाद वह इलाज के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। शनिवार को उन्होंने मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो विभाग में डॉक्टर विनीश वर्मा और अविक राय को दिखाया। उन्होंने एक्सरे देखने के बाद मरीज के कंधे में ऑपरेशन कर प्लेट डालने की बात कही थी।
अरमान ने बताया कि उन्होंने ऑपरेशन में करीब 20 हजार रुपये खर्च आने की जानकारी दी गई। डॉक्टर ने उन्हें तत्काल भर्ती होने की भी सलाह दी। अरमान ने बताया कि उनके पास अधिक पैसे नहीं थे और साथ में भी कोई नहीं था तो उन्होंने सोमवार को भर्ती होने की बात कही। इस दौरान आरोप है कि सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अभिषेक वर्मा ने मरीज को एक पर्ची देते हुए बिलग्राम स्थित एक नर्सिंग होम में जाकर इलाज कराने की सलाह दी। इसकी जानकारी होते ही वहां मौजूद डॉक्टर अविक राय ने आपत्ति जताई और विवाद होने लगा। उन्होंने इसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को दी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर को नोटिस जारी किया।
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पहले भी सामने आते रहे हैं विवाद
ऑर्थो विभाग में मरीजों के ऑपरेशन और उन्हें बाहर रेफर करने की सलाह देने को लेकर विवाद की स्थिति पहले भी सामने आती रही है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर स्थिति में फिलहाल सुधार नहीं हो रहा है। अब एक नए मामले में नोटिस की कार्रवाई की जा रही है लेकिन मरीजों के इलाज को लेकर डॉक्टरों के बीच चल रही खींचतान का यह मामला विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
मरीज को दिया था नंबर लिखकर
सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अभिषेक वर्मा ने बताया कि मरीज ने कई जगह पट्टी कराने और दिखाने की बात कही थी तो उसको भर्ती हो जाने के लिए कहा गया था। मरीज ने सोमवार को भर्ती होने की बात कही इस पर उसे सिर्फ अपना मोबाइल नंबर लिखकर दिया था। उन्हें किसी तरह की गलतफहमी हो गई। वहीं डॉक्टर अविक राय के अनुसार मरीज को बाहर भेजा जा रहा था इसलिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को इसकी जानकारी दी।
इलाज के लिए मरीज को निजी अस्पताल जाने की सलाह देना उचित नहीं है। सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर को नोटिस दिया गया है। साथ ही मामले की जांच भी की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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सांडी के बरंडारी गांव निवासी अरमान सिंह का पिछले दिनों सड़क हादसे में कंधा टूट गया था। हाथ में चोट लगने के बाद वह इलाज के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। शनिवार को उन्होंने मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो विभाग में डॉक्टर विनीश वर्मा और अविक राय को दिखाया। उन्होंने एक्सरे देखने के बाद मरीज के कंधे में ऑपरेशन कर प्लेट डालने की बात कही थी।
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अरमान ने बताया कि उन्होंने ऑपरेशन में करीब 20 हजार रुपये खर्च आने की जानकारी दी गई। डॉक्टर ने उन्हें तत्काल भर्ती होने की भी सलाह दी। अरमान ने बताया कि उनके पास अधिक पैसे नहीं थे और साथ में भी कोई नहीं था तो उन्होंने सोमवार को भर्ती होने की बात कही। इस दौरान आरोप है कि सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अभिषेक वर्मा ने मरीज को एक पर्ची देते हुए बिलग्राम स्थित एक नर्सिंग होम में जाकर इलाज कराने की सलाह दी। इसकी जानकारी होते ही वहां मौजूद डॉक्टर अविक राय ने आपत्ति जताई और विवाद होने लगा। उन्होंने इसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को दी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर को नोटिस जारी किया।
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पहले भी सामने आते रहे हैं विवाद
ऑर्थो विभाग में मरीजों के ऑपरेशन और उन्हें बाहर रेफर करने की सलाह देने को लेकर विवाद की स्थिति पहले भी सामने आती रही है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर स्थिति में फिलहाल सुधार नहीं हो रहा है। अब एक नए मामले में नोटिस की कार्रवाई की जा रही है लेकिन मरीजों के इलाज को लेकर डॉक्टरों के बीच चल रही खींचतान का यह मामला विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
मरीज को दिया था नंबर लिखकर
सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अभिषेक वर्मा ने बताया कि मरीज ने कई जगह पट्टी कराने और दिखाने की बात कही थी तो उसको भर्ती हो जाने के लिए कहा गया था। मरीज ने सोमवार को भर्ती होने की बात कही इस पर उसे सिर्फ अपना मोबाइल नंबर लिखकर दिया था। उन्हें किसी तरह की गलतफहमी हो गई। वहीं डॉक्टर अविक राय के अनुसार मरीज को बाहर भेजा जा रहा था इसलिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को इसकी जानकारी दी।
इलाज के लिए मरीज को निजी अस्पताल जाने की सलाह देना उचित नहीं है। सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर को नोटिस दिया गया है। साथ ही मामले की जांच भी की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य