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डॉक्टरों ने गाई रामधुन, मरीज लौटे गुमसुम
Tue, 18 Jun 2019 12:05 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
हरदोई
हरदोई
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 18 Jun 2019 12:05 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोलकाता में वृद्ध मरीज की मौत के बाद चिकित्सक के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले प्राइवेट चिकित्सक हड़ताल पर रहे। नर्सिंग होम और प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी पूरी तरह से बंद रही। इसके कारण बड़ी संख्या में मरीजों को परेशानी का सामान करना पड़ा। आईएमए की स्थानीय शाखा के बैनर तले घंटाघर परिसर में एकत्र प्राइवेट चिकित्सकों ने कलक्ट्रेट परिसर तक पैदल मार्च किया। यहां रामधुन गाकर सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए प्रार्थना की गई।
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आईएमए की जिला इकाई के अध्यक्ष डॉ. अजय अस्थाना ने बताया कि देश के चिकित्सक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। डर के वातावरण में मरीजों को चिकित्सा सुविधा देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोलकाता के एनआरएस अस्पताल में चिकित्सकों के साथ हुई मारपीट और वहां की मुख्यमंत्री द्वारा चिकित्सकों को धमकी देना दुर्भाग्यपूर्ण है। मांग की गई कि चिकित्सा कर्मियों और अस्पतालों को सुरक्षा देनी चाहिए। आठ सूत्री मांगपत्र भी नगर मजिस्ट्रेेट को सौंपा गया। हड़ताल के कारण अधिकांश नर्सिंगहोम और प्राइवेट चिकित्सकों के क्लीनिक बंद रहे। रानी साहिबा कटियारी अस्पताल, कटियार नर्सिंग होम, बालाजी हास्पिटल, हड्डी अस्पताल आदि प्रमुख अस्पतालों के गेट बंद रहे। हालांकि आकस्मिक सेवाओं को जारी रखा गया और गंभीर मरीजों को उपचार भी मिल गया। प्रदर्शन के दौरान संरक्षक डॉ. जेके वर्मा, डॉ. आनंद कुमार गुप्ता, सचिव डॉ. रविंद्र कुमार, कोषाध्यक्ष डॉ. अखिलेश पटेल, डॉ. अरुण मौर्या, डॉ. मनीष रस्तोगी, डॉ. आरपी गुप्ता, डॉ. मनोज कटियार, डॉ. एसके सिंह आदि मौजूद रहे।
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सरकारी अस्पताल में चार घंटे में बने 1000 पर्चे
आमतौर पर जिला चिकित्सालय में एक दिन में 500 से 600 तक पर्चे बनते हैं। सोमवार को नर्सिंगहोम और क्लीनिक बंद रहने के कारण सुबह आठ बजे से 12 बजे के बीच जिला अस्पताल में एक हजार मरीजों के पर्चे बने। इनमें से बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे, जो प्राइवेट चिकित्सक के पास उपचार के लिए आए थे, लेकिन हड़ताल होने के कारण राहत की उम्मीद में जिला अस्पताल का रुख किया। जिला चिकित्सालय में दोपहर 12 बजे तक ओपीडी जारी रही, लेकिन इसी बीच वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक प्रियदर्शी की मां का आकस्मिक निधन होने की जानकारी मिली। डॉ. अशोक प्रियदर्शी की तैनाती जिला चिकित्सालय में ही है। ऐसे में 12 बजे से चिकित्सकों ने शोक प्रस्ताव पारित कर कंडोलेंस कर दी। पर्चा बनवाने के बावजूद लाइन में लगे मरीजों को इलाज नहीं मिल पाया।
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पीएमएस के चुनाव से भी हुई समस्या
पूरे जिले में प्राइवेट चिकित्सकों के हड़ताल पर होने के कारण सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी मरीज पहुंचे, लेकिन अधिकांश स्थानों पर निराशा हाथ लगी। दरअसल सोमवार को ही प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ की जनपदीय इकाई का चुनाव भी था। मतदान प्रक्रिया में शामिल होने के लिए जिले भर के सरकारी चिकित्सक जिला महिला चिकित्सालय परिसर में ही मौजूद रहे। इसके कारण भी मरीजों को परेशानी हुई।