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करें योग और रहे निरोग
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 21 Jun 2015 12:14 AM IST
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून को पूरा का पूरा
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जिला योग व ध्यान में लीन दिखेगा। जिले भर में कई संस्थाओं द्वारा
कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारियां पूरी हो गई है। देर रात तक जागने वाले
इस शहर में भोर होते ही बेहद अनुशासन एवं नियम के साथ बुजुर्गों के साथ
युवाओं एवं महिलाओं के कदम शहीद उद्यान की ओर बढ़ने लगेंगे।
वैसे शहीद उद्यान में सुबह के वक्त रोजाना कोई सामूहिक रूप से तो कोई अकेले ही शांत मन के साथ योग का क्रम शुरू कर देते हैं। शहीद उद्यान में शनिवार सुबह 6 बजे भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। उधर, अनुभूति के तत्वावधान में आर्य कन्या इंटर कालेज में शनिवार को आयोजित योग दर्शन का समग्र रूप गोष्ठी में संस्था अध्यक्ष डा. ईश्वर चंद्र वर्मा ने कहा कि योग भारतीय दर्शन की अति प्राचीन विधा है।
उन्होंने कहा कि पिछले दिनों अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग को जो मान्यता मिली, उससे भारतीय अध्यात्म, योग एवं दर्शन के महत्व को विश्व ने आखिरकार एक बार दोबारा स्वीकार कर ही लिया। प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक गौरव की पुनर्स्थापना से संपूर्ण भारतीय जनमानस प्रफुल्लित है।
योग एक संपूर्ण दर्शन है और उसका उसी रूप में अनुशीलन कल्याण प्रद है। डा. शिवशरण सिंह चौहान ने कहा कि योग न तो सिर्फ शारीरिक व्यायाम ही है और न मात्र चिकित्सा पद्धति। अपितु योग तो एक संपूर्ण दर्शन है, जो शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता हुआ मानव जीवन के चरम लक्ष्य की प्राप्ति कराता है।
डा. ब्रह्म स्वरूप पांडे ने कहा कि कई रोगों में परम उपयोगी एवं कई शारीरिक उपलब्धि प्रदाता होने पर भी हठ योग के तहत बहुत से आसन गृहस्थ जीवन का पालन कर रहे सामान्य जनों के लिए हितकर नहीं हैं वे कष्टसाध्य भी हैं और कई शारीरिक मानसिक विकृतियों को जन्म भी दे सकते हैं।
आचार्य सत्यवीर आर्य ने कहा कि आज की आपाधापी से भरी जीवन शैली के कारण व्यक्ति का मन व शरीर दोनों ही अत्यधिक तनाव ग्रस्त हो चुका है। योगासन एवं प्राणायाम के चमत्कारिक प्रभावों को मान चुका है और इससे डिप्रेशन, तनाव आदि रोगों को दूर करने में मदद मिलती है।
गोष्ठी का संचालन सुशील वर्मा ने किया। संस्था उपाध्यक्ष भजन लाल गुप्ता ने सभी को पातंजल योग दर्शन की पुस्तकें वितरित की। इस मौके पर प्रोफेसर अखिलेश बाजपेई, वेदव्रत मिश्र, हरिवंश सिंह, सुमत प्रसाद जैन, डा. सुरेश अग्निहोत्री, राजीव मोहन, रामरूप त्रिवेदी, रामनरेश बाजपेई, डा. एसएस द्विवेदी, राजेंद्र सिंह, राजेंद्र कुमार सिंह, निशानाथ अवस्थी, वेद प्रकाश अवस्थी, सतीश चंद्र शुक्ल आदि मौजूद थे।
वैसे शहीद उद्यान में सुबह के वक्त रोजाना कोई सामूहिक रूप से तो कोई अकेले ही शांत मन के साथ योग का क्रम शुरू कर देते हैं। शहीद उद्यान में शनिवार सुबह 6 बजे भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। उधर, अनुभूति के तत्वावधान में आर्य कन्या इंटर कालेज में शनिवार को आयोजित योग दर्शन का समग्र रूप गोष्ठी में संस्था अध्यक्ष डा. ईश्वर चंद्र वर्मा ने कहा कि योग भारतीय दर्शन की अति प्राचीन विधा है।
उन्होंने कहा कि पिछले दिनों अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग को जो मान्यता मिली, उससे भारतीय अध्यात्म, योग एवं दर्शन के महत्व को विश्व ने आखिरकार एक बार दोबारा स्वीकार कर ही लिया। प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक गौरव की पुनर्स्थापना से संपूर्ण भारतीय जनमानस प्रफुल्लित है।
योग एक संपूर्ण दर्शन है और उसका उसी रूप में अनुशीलन कल्याण प्रद है। डा. शिवशरण सिंह चौहान ने कहा कि योग न तो सिर्फ शारीरिक व्यायाम ही है और न मात्र चिकित्सा पद्धति। अपितु योग तो एक संपूर्ण दर्शन है, जो शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता हुआ मानव जीवन के चरम लक्ष्य की प्राप्ति कराता है।
डा. ब्रह्म स्वरूप पांडे ने कहा कि कई रोगों में परम उपयोगी एवं कई शारीरिक उपलब्धि प्रदाता होने पर भी हठ योग के तहत बहुत से आसन गृहस्थ जीवन का पालन कर रहे सामान्य जनों के लिए हितकर नहीं हैं वे कष्टसाध्य भी हैं और कई शारीरिक मानसिक विकृतियों को जन्म भी दे सकते हैं।
आचार्य सत्यवीर आर्य ने कहा कि आज की आपाधापी से भरी जीवन शैली के कारण व्यक्ति का मन व शरीर दोनों ही अत्यधिक तनाव ग्रस्त हो चुका है। योगासन एवं प्राणायाम के चमत्कारिक प्रभावों को मान चुका है और इससे डिप्रेशन, तनाव आदि रोगों को दूर करने में मदद मिलती है।
गोष्ठी का संचालन सुशील वर्मा ने किया। संस्था उपाध्यक्ष भजन लाल गुप्ता ने सभी को पातंजल योग दर्शन की पुस्तकें वितरित की। इस मौके पर प्रोफेसर अखिलेश बाजपेई, वेदव्रत मिश्र, हरिवंश सिंह, सुमत प्रसाद जैन, डा. सुरेश अग्निहोत्री, राजीव मोहन, रामरूप त्रिवेदी, रामनरेश बाजपेई, डा. एसएस द्विवेदी, राजेंद्र सिंह, राजेंद्र कुमार सिंह, निशानाथ अवस्थी, वेद प्रकाश अवस्थी, सतीश चंद्र शुक्ल आदि मौजूद थे।