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दिवाली पर आज हर सख्श होगा मगन, रोशन होगा घर-आंगन
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-सिनेमा रोड पर गणेश लक्ष्मी की मूर्तियां देखतीं युवतियां। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। दिवाली आज है। तुला राशि में चार ग्रहों के आ जाने से चतुर्ग्रह योग बन रहा है। तुला राशि में सूर्य, बुध, मंगल व चंद्रमा मौजूद रहेंगे। ऐसे में पूजा शुभ फलदायी होगी। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम छह बजकर 10 मिनट से रात आठ बजकर छह मिनट तक है।
ज्योतिषाचार्य सुनील शास्त्री का कहना है कि लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त शाम पांच 35 मिनट से रात आठ बजकर 10 बजे तक है। इसी तरह लक्ष्मी पूजा निशिता काल मुहूर्त रात 11 बजकर 38 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक है। अमावस्या तिथि चार नवंबर को सुबह छह बजकर तीन मिनट से प्रारंभ होगी और पांच नवंबर को सुबह दो बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी।
दिवाली के एक दिन पूर्व बुधवार को लोगों ने खील, खिलौने, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, बर्तन और कपड़े खरीदे। देर शाम पूरा शहर रोशनी से नहाया नजर आया।
मां लक्ष्मी की ऐसे करें आराधना
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि पूजन में स्वास्तिक का महत्व है। अनुष्ठान के पूर्व दीवार पर इस चिह्न को बनाया जाता है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व व पश्चिम चारों तरफ इसका प्रयोग किया जा सकता है। केसर, हल्दी या सिंदूर से इसको पूजन पाठ की जगह पर तैयार किया जाता है। दीपों के पर्व पर कौड़ी की भी अहम भूमिका है। शास्त्री सनत मिश्रा ने बताया कि पूजन की थाली में कौड़ी रखने की परंपरा है। कौड़ी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन लाभ होता है। रोली या बंदन से किया गया तिलक ज्ञान प्रखर करता है। पान व चावल का भी सामग्री का विशेष महत्व है।
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शंख पूजन से पूरी होती मनोकामना
शास्त्री सनत मिश्रा ने बताया कि दिवाली पर शंख का पूजन करने के बाद यदि मंत्रों का विधिवत जाप किया जाए तो मनोकामना पूर्ण हो सकती है।
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ज्योतिषाचार्य सुनील शास्त्री का कहना है कि लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त शाम पांच 35 मिनट से रात आठ बजकर 10 बजे तक है। इसी तरह लक्ष्मी पूजा निशिता काल मुहूर्त रात 11 बजकर 38 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक है। अमावस्या तिथि चार नवंबर को सुबह छह बजकर तीन मिनट से प्रारंभ होगी और पांच नवंबर को सुबह दो बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी।
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दिवाली के एक दिन पूर्व बुधवार को लोगों ने खील, खिलौने, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, बर्तन और कपड़े खरीदे। देर शाम पूरा शहर रोशनी से नहाया नजर आया।
मां लक्ष्मी की ऐसे करें आराधना
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि पूजन में स्वास्तिक का महत्व है। अनुष्ठान के पूर्व दीवार पर इस चिह्न को बनाया जाता है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व व पश्चिम चारों तरफ इसका प्रयोग किया जा सकता है। केसर, हल्दी या सिंदूर से इसको पूजन पाठ की जगह पर तैयार किया जाता है। दीपों के पर्व पर कौड़ी की भी अहम भूमिका है। शास्त्री सनत मिश्रा ने बताया कि पूजन की थाली में कौड़ी रखने की परंपरा है। कौड़ी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन लाभ होता है। रोली या बंदन से किया गया तिलक ज्ञान प्रखर करता है। पान व चावल का भी सामग्री का विशेष महत्व है।
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शंख पूजन से पूरी होती मनोकामना
शास्त्री सनत मिश्रा ने बताया कि दिवाली पर शंख का पूजन करने के बाद यदि मंत्रों का विधिवत जाप किया जाए तो मनोकामना पूर्ण हो सकती है।