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लोक अदालत में 24 वादों का निस्तारण
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हरदोई। राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण किया गया। मुकदमों में न कोई हारा और न जीता और न्यायाधीशों ने 26 से 24 वादों का निराकरण कर दिया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश महेंद्र प्रसाद चौधरी की अदालत में शनिवार को 26 मामले सुलह-समझौते के लिए आए। इसमें से 24 का निराकरण किया गया।
इसमें 14 मामलों में पक्षकार साथ-साथ जीवन व्यतीत करने के लिए सहमत हो गए। प्रथम अपर प्रधान न्यायाधीश संगीता कुमारी की अदालत में 32 मामले में 19 निस्तारित हुए।
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परामर्शदाता राहुल मिश्रा, रेनू सिंह व अमित बाजपेई लोक अदालत में मौजूद रहे। प्रिलिटीगेशन से जुड़े छह मामलों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार पर किया गया।
गहनों का स्वामित्व बना विवाद वजह
लोक अदालत में आए एक प्रकरण में विवाह के बाद विवाहिता पहली बार ससुराल आई तो उसने कुछ गहने मायके में छोड़ दिए। यह बात ससुराल वालों को पता चली तो उनके मन में संदेह पैदा हो गया।
इसके बाद कुछ अन्य बातों को लेकर पति-पत्नी के परिजनों में विवाद बढ़ गया और मामला मुकदमे तक पहुंचा गया। अदालत के प्रकरण की सुनवाई के दौरान कहा कि विवाह के दौरान उपहार में दिए गए जेवर वधू के होते हैं।
उसकी स्वामी वधू होती है। वह अपनी इच्छा अनुसार उन्हें कहीं भी रख सकती है। यह बात वैवाहिक संबंध में विवाद की वजह नहीं हो सकती है। परामर्श के दौरान दोनों के मतभेद दूर किए गए। इसके बाद पति-पत्नी का घर बिखरते से बच गया और दोनों अपने घर चले गए।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश महेंद्र प्रसाद चौधरी की अदालत में शनिवार को 26 मामले सुलह-समझौते के लिए आए। इसमें से 24 का निराकरण किया गया।
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इसमें 14 मामलों में पक्षकार साथ-साथ जीवन व्यतीत करने के लिए सहमत हो गए। प्रथम अपर प्रधान न्यायाधीश संगीता कुमारी की अदालत में 32 मामले में 19 निस्तारित हुए।
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परामर्शदाता राहुल मिश्रा, रेनू सिंह व अमित बाजपेई लोक अदालत में मौजूद रहे। प्रिलिटीगेशन से जुड़े छह मामलों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार पर किया गया।
गहनों का स्वामित्व बना विवाद वजह
लोक अदालत में आए एक प्रकरण में विवाह के बाद विवाहिता पहली बार ससुराल आई तो उसने कुछ गहने मायके में छोड़ दिए। यह बात ससुराल वालों को पता चली तो उनके मन में संदेह पैदा हो गया।
इसके बाद कुछ अन्य बातों को लेकर पति-पत्नी के परिजनों में विवाद बढ़ गया और मामला मुकदमे तक पहुंचा गया। अदालत के प्रकरण की सुनवाई के दौरान कहा कि विवाह के दौरान उपहार में दिए गए जेवर वधू के होते हैं।
उसकी स्वामी वधू होती है। वह अपनी इच्छा अनुसार उन्हें कहीं भी रख सकती है। यह बात वैवाहिक संबंध में विवाद की वजह नहीं हो सकती है। परामर्श के दौरान दोनों के मतभेद दूर किए गए। इसके बाद पति-पत्नी का घर बिखरते से बच गया और दोनों अपने घर चले गए।