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Hardoi News: डिजिटल एक्सरे मशीन की 13 दिन बाद भी नहीं सुधर पाई सेहत
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फोटो- 10- कृष्णा। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की डिजिटल एक्सरे मशीन को खराब हुए 13 दिन बीत गए हैं। अभी तक मशीन की मरम्मत न होने से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। मुख्य मशीन खराब होने से मरीजों का एक्सरे पोर्टेबल मशीन से किया जा रहा है। इसकी क्षमता सीमित होने की वजह से मरीजों को जांच कराने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। उमस भरी गर्मी में घंटों परेशान होने के बाद तमाम मरीजों को बिना जांच के ही लौटना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज एक्सरे कराने के लिए पहुंचते हैं। इनमें हड्डी रोग से संबंधित मरीजों के अलावा दुर्घटनाओं में शिकार मरीज भी आते हैं। मरीजों का एक्सरे डिजिटल एक्सरे मशीन से किया जाता है लेकिन करीब 13 दिन पहले मुख्य मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड खराब हो गया था। इस वजह से डिजिटल एक्सरे मशीन को विद्युत की सप्लाई कंट्रोल नहीं हो रही थी। ड्रैग कंट्रोल बोर्ड लगाया गया लेकिन अभी समस्या दूर नहीं हुई। ऐसे में मरीजों के एक्सरे पोर्टेबल मशीन से हो रहे हैं।
इस मशीन की क्षमता सीमित होने से एक बार में सिर्फ 65 से 70 एक्सरे हो रहे हैं जबकि रोजाना 200 से 250 मरीज एक्सरे कराने आते हैं। कई मरीजों के दो एक्सरे भी होते हैं। ऐसे में मशीन से रोजाना 300 से 350 एक्सरे होते हैं। मशीन लंबे समय तक काम नहीं कर पाती है इसलिए उसे बंद करना पड़ता है।
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एक्सरे कराने में ही बीत रहा पूरा दिन
फैजुल्लापुर से आए कृष्णा ने बताया कि वह अपना एक्सरे कराने सुबह 10 बजे आ गए हैं। डॉक्टर को दिखाने के बाद पर्चा जमा कर दिया है और लाइन में लगे हैं लेकिन 12 बज गए हैं, नंबर नहीं आया। गर्मी अधिक है इसलिए खड़े रहने में भी दिक्कत हो रही है।
बेनीगंज से आईं निधि ने बताया कि हाथ का एक्सरे कराना है। करीब पौने 10 बजे से पर्चा जमा है, 75वां नंबर है। अभी तक एक्सरे नहीं हुआ है। जांच कराने के लिए अभी कितनी देर और बैठना पड़ेगा पता नहीं।
अब मशीन का सॉफ्टवेयर कर रहा दिक्कत
डिजिटल एक्सरे मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड तो फिट किया जा चुका है लेकिन अब मशीन के सॉफ्टवेयर में कुछ समस्या आ गई है। इस वजह से मशीन में बिजली आपूर्ति को कंट्रोल नहीं किया जा पा रहा है। इस वजह से मशीन बंद है। हालांकि कार्यदायी संस्था सायरिक्स के अभियंता को मरम्मत करने के लिए जानकारी दी जा चुकी है।
मोबाइल पर मिलती रिपोर्ट
डिजिटल एक्सरे मशीन बंद होने से अब पोर्टेबल मशीन से एक्सरे होते हैं। इसमें जांच कराने पर एक्सरे रिपोर्ट का प्रिंट भी नहीं मिलता और मरीजों को जांच रिपोर्ट की फोटो अपने मोबाइल से लेनी पड़ती है। मोबाइल पर फोटो लेने के बाद डॉक्टर को दिखाना पड़ता है।
डिजिटल मशीन की मरम्मत होने के बाद अब भी कुछ कमी रह गई है। कार्यदायी संस्था को सूचित किया जा चुका है। कर्मियों को जल्द मशीन की मरम्मत कर सुचारू कराने के निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मेडिकल कॉलेज में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज एक्सरे कराने के लिए पहुंचते हैं। इनमें हड्डी रोग से संबंधित मरीजों के अलावा दुर्घटनाओं में शिकार मरीज भी आते हैं। मरीजों का एक्सरे डिजिटल एक्सरे मशीन से किया जाता है लेकिन करीब 13 दिन पहले मुख्य मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड खराब हो गया था। इस वजह से डिजिटल एक्सरे मशीन को विद्युत की सप्लाई कंट्रोल नहीं हो रही थी। ड्रैग कंट्रोल बोर्ड लगाया गया लेकिन अभी समस्या दूर नहीं हुई। ऐसे में मरीजों के एक्सरे पोर्टेबल मशीन से हो रहे हैं।
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इस मशीन की क्षमता सीमित होने से एक बार में सिर्फ 65 से 70 एक्सरे हो रहे हैं जबकि रोजाना 200 से 250 मरीज एक्सरे कराने आते हैं। कई मरीजों के दो एक्सरे भी होते हैं। ऐसे में मशीन से रोजाना 300 से 350 एक्सरे होते हैं। मशीन लंबे समय तक काम नहीं कर पाती है इसलिए उसे बंद करना पड़ता है।
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एक्सरे कराने में ही बीत रहा पूरा दिन
फैजुल्लापुर से आए कृष्णा ने बताया कि वह अपना एक्सरे कराने सुबह 10 बजे आ गए हैं। डॉक्टर को दिखाने के बाद पर्चा जमा कर दिया है और लाइन में लगे हैं लेकिन 12 बज गए हैं, नंबर नहीं आया। गर्मी अधिक है इसलिए खड़े रहने में भी दिक्कत हो रही है।
बेनीगंज से आईं निधि ने बताया कि हाथ का एक्सरे कराना है। करीब पौने 10 बजे से पर्चा जमा है, 75वां नंबर है। अभी तक एक्सरे नहीं हुआ है। जांच कराने के लिए अभी कितनी देर और बैठना पड़ेगा पता नहीं।
अब मशीन का सॉफ्टवेयर कर रहा दिक्कत
डिजिटल एक्सरे मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड तो फिट किया जा चुका है लेकिन अब मशीन के सॉफ्टवेयर में कुछ समस्या आ गई है। इस वजह से मशीन में बिजली आपूर्ति को कंट्रोल नहीं किया जा पा रहा है। इस वजह से मशीन बंद है। हालांकि कार्यदायी संस्था सायरिक्स के अभियंता को मरम्मत करने के लिए जानकारी दी जा चुकी है।
मोबाइल पर मिलती रिपोर्ट
डिजिटल एक्सरे मशीन बंद होने से अब पोर्टेबल मशीन से एक्सरे होते हैं। इसमें जांच कराने पर एक्सरे रिपोर्ट का प्रिंट भी नहीं मिलता और मरीजों को जांच रिपोर्ट की फोटो अपने मोबाइल से लेनी पड़ती है। मोबाइल पर फोटो लेने के बाद डॉक्टर को दिखाना पड़ता है।
डिजिटल मशीन की मरम्मत होने के बाद अब भी कुछ कमी रह गई है। कार्यदायी संस्था को सूचित किया जा चुका है। कर्मियों को जल्द मशीन की मरम्मत कर सुचारू कराने के निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो- 10- कृष्णा। संवाद

फोटो- 10- कृष्णा। संवाद

फोटो- 10- कृष्णा। संवाद