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Hardoi News: सात बार प्रस्ताव भेजने के बाद भी डायलिसिस सेंटर में नहीं बढ़े बेड
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फोटो-06- मेडिकल कॉलेज में स्थित डायलिसिस सेंटर। संवाद
हरदोई। मेडिकल काॅलेज में पीपीपी मॉडल पर विकसित डायलिसिस सेंटर अब मरीजों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। 10 बेडों से तीन साल पहले शुरू हुए सेंटर का अभी तक विस्तार नहीं हुआ। बेड बढ़ाने के लिए शासन को सात बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। कम बेडों के कारण सेंटर पर मरीजों की प्रतीक्षा सूची 100 के ऊपर बनी रहती है। जरुरतमंद मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए दूसरे जिलों में जाना मजबूरी है।
वर्ष 2022 के बाद जनपद में 10 बेडों के साथ डायलिसिस की सुविधा शुरू हुई। इससे किडनी के मरीजों को काफी राहत मिली। पंजीकृत मरीजों की क्रमवार डायलिसिस की जाती है। यूनिट में बेड सीमित हैं ऐसे में एक दिन में 28 से 30 मरीजों की डायलिसिस हो पाती है। चूंकि, किडनी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं इससे तमाम मरीजों की मेडिकल कॉलेज स्थित यूनिट में डायलिसिस हो नहीं पाती है। वहीं, पंजीकृत मरीजों को भी दोबारा डायलिसिस कराने में इंतजार करना पड़ता है। मौजूदा समय में 119 मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं। वैसे यूनिट प्रबंधन की तरफ से बेड बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन बेड बढ़ाने की अनुमति अभी नहीं मिली। यह हाल तब है जब मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की तरफ से संसाधन बढ़ाने का दावा लगातार किया जाता है।
केस-1- शहर के मोहल्ला वैटगंज निवासी आकाश गुप्ता को भी डायलिसिस कराने के लिए भाग-दौड़ करनी पड़ी। करीब दो माह पहले से पंजीकरण कराने के बाद उनका अब डायलिसिस कराने का नंबर लगा। इस बीच उन्हें कई बार लखनऊ जाकर डायलिसिस करानी पड़ी।
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केस-2- टड़ियावां के थमरवां निवासी महेंद्र प्रसाद को भी किडनी की समस्या है। डायलिसिस कराने के लिए कई बार सेंटर आ चुके हैं। यहां प्रतीक्षा सूची लंबी होने के कारण डायलिसिस नहीं हो पा रही है। उन्हें लखनऊ और कन्नौज जाकर डायलिसिस करानी पड़ रही है।
सात बार भेजा गया रिमाइंडर
डायलिसिस सेंटर के प्रभारी युवराज वर्मा बताते हैं कि गंभीर मरीज को सप्ताह में कम से कम दो बार डायलिसिस की आवश्यकता होती है लेकिन वर्तमान में संसाधनों की कमी ऐसी है कि मरीजों को उनके निर्धारित दिन से तीन से चार दिन की देरी से डायलिसिस मिल पा रही है। अब तक सात बार लिखित प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। अंतिम प्रस्ताव दिसंबर में ही भेजा गया लेकिन अभी अनुमति नहीं आई।
डायलिसिस सेंटर पर बेडों को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। बजट मिलते ही यूनिट पर बेड बढ़ा दिए जाएंगे। इसके लिए प्रयास भी कर रहे हैं।
-डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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वर्ष 2022 के बाद जनपद में 10 बेडों के साथ डायलिसिस की सुविधा शुरू हुई। इससे किडनी के मरीजों को काफी राहत मिली। पंजीकृत मरीजों की क्रमवार डायलिसिस की जाती है। यूनिट में बेड सीमित हैं ऐसे में एक दिन में 28 से 30 मरीजों की डायलिसिस हो पाती है। चूंकि, किडनी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं इससे तमाम मरीजों की मेडिकल कॉलेज स्थित यूनिट में डायलिसिस हो नहीं पाती है। वहीं, पंजीकृत मरीजों को भी दोबारा डायलिसिस कराने में इंतजार करना पड़ता है। मौजूदा समय में 119 मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं। वैसे यूनिट प्रबंधन की तरफ से बेड बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन बेड बढ़ाने की अनुमति अभी नहीं मिली। यह हाल तब है जब मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की तरफ से संसाधन बढ़ाने का दावा लगातार किया जाता है।
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केस-1- शहर के मोहल्ला वैटगंज निवासी आकाश गुप्ता को भी डायलिसिस कराने के लिए भाग-दौड़ करनी पड़ी। करीब दो माह पहले से पंजीकरण कराने के बाद उनका अब डायलिसिस कराने का नंबर लगा। इस बीच उन्हें कई बार लखनऊ जाकर डायलिसिस करानी पड़ी।
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केस-2- टड़ियावां के थमरवां निवासी महेंद्र प्रसाद को भी किडनी की समस्या है। डायलिसिस कराने के लिए कई बार सेंटर आ चुके हैं। यहां प्रतीक्षा सूची लंबी होने के कारण डायलिसिस नहीं हो पा रही है। उन्हें लखनऊ और कन्नौज जाकर डायलिसिस करानी पड़ रही है।
सात बार भेजा गया रिमाइंडर
डायलिसिस सेंटर के प्रभारी युवराज वर्मा बताते हैं कि गंभीर मरीज को सप्ताह में कम से कम दो बार डायलिसिस की आवश्यकता होती है लेकिन वर्तमान में संसाधनों की कमी ऐसी है कि मरीजों को उनके निर्धारित दिन से तीन से चार दिन की देरी से डायलिसिस मिल पा रही है। अब तक सात बार लिखित प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। अंतिम प्रस्ताव दिसंबर में ही भेजा गया लेकिन अभी अनुमति नहीं आई।
डायलिसिस सेंटर पर बेडों को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। बजट मिलते ही यूनिट पर बेड बढ़ा दिए जाएंगे। इसके लिए प्रयास भी कर रहे हैं।
-डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज