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Hardoi News: दांत के इलाज के लिए सिर्फ दर्द की दवा, डॉक्टर हैं उपकरण नहीं
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फोटो- 17- सीएचसी पर ओपीडी में मौजूद दंत चिकित्सक डॉ. आकांक्षा। संवाद
हरियावां। ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर उपचार के दावे कागजों तक ही सीमित हैं। आलम यह है कि दांत में दर्द लेकर आने वाले मरीजों को सिर्फ दर्द बंद करने की दवा दे दी जाती है। यह हाल तब है जब दंत चिकित्सक की तैनाती भी सीएचसी में है। परेशानी यह है कि यहां उपचार करने के लिए दंत चिकित्सक के पास कोई उपकरण ही नहीं है। ऐसे में दंत रोगियों को 16 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।
हरियावां सीएचसी पर दंत उपचार के लिए डॉक्टर आकांक्षा तैनात हैं। वह ओपीडी में रोज मरीजों का इंतजार करती हैं लेकिन दर्द की शिकायत लेकर इक्का-दुक्का मरीज आते हैं। वजह है कि मरीजों का बेहतर उपचार नहीं हो पाता। जिला मुख्यालय से दंत उपचार के लिए डेंटल चेयर तो भेजी गई लेकिन उपचार में प्रयोग होने वाले उपकरण दिए ही नहीं गए अगर किसी मरीज के दांत में कीड़ा लगा है या फिर रूट कैनाल करना हो तो डॉक्टर असहाय हैं। अब तो रखरखाव के अभाव में डेंटल चेयर भी बदहाली की कगार पर पहुंच गई है। सीएचसी पर उपचार न मिलने से मरीजों को हरियावां से 16 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज आने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे जेब पर भी आर्थिक बोझ बढ़ता है।
तीन दर्जन गांवों की 50 हजार आबादी परेशान
दांत का इलाज काफी महंगा है। निजी क्लीनिक पर इलाज में अकेले एक दांत का रूट कैनाल कराने पर आठ से 10 हजार रुपये तक खर्च आता है। जबकि सीएचसी हरियावां से मदरावा, मुरवा, हिंगुआपुर, भेदउरा, मरई, कुरसेली, सधिनावां, गदाईपुर, अकबरपुर, लोहकनपुर, उतरा, अहमदी, कपूरपुर, शाहपुर, कासियापुर, देवरिया समेत तीन दर्जन से अधिक गांवों की लगभग 50 हजार से अधिक आबादी जुड़ी है। इन गांवों से आने वाले दंत रोगियों को सिर्फ दर्द की दवा देकर लौटा दिया जाता है।
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मरीजों ने बयां किया दर्द
-हरियावां निवासी अमित ने बताया कि दांत में दर्द होने पर जब भी अस्पताल आओ, सिर्फ एक टैबलेट थमा दी जाती है। डॉक्टर से दांत की सफाई या स्थायी इलाज की बात कही जाती है तो वह भी उपकरणों की बेबसी जता देते हैं।
-शर्माखेड़ा निवासी वीरपाल ने बताया कि पिछले दिनों दांत में असहनीय दर्द होने पर सीएचसी पहुंचे तो उन्हें दवा लिखकर मेडिकल कॉलेज जाने के लिए कह गया। मजबूरन 16 किलोमीटर दूर हरदोई अस्पताल जाना पड़ा।
-लौकनपुरवा के सुधांशु शर्मा ने कहा कि सीएचसी पर दांत के दर्द का उपचार सिर्फ दिखावा है। गोली के अलावा अन्य उपचार के लिए हरदोई जाना मजबूरी है।
उपकरणों के अभाव में मरीजों का दांत निकालना, फिलिंग या स्केलिंग नहीं हो पा रही है। प्रतिदिन ओपीडी में छह से आठ मरीज समस्या लेकर आते हैं जिन्हें सिर्फ दवाइयां देना मजबूरी है। -डॉ. आकांक्षा
-डेंटल चेयर को सुधरवाने और उपकरणों के लिए मांग उच्च अधिकारियों को पहले ही भेजी जा चुकी है, वहां से भी सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। अनुमोदन की स्वीकृत मिलते ही व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी। -डॉ. अंकुर कुमार, सीएचसी अधीक्षक
-उपकरण खरीद की प्रक्रिया चल रही है, बजट आने पर ही खरीद कर सीएचसी पर भेजे जाएंगे। -डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमओ
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हरियावां सीएचसी पर दंत उपचार के लिए डॉक्टर आकांक्षा तैनात हैं। वह ओपीडी में रोज मरीजों का इंतजार करती हैं लेकिन दर्द की शिकायत लेकर इक्का-दुक्का मरीज आते हैं। वजह है कि मरीजों का बेहतर उपचार नहीं हो पाता। जिला मुख्यालय से दंत उपचार के लिए डेंटल चेयर तो भेजी गई लेकिन उपचार में प्रयोग होने वाले उपकरण दिए ही नहीं गए अगर किसी मरीज के दांत में कीड़ा लगा है या फिर रूट कैनाल करना हो तो डॉक्टर असहाय हैं। अब तो रखरखाव के अभाव में डेंटल चेयर भी बदहाली की कगार पर पहुंच गई है। सीएचसी पर उपचार न मिलने से मरीजों को हरियावां से 16 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज आने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे जेब पर भी आर्थिक बोझ बढ़ता है।
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तीन दर्जन गांवों की 50 हजार आबादी परेशान
दांत का इलाज काफी महंगा है। निजी क्लीनिक पर इलाज में अकेले एक दांत का रूट कैनाल कराने पर आठ से 10 हजार रुपये तक खर्च आता है। जबकि सीएचसी हरियावां से मदरावा, मुरवा, हिंगुआपुर, भेदउरा, मरई, कुरसेली, सधिनावां, गदाईपुर, अकबरपुर, लोहकनपुर, उतरा, अहमदी, कपूरपुर, शाहपुर, कासियापुर, देवरिया समेत तीन दर्जन से अधिक गांवों की लगभग 50 हजार से अधिक आबादी जुड़ी है। इन गांवों से आने वाले दंत रोगियों को सिर्फ दर्द की दवा देकर लौटा दिया जाता है।
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मरीजों ने बयां किया दर्द
-हरियावां निवासी अमित ने बताया कि दांत में दर्द होने पर जब भी अस्पताल आओ, सिर्फ एक टैबलेट थमा दी जाती है। डॉक्टर से दांत की सफाई या स्थायी इलाज की बात कही जाती है तो वह भी उपकरणों की बेबसी जता देते हैं।
-शर्माखेड़ा निवासी वीरपाल ने बताया कि पिछले दिनों दांत में असहनीय दर्द होने पर सीएचसी पहुंचे तो उन्हें दवा लिखकर मेडिकल कॉलेज जाने के लिए कह गया। मजबूरन 16 किलोमीटर दूर हरदोई अस्पताल जाना पड़ा।
-लौकनपुरवा के सुधांशु शर्मा ने कहा कि सीएचसी पर दांत के दर्द का उपचार सिर्फ दिखावा है। गोली के अलावा अन्य उपचार के लिए हरदोई जाना मजबूरी है।
उपकरणों के अभाव में मरीजों का दांत निकालना, फिलिंग या स्केलिंग नहीं हो पा रही है। प्रतिदिन ओपीडी में छह से आठ मरीज समस्या लेकर आते हैं जिन्हें सिर्फ दवाइयां देना मजबूरी है। -डॉ. आकांक्षा
-डेंटल चेयर को सुधरवाने और उपकरणों के लिए मांग उच्च अधिकारियों को पहले ही भेजी जा चुकी है, वहां से भी सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। अनुमोदन की स्वीकृत मिलते ही व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी। -डॉ. अंकुर कुमार, सीएचसी अधीक्षक
-उपकरण खरीद की प्रक्रिया चल रही है, बजट आने पर ही खरीद कर सीएचसी पर भेजे जाएंगे। -डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमओ

फोटो- 17- सीएचसी पर ओपीडी में मौजूद दंत चिकित्सक डॉ. आकांक्षा। संवाद

फोटो- 17- सीएचसी पर ओपीडी में मौजूद दंत चिकित्सक डॉ. आकांक्षा। संवाद

फोटो- 17- सीएचसी पर ओपीडी में मौजूद दंत चिकित्सक डॉ. आकांक्षा। संवाद