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एप से तैयार किया जाएगा मार्ग दुर्घटनाओं का डाटाबेस, आईआईटी मद्रास में होगा अध्ययन
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हरदोई। आए दिन हो रहे सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने नई कवायद शुरू की है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एनआईसी के साथ मिलकर एकीकृत सड़क सुरक्षा डाटाबेस तैयार करने के लिए एप विकसित किया है।
15 मार्च से लांच हो रहे इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटा बेस (आई रैड) एप पर जिले में होने वाली दुर्घटनाओं का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। इसका अध्ययन आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ करेंगे। इसी आधार पर हादसों पर रोक लगाने की योजना तैयार की जाएगी। एप में कार्य कैसे करना है, इसका ड्राईरन भी शहर में किया जा चुका है।
विकसित किए गए आई रैड एप को फिलहाल पुलिस विभाग, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के साथ साथ लोक निर्माण विभाग के लोगों को इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। 15 मार्च से लांच हो रहे इस एप के लिए परिवहन विभाग और पुलिस विभाग के कर्मचारियों को जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अमित मिश्रा के निर्देशन में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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शहर कोतवाली क्षेत्र में कोतवाली के निकट ही सांडी रोड पर इस एप का ड्राईरन भी हुआ। इस दौरान जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अमित मिश्रा के अलावा यातायात निरीक्षक विनोद कुमार यादव, शहर कोतवाल जगदीश यादव और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी मौजूद रहे।
ऐसे काम करेगा एप
दुर्घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचने वाले पुलिसकर्मी को एप पर हादसे से जुड़ी जानकारियां जैसे हादसे की तारीख, समय, दुर्घटनास्थल, संबंधित वाहन, दुर्घटना का संभावित कारण आदि अपलोड करना होगा। अपलोड होते ही पूरा ब्यौरा स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग के पास पहुंच जाएगा। संबंधित विभाग इसमें अपने स्तर से संबंधित कार्रवाई करेंगे।
जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी अमित मिश्रा बताते हैं कि डाटा बेस तैयार करने के बाद इसका पूरा विश्लेषण आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ करेंगे। विश्लेषण के अनुरूप मार्ग दुर्घटनाओं को रोकने और सड़क सुरक्षा की दिशा में बेहतर कार्य करने की नई नीति तैयार की जाएगी।
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15 मार्च से लांच हो रहे इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटा बेस (आई रैड) एप पर जिले में होने वाली दुर्घटनाओं का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। इसका अध्ययन आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ करेंगे। इसी आधार पर हादसों पर रोक लगाने की योजना तैयार की जाएगी। एप में कार्य कैसे करना है, इसका ड्राईरन भी शहर में किया जा चुका है।
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विकसित किए गए आई रैड एप को फिलहाल पुलिस विभाग, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के साथ साथ लोक निर्माण विभाग के लोगों को इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। 15 मार्च से लांच हो रहे इस एप के लिए परिवहन विभाग और पुलिस विभाग के कर्मचारियों को जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अमित मिश्रा के निर्देशन में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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शहर कोतवाली क्षेत्र में कोतवाली के निकट ही सांडी रोड पर इस एप का ड्राईरन भी हुआ। इस दौरान जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अमित मिश्रा के अलावा यातायात निरीक्षक विनोद कुमार यादव, शहर कोतवाल जगदीश यादव और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी मौजूद रहे।
ऐसे काम करेगा एप
दुर्घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचने वाले पुलिसकर्मी को एप पर हादसे से जुड़ी जानकारियां जैसे हादसे की तारीख, समय, दुर्घटनास्थल, संबंधित वाहन, दुर्घटना का संभावित कारण आदि अपलोड करना होगा। अपलोड होते ही पूरा ब्यौरा स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग के पास पहुंच जाएगा। संबंधित विभाग इसमें अपने स्तर से संबंधित कार्रवाई करेंगे।
जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी अमित मिश्रा बताते हैं कि डाटा बेस तैयार करने के बाद इसका पूरा विश्लेषण आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ करेंगे। विश्लेषण के अनुरूप मार्ग दुर्घटनाओं को रोकने और सड़क सुरक्षा की दिशा में बेहतर कार्य करने की नई नीति तैयार की जाएगी।