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बैंकों में निकलेगा आज, कल, दम
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 30 Mar 2015 12:16 AM IST
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मतलब साफ है कि 30 और 31 मार्च दो दिन बचे है। ऐसे मेें इन दो दिनों में
सबसे ज्यादा काम प्रेशर वित्तीय संस्थानों में रहेगा, इनमें भी बैंकों में
सबसे ज्यादा भीड़ रहने के साथ ही काम का दबाव रहने की संभावना है।
सूत्रों की माने तो हालात को लेकर बैंक अफसरों ने भी तैयारियां पूरी की हैं, ताकि इन दो दिनों में संभावित बढ़े कामकाज का निपटारा किया जा सके, क्योंकि इसके बाद अगले दिन बैंकों में अवकाश है, जिससे इन दो दिनों में उस लिहाज से भी कामकाज का अधिक होना तय है।
जिले में इस समय सहकारी एवं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की करीब 240 बैंक शाखाएं कार्य कर रही हैं। इन शाखाओं में करीब 25 लाख से ज्यादा एकाउंट है। पुरानी सरकारी बैंकों में प्रति शाखा औसतन 10 से 15 हजार से ज्यादा बैंक एकाउंट है।
ज्यादातर बैंक शाखाओं में जमा निकासी को एक ही काउंटर हैं और पास बुक इंट्री को अलग से काउंटर नहीं, जिससे ग्राहकों को काफी समस्या रहती है। वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में काम का सबसे ज्यादा दबाव सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकाें में रहता हैं।
दरअसल इन बैंक शाखाओं में सरकारी योजनाओं से लेकर जीरो बैलेंस एकाउंट आदि का काम सर्वाधिक रहता है, जिसके सापेक्ष बैंक शाखाओं में कर्मचारी कम होने से वहां कई सेवाओं के काउंटर ग्राहकों की संख्या के सापेक्ष कम रहते हैं, जिससे लोगों को लाइन लगानी पड़ती हैं।
इस समय चालू वित्तीय वर्ष का अंतिम माह आखिरी पड़ाव पर है और दो ही दिन शेष बचे हैं, लिहाजा बैंकों में काम काफी बढ़ना तय है। उधर, शहर में तो लगभग सभी बैंकों ने एटीएम सेवाएं शुरू कर दी हैं, पर ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम केंद्र न होने से छोटी सी धनराशि निकालने को भी लोगों को बैंक आना पड़ता है।
बैंकों में इन दो दिनों में चेकों के क्लीरिंयस से लेकर लेनदेन के काउंटरों पर काम काज संभालने को विशेष तैयारियां करनी पड़ रही है। इस बाबत एसबीआई मुख्य शाखा के मुख्य प्रबंधक एचआर पांडेय ने बताया कि उन्होंने दो कार्यदिवसों में संभावित भीड़ एवं बढ़ते काम काज को लेकर कर्मियों के साथ बैठक कर तनाव मुक्त हो काम निपटाने की रणनीति बनाई है।
सूत्रों की माने तो हालात को लेकर बैंक अफसरों ने भी तैयारियां पूरी की हैं, ताकि इन दो दिनों में संभावित बढ़े कामकाज का निपटारा किया जा सके, क्योंकि इसके बाद अगले दिन बैंकों में अवकाश है, जिससे इन दो दिनों में उस लिहाज से भी कामकाज का अधिक होना तय है।
जिले में इस समय सहकारी एवं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की करीब 240 बैंक शाखाएं कार्य कर रही हैं। इन शाखाओं में करीब 25 लाख से ज्यादा एकाउंट है। पुरानी सरकारी बैंकों में प्रति शाखा औसतन 10 से 15 हजार से ज्यादा बैंक एकाउंट है।
ज्यादातर बैंक शाखाओं में जमा निकासी को एक ही काउंटर हैं और पास बुक इंट्री को अलग से काउंटर नहीं, जिससे ग्राहकों को काफी समस्या रहती है। वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में काम का सबसे ज्यादा दबाव सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकाें में रहता हैं।
दरअसल इन बैंक शाखाओं में सरकारी योजनाओं से लेकर जीरो बैलेंस एकाउंट आदि का काम सर्वाधिक रहता है, जिसके सापेक्ष बैंक शाखाओं में कर्मचारी कम होने से वहां कई सेवाओं के काउंटर ग्राहकों की संख्या के सापेक्ष कम रहते हैं, जिससे लोगों को लाइन लगानी पड़ती हैं।
इस समय चालू वित्तीय वर्ष का अंतिम माह आखिरी पड़ाव पर है और दो ही दिन शेष बचे हैं, लिहाजा बैंकों में काम काफी बढ़ना तय है। उधर, शहर में तो लगभग सभी बैंकों ने एटीएम सेवाएं शुरू कर दी हैं, पर ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम केंद्र न होने से छोटी सी धनराशि निकालने को भी लोगों को बैंक आना पड़ता है।
बैंकों में इन दो दिनों में चेकों के क्लीरिंयस से लेकर लेनदेन के काउंटरों पर काम काज संभालने को विशेष तैयारियां करनी पड़ रही है। इस बाबत एसबीआई मुख्य शाखा के मुख्य प्रबंधक एचआर पांडेय ने बताया कि उन्होंने दो कार्यदिवसों में संभावित भीड़ एवं बढ़ते काम काज को लेकर कर्मियों के साथ बैठक कर तनाव मुक्त हो काम निपटाने की रणनीति बनाई है।