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पुल निर्माण के लिए चूड़ी व जेवर त्यागे
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 19 May 2015 12:12 AM IST
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पूर्व अध्यक्ष सीमा मिश्रा ने सोमवार को अपने हाथों से चूड़ी, कंगन और
कुंडल समेत अन्य आभूषण उतारते हुए संकल्प लिया कि जब तक रामगंगा नदी पर
अर्जुनपुर पुल का निर्माण नहीं होगा, तब तक वह आभूषण व चूड़ियां नहीं
पहनेंगी।
वट अमावस्या पर उनके द्वारा लिया गया यह संकल्प क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्ञात हो कि वर्ष 1975 में कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ा गांव अर्जुनपुर स्थित रामगंगा घाट पर नाव पर सवार करीब 90 लोग डूब गए थे। तब से लगातार इस स्थान पर पुल बनाए जाने की मांग होती रही।
हर चुनाव और कमोवेश सभी प्रत्याशियों के लिए यह पुल निर्माण मुद्दा बनता रहा है, पर पुल का निर्माण आज तक नहीं हो सका। साल दर साल पुल की आस में गुजरते जा रहे हैं। तमाम क्षेत्रीय लोगों ने आंदोलन, हवन आदि क्रिए मगर पुल न बन सका।
इससे आहत क्षेत्र के ग्राम खैरूद्दीनपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता महेश मिश्रा की पत्नी एवं प्रधान संघ की पूर्व अध्यक्ष सीमा मिश्रा ने आज वट अमावस्या के दिन शासन-प्रशासन का ध्यान पुल की ओर आकर्षित कराने को अपने हाथों से ूड़ियां और आभूषण उतार दिए।
सीमा मिश्रा ने कहा कि विधानसभा चुनाव 2012 एवं लोकसभा चुनाव 2014 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित तमाम सपा के नेताओं के वादों के बाद भी पुल का न बनना और क्षेत्र की इस विकट समस्या के प्रति जनप्रतिनिधियों की बेरुखी ने उन्हें द्रवित कर दिया। जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
वट अमावस्या पर उनके द्वारा लिया गया यह संकल्प क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्ञात हो कि वर्ष 1975 में कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ा गांव अर्जुनपुर स्थित रामगंगा घाट पर नाव पर सवार करीब 90 लोग डूब गए थे। तब से लगातार इस स्थान पर पुल बनाए जाने की मांग होती रही।
हर चुनाव और कमोवेश सभी प्रत्याशियों के लिए यह पुल निर्माण मुद्दा बनता रहा है, पर पुल का निर्माण आज तक नहीं हो सका। साल दर साल पुल की आस में गुजरते जा रहे हैं। तमाम क्षेत्रीय लोगों ने आंदोलन, हवन आदि क्रिए मगर पुल न बन सका।
इससे आहत क्षेत्र के ग्राम खैरूद्दीनपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता महेश मिश्रा की पत्नी एवं प्रधान संघ की पूर्व अध्यक्ष सीमा मिश्रा ने आज वट अमावस्या के दिन शासन-प्रशासन का ध्यान पुल की ओर आकर्षित कराने को अपने हाथों से ूड़ियां और आभूषण उतार दिए।
सीमा मिश्रा ने कहा कि विधानसभा चुनाव 2012 एवं लोकसभा चुनाव 2014 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित तमाम सपा के नेताओं के वादों के बाद भी पुल का न बनना और क्षेत्र की इस विकट समस्या के प्रति जनप्रतिनिधियों की बेरुखी ने उन्हें द्रवित कर दिया। जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।