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बुलबुलाखेड़ा में जन्मा तीन पैर वाला शिशु
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
Updated Wed, 03 Aug 2016 11:39 PM IST
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बच्चा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हरदोई। बघौली क्षेत्र के बुलबुलाखेड़ा गांव में एक किसान परिवार में तीन पैर वाले बालक ने जन्म लिया है। बालक को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुटी है। वहीं, पिता दो बेटियों के बाद बेटे की मुराद पूरी होने के बाद भी असमंजस की स्थिति में नजर आ रहा है।
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बघौली क्षेत्र के ग्राम बुलबुलखेड़ा निवासी अग्रपाल की पत्नी छोटी ने रविवार को तीन पैर वाले बालक को घर में ही जन्म दिया। अग्रपाल की पांच वर्ष की सुनिति व तीन वर्ष की सुनीता दो बेटियां पहले से हैं। पिता का कहना है कि उसकी खुशी भी बालक की तरह अनोखी है। विचित्र बालक को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लग गई।
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सर्जरी से बच्चा हो सकता स्वस्थ
बाल रोग विशेषज्ञ डा. अमरजीत सिंह अजवानी का कहना है कि यह कोई विचित्र घटना नहीं है। ऐसा होता है लेकिन सीमित। गर्भावस्था के दौरान पूर्ण तरह से परिपक्व न होने के कारण या कोई सेल अधिक विकसित होने से उसके तीन पैर बन गए हैं। बच्चा यदि स्वस्थ है और पैर निकालने योग्य है तो उसकी सर्जरी करके निकाला जा सकता है। अभिभावक जागरूक हों और उसे तत्काल किसी चिकित्सक के पास ले जाएं।
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क्या उस गांव में आशा बहू नहीं थी?
चिकित्सकों का कहना है कि सरकारी सुविधा होने के बाद भी उसने घर पर ही प्रसव क्यों कराया। यदि वह चिकित्सालय में प्रसव कराती तो शायद अब तक बच्चे की स्थितियों को देखकर उसका इलाज कर दिया गया होता और वह स्वस्थ हो चुका होता। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने वाली आशा न तो अग्रपाल के पास पहुंची और न ही उनकी पत्नी को सामुदायिक या सरकारी चिकित्सालय में प्रसव कराने को प्रेरित किया।
आशा नहीं तो आंगनबाड़ी गई होती
तीन पैरों के बालक के जन्म के साथ ही कुछ अन्य विवादों ने भी बुलबुलाखेड़ा में जन्म ले लिया है। गर्भवती महिला को न तो आशा ने प्रसव करवाने के लिए स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई और न ही गर्भवती महिलाओं को पोषण व विटामिन देने का दावा करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री ही उनके दरवाजे पहुंची। लोगों का मानना है कि विधिवत दवाओं का सेवन भी यदि मां को मिला होता तो शायद बच्चे का स्वरूप बदल सकता था।