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टिकट कटने पर भाजपा के अतरौली मंडल अध्यक्ष ने छोड़ी पार्टी
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जिला पंचायत सदस्य पद के लिए वार्ड आठ से भाजपा के प्रबल दावेदार डॉ. पुष्पेंद्र लोधी ने टिकट कटने के बाद मंडल अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए पार्टी छोड़ दी। उन्होंने रविवार को निर्दलीय नामांकन करने का एलान किया। अतरौली विधानसभा क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और अब उनके नाती संदीप सिंह का राजनैतिक क्षेत्र है।
जिला पंचायत सदस्य पद के लिए भाजपा ने वार्ड नंबर आठ से वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश भारद्वाज की पुत्रवधू खुशबू भारद्वाज को प्रत्याशी बनाया है। उनके साथ भाजपा के देहात मंडल के अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र लोधी भी टिकट की दौड़ में मजबूत दावेदार थे। टिकट कटने से पुष्पेंद्र लोधी और उनके समर्थकों में मायूसी छा गई। समर्थकों के कहने पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने का मन बना लिया है।
पुष्पेंद्र लोधी ने आरोप लगाया कि बड़े परिवारों के मिलीभगत से टिकट कटा है। कार्यकर्ता की उपेक्षा हुई है। इसलिए वह मंडल अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए अपने समर्थकों के साथ पार्टी छोड़ रहे हैं। निर्दलीय नामांकन करेंगे।
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287 वोट से पिछला चुनाव हारी थी पत्नी
डॉ. पुष्पेंद्र लोधी की पत्नी मंजू लोधी वर्ष 2015 में जिला पंचायत चुनाव लड़ीं थीं। उस चुनाव में वह 287 वोट से चुनाव हार गई थीं। हार के बाद भी पांच साल से जनता के बीच रहने से उन्हें भरोसा था कि पार्टी उन्हें प्रत्याशी बनाएगी।
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जिला पंचायत सदस्य पद के लिए भाजपा ने वार्ड नंबर आठ से वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश भारद्वाज की पुत्रवधू खुशबू भारद्वाज को प्रत्याशी बनाया है। उनके साथ भाजपा के देहात मंडल के अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र लोधी भी टिकट की दौड़ में मजबूत दावेदार थे। टिकट कटने से पुष्पेंद्र लोधी और उनके समर्थकों में मायूसी छा गई। समर्थकों के कहने पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने का मन बना लिया है।
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पुष्पेंद्र लोधी ने आरोप लगाया कि बड़े परिवारों के मिलीभगत से टिकट कटा है। कार्यकर्ता की उपेक्षा हुई है। इसलिए वह मंडल अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए अपने समर्थकों के साथ पार्टी छोड़ रहे हैं। निर्दलीय नामांकन करेंगे।
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287 वोट से पिछला चुनाव हारी थी पत्नी
डॉ. पुष्पेंद्र लोधी की पत्नी मंजू लोधी वर्ष 2015 में जिला पंचायत चुनाव लड़ीं थीं। उस चुनाव में वह 287 वोट से चुनाव हार गई थीं। हार के बाद भी पांच साल से जनता के बीच रहने से उन्हें भरोसा था कि पार्टी उन्हें प्रत्याशी बनाएगी।