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Hardoi News: भीषण गर्मी के बीच 23 दिन में जवाब दे गए 55 ट्रांसफार्मर
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फोटो-25- बेहटा गोकुल फीडर की नई ट्रॉली। संवाद
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हरदोई। भीषण गर्मी के बीच केबल और ट्रांसफार्मर लोड नहीं झेल पा रहे हैं। हर रोज ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित हो रही है। शहरी क्षेत्र में 12 घंटे के अंदर और ग्रामीण क्षेत्र में 24 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने के निर्देश हैं। पिछले 23 दिन में 55 ट्रांसफार्मर खराब हुए। विभागीय भाषा में इन्हें क्षतिग्रस्त होना कहा जाता है। वर्कशॉप से दूसरा ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने में छह से सात दिन लग रहे हैं।
जनपद में उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए 45,576 छोटे बड़े ट्रांसफार्मर लगे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में खुले तार की जगह बंच कंडक्टर डाले जा चुके हैं। इसके पीछे मंशा यह थी कि उपभोक्तओं को बिजली आपूर्ति में कोई बाधा न आए। भीषण गर्मी में लोड बढ़ने के कारण यह व्यवस्था खत्म हो चुकी है। लोड बढ़ने के कारण ट्रांसफार्मर और केबल जवाब देने लगे हैं। शुक्रवार रात आशानगर क्षेत्र में ओवरलोडिंग के कारण केबल धूं-धूं कर जल गई। इसकी वजह से जयराम फीडर रात में 12 बजे तक बंद रहा।
वहीं मन्नापुरवा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े टाउन प्रथम व लालपालपुर फीडर तीन घंटे तक बंद रहे। सांडी रोड विद्युत उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्र की आपूर्ति रात 11 बजे तक गुल रही। इससे उपभोक्ता परेशान हुए। विभागीय जानकार बताते हैं कि पिछले 23 दिन में 55 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। शहर में तो तय समयसीमा में ट्रांसफार्मर मिल जा रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बदलने में सात से आठ दिन लग रहे हैं।
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इंसुलेशन पिघलना, तेल का कम होना और ज्यादा लोड से निकल रहा ट्रांसफार्मरों का दम
क्षमता से अधिक करंट बहने के कारण ट्रांसफार्मर के अंदर की वाइंडिंग (तांबे या एल्युमीनियम के तार) अत्यधिक गर्म हो जाती है। लगातार गर्म रहने से इसका इंसुलेशन (सुरक्षा कवच) पिघल जाता है और ट्रांसफार्मर शॉर्ट-सर्किट होकर जल जाता है। ट्रांसफार्मर के अंदर एक खास तेल (खनिज तेल) भरा होता है जो दो काम करता है। एक वाइंडिंग को ठंडा रखता और शॉर्ट-सर्किट रोकता है। तेल की मात्रा कम होने से उसका स्तर कम हो जाए तो गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। तेल में हवा की नमी या कचरा मिल जाए तो उसकी बिजली रोकने की क्षमता खत्म हो जाती है जिससे अंदर ही अंदर स्पार्किंग होने लगती है। हर ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के लिए फ्यूज (Fuse) और सर्किट ब्रेकर लगाए जाते हैं। जब भी कोई फॉल्ट या ओवरलोडिंग हो तो फ्यूज को तुरंत उड़ जाना चाहिए ताकि ट्रांसफार्मर बच जाए लेकिन कई बार लोग फ्यूज में बहुत मोटा तार बांध देते हैं। ऐसे में फॉल्ट होने पर फ्यूज नहीं टूटता और पूरा लोड सीधे ट्रांसफार्मर पर आ जाता है जिससे वह जल जाता है। तीनों फेज पर बराबर लोड होना चाहिए लेकिन अगर किसी एक फेज पर बहुत ज़्यादा कनेक्शन जोड़ दिए जाएं और बाकी दो खाली रहें तो ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल वायर पर भारी दबाव पड़ता है। इससे वाइंडिंग जल जाती है।
बेहटागोकुल टाउन के लिए बना अलग फीडर, राहत की उम्मीद
बेहटा गोकुल विद्युत उपकेंद्र के उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। बेहटा गोकुल टाउन को मानपुर फीडर से अलग कर दिया गया है। अभी तक मानपुर, अटवा और कौंढ़ा फीडरों से 120 गांवों की आपूर्ति की जाती थी। बेहटा गोकुल को मानपुर फीडर से ही आपूर्ति होती थी लेकिन अब इसे अलग कर दिया गया है।
अवर अभियंता महेश कुमार ने बताया कि टाउन क्षेत्र के उपभोक्ता लगातार अलग फीडर की मांग कर रहे थे। अभी तक मानपुर फीडर पर कुल 26 गांव की सप्लाई जा रही थी उसमें करीब 3500 उपभोक्ता थे। अब छह गांव के 1100 कनेक्शन अलग करके टाउन फीडर बना दिया गया। इससे वोल्टेज में भी सुधार होगा और फीडर पर लोड भी कम हो जाएगा।
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जनपद में उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए 45,576 छोटे बड़े ट्रांसफार्मर लगे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में खुले तार की जगह बंच कंडक्टर डाले जा चुके हैं। इसके पीछे मंशा यह थी कि उपभोक्तओं को बिजली आपूर्ति में कोई बाधा न आए। भीषण गर्मी में लोड बढ़ने के कारण यह व्यवस्था खत्म हो चुकी है। लोड बढ़ने के कारण ट्रांसफार्मर और केबल जवाब देने लगे हैं। शुक्रवार रात आशानगर क्षेत्र में ओवरलोडिंग के कारण केबल धूं-धूं कर जल गई। इसकी वजह से जयराम फीडर रात में 12 बजे तक बंद रहा।
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वहीं मन्नापुरवा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े टाउन प्रथम व लालपालपुर फीडर तीन घंटे तक बंद रहे। सांडी रोड विद्युत उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्र की आपूर्ति रात 11 बजे तक गुल रही। इससे उपभोक्ता परेशान हुए। विभागीय जानकार बताते हैं कि पिछले 23 दिन में 55 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। शहर में तो तय समयसीमा में ट्रांसफार्मर मिल जा रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बदलने में सात से आठ दिन लग रहे हैं।
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इंसुलेशन पिघलना, तेल का कम होना और ज्यादा लोड से निकल रहा ट्रांसफार्मरों का दम
क्षमता से अधिक करंट बहने के कारण ट्रांसफार्मर के अंदर की वाइंडिंग (तांबे या एल्युमीनियम के तार) अत्यधिक गर्म हो जाती है। लगातार गर्म रहने से इसका इंसुलेशन (सुरक्षा कवच) पिघल जाता है और ट्रांसफार्मर शॉर्ट-सर्किट होकर जल जाता है। ट्रांसफार्मर के अंदर एक खास तेल (खनिज तेल) भरा होता है जो दो काम करता है। एक वाइंडिंग को ठंडा रखता और शॉर्ट-सर्किट रोकता है। तेल की मात्रा कम होने से उसका स्तर कम हो जाए तो गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। तेल में हवा की नमी या कचरा मिल जाए तो उसकी बिजली रोकने की क्षमता खत्म हो जाती है जिससे अंदर ही अंदर स्पार्किंग होने लगती है। हर ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के लिए फ्यूज (Fuse) और सर्किट ब्रेकर लगाए जाते हैं। जब भी कोई फॉल्ट या ओवरलोडिंग हो तो फ्यूज को तुरंत उड़ जाना चाहिए ताकि ट्रांसफार्मर बच जाए लेकिन कई बार लोग फ्यूज में बहुत मोटा तार बांध देते हैं। ऐसे में फॉल्ट होने पर फ्यूज नहीं टूटता और पूरा लोड सीधे ट्रांसफार्मर पर आ जाता है जिससे वह जल जाता है। तीनों फेज पर बराबर लोड होना चाहिए लेकिन अगर किसी एक फेज पर बहुत ज़्यादा कनेक्शन जोड़ दिए जाएं और बाकी दो खाली रहें तो ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल वायर पर भारी दबाव पड़ता है। इससे वाइंडिंग जल जाती है।
बेहटागोकुल टाउन के लिए बना अलग फीडर, राहत की उम्मीद
बेहटा गोकुल विद्युत उपकेंद्र के उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। बेहटा गोकुल टाउन को मानपुर फीडर से अलग कर दिया गया है। अभी तक मानपुर, अटवा और कौंढ़ा फीडरों से 120 गांवों की आपूर्ति की जाती थी। बेहटा गोकुल को मानपुर फीडर से ही आपूर्ति होती थी लेकिन अब इसे अलग कर दिया गया है।
अवर अभियंता महेश कुमार ने बताया कि टाउन क्षेत्र के उपभोक्ता लगातार अलग फीडर की मांग कर रहे थे। अभी तक मानपुर फीडर पर कुल 26 गांव की सप्लाई जा रही थी उसमें करीब 3500 उपभोक्ता थे। अब छह गांव के 1100 कनेक्शन अलग करके टाउन फीडर बना दिया गया। इससे वोल्टेज में भी सुधार होगा और फीडर पर लोड भी कम हो जाएगा।

फोटो-25- बेहटा गोकुल फीडर की नई ट्रॉली। संवाद