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Hardoi News: डिजिटल एक्सरे मशीन के बाद अब पोर्टेबल मशीन भी बीमार
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फोटो-07- मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे विभाग में बंद पड़ी मशीन। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को एक्सरे कराने में अभी भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन बीतने के बाद भी ओपीडी में आने वाले मरीजों के एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। मुख्य डिजिटल और पोर्टेबल दोनों एक्सरे मशीनें खराब पड़ी हैं।
मेडिकल कॉलेज की मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन बीते एक माह से बंद है। इसमें ड्रैग कंट्रोल बोर्ड और पावर सप्लाई में खामी आ गई है। पोर्टेबल मशीन भी 4 सितंबर को मदर बोर्ड में खराबी के कारण बंद हो गई। इसके चलते 5 सितंबर से मरीजों के एक्सरे नहीं हो रहे हैं। इमरजेंसी और भर्ती मरीजों की जरूरत को देखते हुए 50 एमए की मशीन से एक्सरे किए जा रहे हैं। हालांकि, इसकी क्षमता कम होने के कारण सभी गंभीर मरीजों की जांच संभव नहीं है। ओपीडी के मरीजों को जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है या जांच की तारीख आगे बढ़ानी पड़ रही है। कई मरीज बाहर से जांच कराने को मजबूर हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है।
मुख्य डिजिटल मशीन की मरम्मत भी हुई शुरू
जांच की मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन की मरम्मत का काम आज से शुरू कर दिया गया है। कार्यदायी संस्था सायरिक्स के इंजीनियर प्रद्युम्न और उनके साथी मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड और सप्लाई के लिए पीसीबी बदल रहे हैं। उन्होंने शाम तक मशीन को दुरुस्त करने का प्रयास करने की बात कही है। कार्यदायी संस्था एलेंजर्स ने भी 100 एमए की मशीन की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इस मशीन के भी शाम तक बनने की उम्मीद जताई गई है।
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वर्जन
मशीनों की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। मशीनों के उपकरण मंगवा दिए गए हैं। कार्यदायी संस्थाओं के इंजीनियरों ने सोमवार शाम तक मशीनें बना लेने की बात कही है। जल्द ही मरीजों को राहत मिलेगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज की मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन बीते एक माह से बंद है। इसमें ड्रैग कंट्रोल बोर्ड और पावर सप्लाई में खामी आ गई है। पोर्टेबल मशीन भी 4 सितंबर को मदर बोर्ड में खराबी के कारण बंद हो गई। इसके चलते 5 सितंबर से मरीजों के एक्सरे नहीं हो रहे हैं। इमरजेंसी और भर्ती मरीजों की जरूरत को देखते हुए 50 एमए की मशीन से एक्सरे किए जा रहे हैं। हालांकि, इसकी क्षमता कम होने के कारण सभी गंभीर मरीजों की जांच संभव नहीं है। ओपीडी के मरीजों को जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है या जांच की तारीख आगे बढ़ानी पड़ रही है। कई मरीज बाहर से जांच कराने को मजबूर हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है।
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मुख्य डिजिटल मशीन की मरम्मत भी हुई शुरू
जांच की मुख्य डिजिटल एक्सरे मशीन की मरम्मत का काम आज से शुरू कर दिया गया है। कार्यदायी संस्था सायरिक्स के इंजीनियर प्रद्युम्न और उनके साथी मशीन का ड्रैग कंट्रोल बोर्ड और सप्लाई के लिए पीसीबी बदल रहे हैं। उन्होंने शाम तक मशीन को दुरुस्त करने का प्रयास करने की बात कही है। कार्यदायी संस्था एलेंजर्स ने भी 100 एमए की मशीन की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इस मशीन के भी शाम तक बनने की उम्मीद जताई गई है।
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मशीनों की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। मशीनों के उपकरण मंगवा दिए गए हैं। कार्यदायी संस्थाओं के इंजीनियरों ने सोमवार शाम तक मशीनें बना लेने की बात कही है। जल्द ही मरीजों को राहत मिलेगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज