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Hardoi News: चीनी और प्याज के बाद अब सरसों के तेल ने बिगाड़ा रसोई का बजट
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फोटो- 41- दुकान पर बिक्री के लिए रखा सरसों का तेल। संवाद
हरदोई। महंगाई की मार अब रसोई पर साफ दिखाई देने लगी है। पिछले कुछ दिनों में सरसों के तेल की कीमतों में करीब 55 रुपये प्रति किलो तक बढ़ोतरी हो गई है। कीमतों में उछाल आने से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। सरसों के कम उत्पादन और बाजार में सीमित आवक के कारण कीमतों में तेजी आई है। रिफाइंड के पैकेटों के दाम भी बढ़ने से अब आगामी त्योहार पर आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता जा रहा है।
चीनी और प्याज के बाद अब खाद्य तेलों पर लगी महंगाई की आग ने आम आदमी के रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। एक तरफ त्योहार का दौर शुरू हो गया है। अगस्त से अक्तूबर तक अब हर माह कोई न कोई व्रत या त्योहार पड़ेगा। इसमें विभिन्न तरह के पकवान बनाने के लिए खाद्य तेलों की आवश्यकता पड़ेगी, लेकिन बीते कुछ दिनों से खाद्य तेलों में बढ़ी महंगाई ने आम आदमी की कमर को ही तोड़ कर रख दिया है।
बाजार में पैकिंग वाला सरसों का तेल जो अभी 195 से 200 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, वह अब 235 से 250 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। खुले सरसों तेल का भाव भी 195 रुपये से बढ़कर 240 रुपये प्रति किलो हो गया है। इतना ही नहीं रिफाइंड के पैकेटों पर भी प्रति लीटर 10 से 15 रुपये के बीच दाम बढ़ चुके हैं। किराना व्यापारी सुदेश सिंघल ने बताया कि इस बार सरसों का उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहा है। इससे तेल की लागत बढ़ गई है। यदि आवक नहीं बढ़ी तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।
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त्योहार पर दाम बढ़ने का अंदेशा
व्यापारी रवि कश्यप ने बताया कि थोक मंडियों से ही लगातार महंगा माल मिल रहा है। सप्लाई कम होने और मांग बढ़ने से थोक से लेकर फुटकर बाजार तक असर साफ दिख रहा है। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर तेल और मसालों के दाम में और उछाल आने की संभावना है। पहले लोग एक महीने के लिए सरसों का तेल एक साथ खरीद लेते थे, लेकिन अब महंगाई होने से लोगों की खरीदारी करने का तरीका भी बदल गया है। आर्थिक बोझ बढ़ने से लोगों ने खरीदारी तो कम की है, व्यापार को भी नुकसान हो रहा है।
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चीनी और प्याज के बाद अब खाद्य तेलों पर लगी महंगाई की आग ने आम आदमी के रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। एक तरफ त्योहार का दौर शुरू हो गया है। अगस्त से अक्तूबर तक अब हर माह कोई न कोई व्रत या त्योहार पड़ेगा। इसमें विभिन्न तरह के पकवान बनाने के लिए खाद्य तेलों की आवश्यकता पड़ेगी, लेकिन बीते कुछ दिनों से खाद्य तेलों में बढ़ी महंगाई ने आम आदमी की कमर को ही तोड़ कर रख दिया है।
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बाजार में पैकिंग वाला सरसों का तेल जो अभी 195 से 200 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, वह अब 235 से 250 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। खुले सरसों तेल का भाव भी 195 रुपये से बढ़कर 240 रुपये प्रति किलो हो गया है। इतना ही नहीं रिफाइंड के पैकेटों पर भी प्रति लीटर 10 से 15 रुपये के बीच दाम बढ़ चुके हैं। किराना व्यापारी सुदेश सिंघल ने बताया कि इस बार सरसों का उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहा है। इससे तेल की लागत बढ़ गई है। यदि आवक नहीं बढ़ी तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।
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त्योहार पर दाम बढ़ने का अंदेशा
व्यापारी रवि कश्यप ने बताया कि थोक मंडियों से ही लगातार महंगा माल मिल रहा है। सप्लाई कम होने और मांग बढ़ने से थोक से लेकर फुटकर बाजार तक असर साफ दिख रहा है। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर तेल और मसालों के दाम में और उछाल आने की संभावना है। पहले लोग एक महीने के लिए सरसों का तेल एक साथ खरीद लेते थे, लेकिन अब महंगाई होने से लोगों की खरीदारी करने का तरीका भी बदल गया है। आर्थिक बोझ बढ़ने से लोगों ने खरीदारी तो कम की है, व्यापार को भी नुकसान हो रहा है।

फोटो- 41- दुकान पर बिक्री के लिए रखा सरसों का तेल। संवाद

फोटो- 41- दुकान पर बिक्री के लिए रखा सरसों का तेल। संवाद