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Hardoi News: न्यायालय में 24 साल बाद धड़ाम हुआ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला, आरोपी बरी

Sat, 10 Jan 2026 10:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 10:45 PM IST
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After 24 years, the case of fraud and forgery collapsed in the court, the accused was acquitted.After 24 years, the case of fraud and forgery collapsed in the court, the accused was acquitted.
हरदोई। उस शख्स ने 24 साल तक धोखेबाज और जालसाज जैसी तोहमत झेली। न्यायालय के चक्कर काटे। सैकड़ों तारीखों पर सुनवाई के लिए हाजिर हुआ। उसके खिलाफ न तो कोई गवाह मिला और न ही सबूत। आखिरकार जालसाजी और धोखाधड़ी से जुड़ा मामला न्यायालय में पूरी तरह ढह गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋचा वर्मा ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
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बात 17 मई 2001 की है। शहर कोतवाली में तत्कालीन सहायक खाद्य एवं विपणन अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें दावा किया था कि वह सांडी रोड स्थित स्टेड वेयर कॉर्पाेरेशन के किसान कोल्ड स्टोर पर गेहूं क्रय केंद्र की जांच कर रहे थे। इसी दौरान लोनार कोतवाली क्षेत्र के भीखपुर निवासी धीरेंद्र सिंह अपना गेहूं लेकर आए थे। उनकी किसान बही की जांच की गई। किसान बही सवायजपुर तहसील क्षेत्र के मत्तीपुर गांव निवासी रामेंद्र सिंह उर्फ मिथलेश सिंह के नाम थी।
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दावा किया कि धीरेंद्र सिंह खुद किसान नहीं हैं। दूसरे की किसान बही लेकर बिचौलिये के तौर पर गेहूं बेचने आए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में रामेंद्र के साथ ही धीरेंद्र के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया। विवेचना के बाद रामेंद्र का नाम पुलिस ने निकाल दिया। धीरेंद्र के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।
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धीरेंद्र के खिलाफ दो अप्रैल 2007 को आरोप भी तय कर दिए गए। इसके बाद से से लगातार अभियोजन पक्ष को गवाह और सबूत पेश करने का मौका दिया गया था। बावजूद इसके कोई ऐसा गवाह या साक्ष्य अभियोजन की ओर से न्यायालय में पेश नहीं किया जा सका जिससे धीरेंद्र को दोषी करार दिया जा सके। सीजेएम ऋचा वर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 2007 में कोर्ट ने धीरेंद्र के खिलाफ आरोप तय किए थे। तब से अब तक अभियोजन पक्ष को मौका दिया गया था। इसके बावजूद कोई सबूत नहीं पेश कर सके। सीजेएम ने धीरेंद्र को बरी कर दिया।
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