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‘सत्य से अपना जीवन बना सकते सुखमय’
Hardoi
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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पिहानी (हरदोई)। इलाके के डर्रा गांव में आयोजित तीन दिवसीय शतचंडीय महायज्ञ व मेले का कन्या भोज के साथ समापन हो गया। प्रवचन करते हुए नीरज कुमार शास्त्री ने कहा कि सच्चा पुरुष इतना शक्तिशाली होता है कि उसके आगे मनुष्यों को ही नहीं, देवताओं को ही नहीं, परमात्मा को भी झुकना पड़ता है। हमें अपने वचन और कार्यों द्वारा सच्चाई का परिचय देना चाहिए। सत्य अपनाकर और मानव कल्याण के कार्योें के जरिए ही हम अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।
महाभारत का एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कौरवों ने अनीति का रास्ता अपनाया तो संख्या में अधिक होते भी उनका समूल नाश हो गया और पांडव जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म नीति को नहीं छोड़ा। समूचे विश्व में उनकी गौरव गाथा का यशोगान किया जाता है। कहा कि आचरण मेें सत्यता बरतें। ऐसा करने से मानव को ऐसा प्रचंड बल प्राप्त होगा, जो संसार के समस्त बलों से अधिक होगा। कंफ्यूशियस कहते थे कि सत्य में हजार हाथियों के बराबर बल है, परंतु वस्तुत: सत्य मेें अपार बल है। उसकी तुलना भौतिक सृष्टि के किसी बल से नहीं की जा सकती। सदाचरण के कारण ही मनुष्य शक्ति का पुंज बन जाता है। उसे कोई डरा नहीं सकता। झूठे और मिथ्याचारी लोगों का मन सशंकित रहता है और उनका कलेजा पीपल के पत्तों की तरह कांपता रहता है। आनंद की खोज के लिए हमें सांसारिक सुख साधनोें के बजाय मानव कल्याण के कार्यों में लगना चाहिए। तुलसी इस संसार में तीन रतन हैं सार। संत, मिलन और हरि भजन दया, दान और उपकार। इस दौरान मंगला देवी व शीलम देवी ने भी प्रवचन किए। तीन दिवसीय इस मेले व शतचण्डीय यज्ञ मेें आसपास के गांवों के लोगों ने भी हिस्सेदारी की। सोमवार की सुबह विशाल कन्या भोज के साथ शतचंडीय महायज्ञ का समापन हुआ। कार्यक्रम के आयोजक कमलेश गिरि थे।
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महाभारत का एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कौरवों ने अनीति का रास्ता अपनाया तो संख्या में अधिक होते भी उनका समूल नाश हो गया और पांडव जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म नीति को नहीं छोड़ा। समूचे विश्व में उनकी गौरव गाथा का यशोगान किया जाता है। कहा कि आचरण मेें सत्यता बरतें। ऐसा करने से मानव को ऐसा प्रचंड बल प्राप्त होगा, जो संसार के समस्त बलों से अधिक होगा। कंफ्यूशियस कहते थे कि सत्य में हजार हाथियों के बराबर बल है, परंतु वस्तुत: सत्य मेें अपार बल है। उसकी तुलना भौतिक सृष्टि के किसी बल से नहीं की जा सकती। सदाचरण के कारण ही मनुष्य शक्ति का पुंज बन जाता है। उसे कोई डरा नहीं सकता। झूठे और मिथ्याचारी लोगों का मन सशंकित रहता है और उनका कलेजा पीपल के पत्तों की तरह कांपता रहता है। आनंद की खोज के लिए हमें सांसारिक सुख साधनोें के बजाय मानव कल्याण के कार्यों में लगना चाहिए। तुलसी इस संसार में तीन रतन हैं सार। संत, मिलन और हरि भजन दया, दान और उपकार। इस दौरान मंगला देवी व शीलम देवी ने भी प्रवचन किए। तीन दिवसीय इस मेले व शतचण्डीय यज्ञ मेें आसपास के गांवों के लोगों ने भी हिस्सेदारी की। सोमवार की सुबह विशाल कन्या भोज के साथ शतचंडीय महायज्ञ का समापन हुआ। कार्यक्रम के आयोजक कमलेश गिरि थे।
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