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पैचवर्क में गिट्टी नहीं मिट्टी
Hardoi
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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सवायजपुर। केंद्र सरकार की योजना कि प्रत्येक गांव को पक्की सड़क से जोड़ा जाए परवान तो चढ़ रही है। सड़कों का जाल भी बिछाया जा रहा है लेकि न जिम्मेदारों की हीलाहवाली सेे पीएमजीएसवाई के अंतर्गत बनाई सड़कें दुर्दशा की शिकार हैं। सड़क का अनुरक्षण समय पांच साल तक है लेकिन घटिया गुणवत्ता के चलते एक दो साल में ही जर्जर होने लगती है। इसके चलते वाहनों, यहां तक कि पैदल चलने वालों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं अधिकारी जांच करने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्र्गत भरखनी से रूपापुर कैनाल पटरी से रूपापुर तक सड़क का निर्माण जून 09 में 518.23 लाख रुपए की लागत से किया गया था। शासन की मंशा थी कि इस सड़क से रूपापुर से भरखनी ब्लॉक मुख्यालय सीधे जुड़ जाएगा तथा लोगों को सुविधा मिलेगी। इस सबके विपरीत इस सड़क ने दो साल आठ माह में ही दम तोड़ दिया। यह तब है जब ठेकेदार ने सड़क के अनुरक्षण की जिम्मेदारी पांच साल की तय शर्तों में दी है। रूपापुर, नगला भैंसी, दघेला मोड़, भट्टे के पास सहित डेढ़ दर्जन स्थानों पर यह सड़क उखड़ गई है।
कार्यदायी संस्था अधिशाषी अभियंता निर्माण खण्ड-2(प्र.ख.) लोक निर्माण विभाग की हीलाहवाली के चलते सड़क पर पैच लगाने में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गड्ढों को भरने में गिट्टी कम, मिट्टी का उपयोग अधिक किया जा रहा है। पैच लगने के बाद सड़क कितने दिन चलेगी यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इस सड़क के अतिरिक्त निर्माण खण्ड प्रथम द्वारा निर्मित सेमरझाला से फरिगहना मार्ग, असमधा से गुरूधरू मार्ग, पचदेउरा से सहजनपुर होते हुए रामापुर छैया मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं।
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बताते चलें कि एडीएम राकेश मिश्रा ने पिछले साल जुलाई में क्षेत्र में सड़कों की गुणवत्ता का स्थलीय निरीक्षण किया गया था। इसमें असमधा से सराय राधौ की सड़क का निर्माण न करके धन निकालने की पुष्टि की हुई थी। इसमें एडीएम ने डीएम को जेई के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी, पर कार्रवाई आज तक नहीं हुई। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण व मरम्मत के खेल में विभाग के अधिकारयों व ठेकेदारों के शामिल होने से अच्छी गुणवत्ता की सड़कें नसीब नहीं हो पा रही है। एसडीएम रविंद्र पाल सिंह ने बताया कि सड़क का निरीक्षण कर रिपोर्ट डीएम को भेजेंगेे।
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भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्र्गत भरखनी से रूपापुर कैनाल पटरी से रूपापुर तक सड़क का निर्माण जून 09 में 518.23 लाख रुपए की लागत से किया गया था। शासन की मंशा थी कि इस सड़क से रूपापुर से भरखनी ब्लॉक मुख्यालय सीधे जुड़ जाएगा तथा लोगों को सुविधा मिलेगी। इस सबके विपरीत इस सड़क ने दो साल आठ माह में ही दम तोड़ दिया। यह तब है जब ठेकेदार ने सड़क के अनुरक्षण की जिम्मेदारी पांच साल की तय शर्तों में दी है। रूपापुर, नगला भैंसी, दघेला मोड़, भट्टे के पास सहित डेढ़ दर्जन स्थानों पर यह सड़क उखड़ गई है।
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कार्यदायी संस्था अधिशाषी अभियंता निर्माण खण्ड-2(प्र.ख.) लोक निर्माण विभाग की हीलाहवाली के चलते सड़क पर पैच लगाने में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गड्ढों को भरने में गिट्टी कम, मिट्टी का उपयोग अधिक किया जा रहा है। पैच लगने के बाद सड़क कितने दिन चलेगी यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इस सड़क के अतिरिक्त निर्माण खण्ड प्रथम द्वारा निर्मित सेमरझाला से फरिगहना मार्ग, असमधा से गुरूधरू मार्ग, पचदेउरा से सहजनपुर होते हुए रामापुर छैया मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं।
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बताते चलें कि एडीएम राकेश मिश्रा ने पिछले साल जुलाई में क्षेत्र में सड़कों की गुणवत्ता का स्थलीय निरीक्षण किया गया था। इसमें असमधा से सराय राधौ की सड़क का निर्माण न करके धन निकालने की पुष्टि की हुई थी। इसमें एडीएम ने डीएम को जेई के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी, पर कार्रवाई आज तक नहीं हुई। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण व मरम्मत के खेल में विभाग के अधिकारयों व ठेकेदारों के शामिल होने से अच्छी गुणवत्ता की सड़कें नसीब नहीं हो पा रही है। एसडीएम रविंद्र पाल सिंह ने बताया कि सड़क का निरीक्षण कर रिपोर्ट डीएम को भेजेंगेे।