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पैरा में थम गई विकास की रफ्तार
Hardoi
Updated Mon, 08 Sep 2014 05:31 AM IST
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कछौना। विकास ख्ंाड क्षेत्र के तहत ग्राम पंचायत बाण के राजस्व गांव पैरा को वित्तीय वर्ष 2013-14 में लोहिया समग्र विकास योजना में चयनित किया गया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बावजूद यहां अब तक कुछ भी विकास कार्य नहीं हुआ, जो हुए वह सिर्फ कागजों पर। जिले के प्रभारी मंत्री ने दो माह पहले इस गांव का भ्रमण कर हकीकत देखी थी। खामियां मिलने पर उन्होंने कई कर्मचारियों को निलंबित भी किया। इसके बावजूद स्थिति जस की तस है।
वित्तीय वर्ष 2013-14 बीत चुका है और वित्तीय वर्ष 2014-15 के छह माह गुजरने को हैं, लेकिन पैरा गांव से विकास कोसों दूर है। गांव में घुसते ही हाल में बनी जर्जर सीसी सड़क के गड्ढों को छिपाने के लिए उस पर मिट्टी डाली गई है। गांव की गलियों में न ही आरसीसी है न ही खडंजा। नालियां चोक और बजबजा रही है। सडंाध के कारण आस पास के लोगों का जीना दूभर है। ग्राम प्रधान गुरू प्रसाद ने बताया कि आरसीसी का जितना प्रस्ताव था उसमें 50 मीटर कम बनी है जो बनी है उसमें मानक का प्रयोग नहीं किया गया। जिसके चलते किनारे धंस रहे हैं। बताया कि 27 आवासों का प्रस्ताव दिया गया था जिसमें 21 लोगों को प्रथम किश्त का धन मिला शेष आवास धनाभाव के कारण अधूरे पड़े हैं। 222 स्वच्छ शौचालय के प्रस्ताव के सापेक्ष 78 बन चुके है शेष का कार्य धनाभाव के कारण रुका है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हुए विकास कार्यों में मानकों का पालन नहीं किया गया है। जिसकी शिकायत वह आलाधिकारियों से कर भी चुके है। लेकिन गांव की हालत जस की तस बनी हुई है। इस संबंध में सीडीओ आरएन सिंह ने बताया कि वे इस ओर जानकारी करेेंगे अगर कहीं कोई समस्या है तो उसे दूर कराया जाएगा।
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वित्तीय वर्ष 2013-14 बीत चुका है और वित्तीय वर्ष 2014-15 के छह माह गुजरने को हैं, लेकिन पैरा गांव से विकास कोसों दूर है। गांव में घुसते ही हाल में बनी जर्जर सीसी सड़क के गड्ढों को छिपाने के लिए उस पर मिट्टी डाली गई है। गांव की गलियों में न ही आरसीसी है न ही खडंजा। नालियां चोक और बजबजा रही है। सडंाध के कारण आस पास के लोगों का जीना दूभर है। ग्राम प्रधान गुरू प्रसाद ने बताया कि आरसीसी का जितना प्रस्ताव था उसमें 50 मीटर कम बनी है जो बनी है उसमें मानक का प्रयोग नहीं किया गया। जिसके चलते किनारे धंस रहे हैं। बताया कि 27 आवासों का प्रस्ताव दिया गया था जिसमें 21 लोगों को प्रथम किश्त का धन मिला शेष आवास धनाभाव के कारण अधूरे पड़े हैं। 222 स्वच्छ शौचालय के प्रस्ताव के सापेक्ष 78 बन चुके है शेष का कार्य धनाभाव के कारण रुका है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हुए विकास कार्यों में मानकों का पालन नहीं किया गया है। जिसकी शिकायत वह आलाधिकारियों से कर भी चुके है। लेकिन गांव की हालत जस की तस बनी हुई है। इस संबंध में सीडीओ आरएन सिंह ने बताया कि वे इस ओर जानकारी करेेंगे अगर कहीं कोई समस्या है तो उसे दूर कराया जाएगा।
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