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करोड़ों खर्च, फिर भी फैला कूड़ा
Hardoi
Updated Wed, 26 Feb 2014 05:30 AM IST
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‘जिले के पांच तहसील क्षेत्रों के 19 ब्लाकों की 1101 ग्राम पंचायतों में साफ सफ ाई को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए शासन ने 2072 पद स्वीकृत किए थे, जिनमें 1937 पदों पर सफाई कर्मियों को तैनात किया गया था। इन सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी थी कि गांव की नाली से लेकर सड़के आदि साफ सुथरी रख कूडे़ को निर्धारित स्थान पर डलवाना था। इस कार्य के लिए वेतन से लेकर उपकरण दवा आदि पर प्रतिवर्ष करीब 24 करोड़ रुपये और शौचालय निर्माण पर इस वर्ष करीब 12.29 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्था बदहाल है। अधिकांश सफाई कर्मी मनमानी कर रहे हैं। प्रधानों की शिकायत के बावजूद जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। जिले में स्वच्छता सप्ताह के दौरान भी कागजी खानापूरी ही की गई। मंगलवार को जब जिला मुख्यालय पर स्वच्छता सप्ताह का समापन हो रहा था, तो ग्रामीण क्षेत्रों मेें लोग चोंक नालियां और दलदल से उठ रही दुर्गंध के बीच से निकल रहे थे।’
हरदोई। जिले के ग्रामीण इलाकों में साफ सफाई के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों का बजट खर्च होने के बाद भी व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। स्वच्छता सप्ताह केे दौरान रैली और गोष्ठियां तो की जा रहीं, पर गांव की चोंक नाली और सड़क पर फैला कूड़ा साफ नजर आ रहा है। मंगलवार को जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों का जायजा लेने पर हकीकत सामने आ गई। इन गांवों में स्वच्छता के लिए न तो सफाई कर्मी पहुंच रहे, न ही दवा का छिड़काव हो रहा। सफाई उपकरणों के लिए करोड़ों का बजट भी कागजों पर ही खर्च होता नजर आ रहा है।
संडीला क्षेत्र में स्वच्छता सप्ताह का मंगलवार को समापन हो गया। इस दौरान प्रमुख स्थानों पर लगे बैनर के दावों की जमीनी हकीकत कसबे में देखने को मिली। एसडीएम कंपाउंड के बीच से गुजरने वाले नाले में गंदगी भरी हुई थी और हर तरफ मच्छरों की भरमार थी। उन्नाव व हरदोई रोड पर जगह-जगह कूड़े के ढेर व्यवस्था को आईना दिखा रहे थे। भरावन ब्लॉक का निर्मल गांव श्यामदासपुर और कुरौंध में बदहाल स्थिति नजर आई। यहां सड़क पर दलदल से गुजरने पर लोग विवश थे। सफाई व्यवस्था भी तार तार थी। कछौना क्षेत्र में जगह-जगह नालियां चोंक और सड़क पर कूड़े के ढेर नजर आ रहे थे।। सफाई कर्मी गांव में नजर नहीं आते। कोथावां ब्लॉक मेें एक ओर जहां गोष्ठी कर सप्ताह का समापन कर दिया गया, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल स्थिति नजर आई।
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अधिकांश गांवों में सफाई कर्मी नहीं मिले। यहां ब्लॉक कार्यालय की नालियां भी चोंक पड़ी थी, जबकि कार्यालय के बाहर सड़क पर कीचड़ से लोगों का निकलना भी दूभर हो रहा था। बिलग्राम क्षेत्र में एक ओर जिला स्वच्छता समिति की ओर से निर्मल भारत अभियान के अंतिम दिन रैली निकाल कर जागरूक किया जा रहा था, वहीं गांवों में सफाई न होने की दास्तान सड़क और गलियारे स्वयं बयां कर रहे थे। विकास खंड क्षेत्र में 136 सफाई कर्मियों की तैनाती होने के बावजूद गांवों में कीचड़ युक्त गलियारे सड़कें आवागमन को प्रभावित करती रहती हैं और गांवों की बस्तियां कूड़े के डेरों पर बसी हैं। सवायजपुर क्षेत्र के अधिकांश गांवों में गंदगी का अंबार रहा। ग्रामीणों की मानें तो इन गांवों में सफाई कर्मी भी नहीं पहुंचते।
उधर, भरखनी ब्लॉक में करीब 18 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां सफाई कर्मी ही तैनात नहीं है। शाहाबाद क्षेत्र और सदर तहसील क्षेत्र का भी ऐसा ही हाल था। जिला मुख्यालय पर गोष्ठियां होती रही, पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था देखने की किसी को फुर्सत नहीं मिली। उधर, जिले की 1101 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष सफाई कर्मियों के 2072 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से अभी 1967 की भर्ती कर ली गई है, जिनमें से 1937 सफाई कर्मी कार्यरत हैं, जबकि शेष सफाई कर्मियों पर कार्रवाई होने से वह कार्य नहीं कर रहे हैं। जिले में 1937 सफाई कर्मियों के कार्यरत होने के बावजूद जिले में साफ सफाई का काम रामभरोसे है।
इंसेट---
सफाई कर्मियों पर प्रतिमाह दो करोड़ व्यय
हरदोई। जिले में नियुुक्त सफाई कर्मचारी कार्य भले ही न कर रहे हों, पर शासन उन पर खूब मेहरबान है। नियुक्ति के दौरान सफाई कर्मियों को करीब साढ़े नौ हजार का वेतन मिलता था, पर अब वेतन बढ़ाया जा चुका है। सफाई कर्मियों का मूल वेतन सात हजार रुपये है और उसमें सभी व्यय मिलाकर 12,306 रुपये मिलते हैं, जिसमें से पेंशन के 1205 रुपये की कटौती के बाद 11101 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।
इंसेट---
गांवों में कार्य कराने को दी जाती धनराशि
हरदोई। पंचायत राज विभाग को साफ सफाई के अलावा गांवों में कार्य कराने को भी धनराशि देनी पड़ती है। इसमें गांवों में दवा का छिड़काव से लेकर सफाई कर्मियों के लिए संसाधनों का पैसा ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत की निधि खाते में जाता है। ज्ञात हो कि ग्राम व क्षेत्र पंचायत को राज्य वित्त व 13वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से धनराशि प्रति तीन माह के अंतराल में भेजी जाती है। जिले में वित्तीय वर्ष 13-14 के दौरान एक किश्त में ग्राम पंचायत को पुनरक्षित धनराशि 5,44,19,000 रुपये दी गई। इसी प्रकार क्षेत्र पंचायत को पुनरीक्षत धनराशि कुल 7,85,250 रुपये दिए गए।
इंसेट
शौचालय निर्माण भी करोड़ों रुपये खर्च
हरदोई। पंचायत राज विभाग ने संपूर्ण स्वच्छता अभियान के स्थान पर निर्मल भारत अभियान योजना को शुरू किया। जिसमें गांवों में शौचालय का निर्माण करने को 10 हजार रुपये लाभार्थी को मिलेंगे। जिसमें 32 सौ रुपये केंद्रांश, 14 सौ राज्यांश, 45 सौ मनरेगा से मिलेगा एवं 900 रुपये लाभार्थी को भी स्वयं देना होगा। इसके लिए करीब 15 हजार रुपये का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि, शौचालय निर्माण का काम तो शुरू हो गया है, पर काम जैसे तैसे ही हो रहा है।
इंसेट---
स्वच्छता रैली निकाल किया जागरूक
बिलग्राम/बावन। एडीओ पंचायत संतराम शर्मा के संयोजन में स्वच्छता रैली निकाली गई, जिसे ब्लाक प्रमुख रमकोरा ने रवाना किया, जिसमें शौचालय के निर्माण के उपयोग, सही समय पर साबुन से हाथ धोना, साफ पेयजल के उपयोग आदि को लेकर रैली निकालकर लोगों को जागरूक किया गया। बावन में बीईओ धर्मेंद्र प्रसाद ने जागरूकता रैली को रवाना किया। इस मौे पर हुई गोष्ठी में छात्र-छात्राओं को स्वच्छता, स्वच्छ पानी और स्वस्थ भारत की जानकारी दी गई। इस मौके पर राकेश कुमार, मोतीलाल वर्मा, निरूपमा सिंह, भानु प्रताप सिंह आदि मौजूद थे।
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हरदोई। जिले के ग्रामीण इलाकों में साफ सफाई के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों का बजट खर्च होने के बाद भी व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। स्वच्छता सप्ताह केे दौरान रैली और गोष्ठियां तो की जा रहीं, पर गांव की चोंक नाली और सड़क पर फैला कूड़ा साफ नजर आ रहा है। मंगलवार को जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों का जायजा लेने पर हकीकत सामने आ गई। इन गांवों में स्वच्छता के लिए न तो सफाई कर्मी पहुंच रहे, न ही दवा का छिड़काव हो रहा। सफाई उपकरणों के लिए करोड़ों का बजट भी कागजों पर ही खर्च होता नजर आ रहा है।
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संडीला क्षेत्र में स्वच्छता सप्ताह का मंगलवार को समापन हो गया। इस दौरान प्रमुख स्थानों पर लगे बैनर के दावों की जमीनी हकीकत कसबे में देखने को मिली। एसडीएम कंपाउंड के बीच से गुजरने वाले नाले में गंदगी भरी हुई थी और हर तरफ मच्छरों की भरमार थी। उन्नाव व हरदोई रोड पर जगह-जगह कूड़े के ढेर व्यवस्था को आईना दिखा रहे थे। भरावन ब्लॉक का निर्मल गांव श्यामदासपुर और कुरौंध में बदहाल स्थिति नजर आई। यहां सड़क पर दलदल से गुजरने पर लोग विवश थे। सफाई व्यवस्था भी तार तार थी। कछौना क्षेत्र में जगह-जगह नालियां चोंक और सड़क पर कूड़े के ढेर नजर आ रहे थे।। सफाई कर्मी गांव में नजर नहीं आते। कोथावां ब्लॉक मेें एक ओर जहां गोष्ठी कर सप्ताह का समापन कर दिया गया, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल स्थिति नजर आई।
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अधिकांश गांवों में सफाई कर्मी नहीं मिले। यहां ब्लॉक कार्यालय की नालियां भी चोंक पड़ी थी, जबकि कार्यालय के बाहर सड़क पर कीचड़ से लोगों का निकलना भी दूभर हो रहा था। बिलग्राम क्षेत्र में एक ओर जिला स्वच्छता समिति की ओर से निर्मल भारत अभियान के अंतिम दिन रैली निकाल कर जागरूक किया जा रहा था, वहीं गांवों में सफाई न होने की दास्तान सड़क और गलियारे स्वयं बयां कर रहे थे। विकास खंड क्षेत्र में 136 सफाई कर्मियों की तैनाती होने के बावजूद गांवों में कीचड़ युक्त गलियारे सड़कें आवागमन को प्रभावित करती रहती हैं और गांवों की बस्तियां कूड़े के डेरों पर बसी हैं। सवायजपुर क्षेत्र के अधिकांश गांवों में गंदगी का अंबार रहा। ग्रामीणों की मानें तो इन गांवों में सफाई कर्मी भी नहीं पहुंचते।
उधर, भरखनी ब्लॉक में करीब 18 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां सफाई कर्मी ही तैनात नहीं है। शाहाबाद क्षेत्र और सदर तहसील क्षेत्र का भी ऐसा ही हाल था। जिला मुख्यालय पर गोष्ठियां होती रही, पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था देखने की किसी को फुर्सत नहीं मिली। उधर, जिले की 1101 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष सफाई कर्मियों के 2072 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से अभी 1967 की भर्ती कर ली गई है, जिनमें से 1937 सफाई कर्मी कार्यरत हैं, जबकि शेष सफाई कर्मियों पर कार्रवाई होने से वह कार्य नहीं कर रहे हैं। जिले में 1937 सफाई कर्मियों के कार्यरत होने के बावजूद जिले में साफ सफाई का काम रामभरोसे है।
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सफाई कर्मियों पर प्रतिमाह दो करोड़ व्यय
हरदोई। जिले में नियुुक्त सफाई कर्मचारी कार्य भले ही न कर रहे हों, पर शासन उन पर खूब मेहरबान है। नियुक्ति के दौरान सफाई कर्मियों को करीब साढ़े नौ हजार का वेतन मिलता था, पर अब वेतन बढ़ाया जा चुका है। सफाई कर्मियों का मूल वेतन सात हजार रुपये है और उसमें सभी व्यय मिलाकर 12,306 रुपये मिलते हैं, जिसमें से पेंशन के 1205 रुपये की कटौती के बाद 11101 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।
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गांवों में कार्य कराने को दी जाती धनराशि
हरदोई। पंचायत राज विभाग को साफ सफाई के अलावा गांवों में कार्य कराने को भी धनराशि देनी पड़ती है। इसमें गांवों में दवा का छिड़काव से लेकर सफाई कर्मियों के लिए संसाधनों का पैसा ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत की निधि खाते में जाता है। ज्ञात हो कि ग्राम व क्षेत्र पंचायत को राज्य वित्त व 13वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से धनराशि प्रति तीन माह के अंतराल में भेजी जाती है। जिले में वित्तीय वर्ष 13-14 के दौरान एक किश्त में ग्राम पंचायत को पुनरक्षित धनराशि 5,44,19,000 रुपये दी गई। इसी प्रकार क्षेत्र पंचायत को पुनरीक्षत धनराशि कुल 7,85,250 रुपये दिए गए।
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शौचालय निर्माण भी करोड़ों रुपये खर्च
हरदोई। पंचायत राज विभाग ने संपूर्ण स्वच्छता अभियान के स्थान पर निर्मल भारत अभियान योजना को शुरू किया। जिसमें गांवों में शौचालय का निर्माण करने को 10 हजार रुपये लाभार्थी को मिलेंगे। जिसमें 32 सौ रुपये केंद्रांश, 14 सौ राज्यांश, 45 सौ मनरेगा से मिलेगा एवं 900 रुपये लाभार्थी को भी स्वयं देना होगा। इसके लिए करीब 15 हजार रुपये का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि, शौचालय निर्माण का काम तो शुरू हो गया है, पर काम जैसे तैसे ही हो रहा है।
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स्वच्छता रैली निकाल किया जागरूक
बिलग्राम/बावन। एडीओ पंचायत संतराम शर्मा के संयोजन में स्वच्छता रैली निकाली गई, जिसे ब्लाक प्रमुख रमकोरा ने रवाना किया, जिसमें शौचालय के निर्माण के उपयोग, सही समय पर साबुन से हाथ धोना, साफ पेयजल के उपयोग आदि को लेकर रैली निकालकर लोगों को जागरूक किया गया। बावन में बीईओ धर्मेंद्र प्रसाद ने जागरूकता रैली को रवाना किया। इस मौे पर हुई गोष्ठी में छात्र-छात्राओं को स्वच्छता, स्वच्छ पानी और स्वस्थ भारत की जानकारी दी गई। इस मौके पर राकेश कुमार, मोतीलाल वर्मा, निरूपमा सिंह, भानु प्रताप सिंह आदि मौजूद थे।