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86 हजार किसानों को चेक का इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Tue, 11 Aug 2015 12:20 AM IST
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कुदरत की मार खाए किसानों को शासन से मिलने वाली
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इमदाद समय पर नहीं मिल पा रही, जिससे वह दर-दर भटकने को विवश है। जो धनराशि
आवंटित की गई, उसमें मात्र 20 फीसदी किसानों को मुआवजे की चेक मिल सकी।
अभी भी 80 फीसदी किसान सहायता राशि की चेक से वंचित हैं।
अब उन्हें खरीफ की फसल में पानी लगाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। तहसील क्षेत्र में रवी की फसल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से करीब 459 गांव के 1.9 लाख किसान प्रभावित हुए थे। शासन के निर्देश पर तहसील ने क्षेत्र का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट डीएम को भेजी थी, जिसमें किसानों के नुकसान का आकलन करते हुए दैवी आपदा राशि के रूप में 49.13 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी थी।
जिसके सापेक्ष शासन से आवंटित धनराशि में मात्र 8.35 करोड़ रुपये की धनराशि तहसील को मिली। इस रकम से प्रथम चरण में छोटे किसानों को चेकों का आवंटन किया गया। तहसील प्रशासन का दावा है कि अब तक 22,755 किसानों को चेक आवंटित कर दी गई है, पर हकीकत यह है कि इसमें भी करीब 2500 चेक लेखपालों के माध्यम से धीमी गति से बांटे जा रहे। ऐसे में चेक से वंचित आपदा प्रभावित किसान परेशान हैं।
अधिकांश किसानोें ने साहूकारों से पैसा लेकर खरीफ की बुआई व धान की रोपाई तो कर दी, पर अब बारिश न होने के कारण खेत मेें पानी लगाने के लिए उन्हें पैसे की जरूरत है। इसके लिए उन्हें अफसरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि सरकार से मिलने वाली दैवी आपदा चेक मिल जाए तो वह उसका पैसा खरीफ में लगाकर फसल बचा सकते हैं, अन्यथा अबकी भी उन्हें संकट का सामना करना पड़ेगा।
इधर, जिन किसानाेें को चेकें आवंटित की गई हैं, उनमें से कई किसान चेक भुगतान को बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि जिस किसान को दैवी आपदा की चेक दी जाती है, उसे बैंक में भुगतान के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है। अधिकांश चेक का भुगतान नहीं हो पाता और पीड़ित किसान को बैरंग घर लौटना पड़ता।
उधर, किसानों को दैवी आपदा चेक वितरण में खेल किया जा रहा है। किसानों की माने तो दो बीघा खेती के मालिक को 3200 रुपये और आठ बीघे के मालिक को 1500 रुपये की चेक मनमाने तरीके से वितरित की जा रही है। आरोप है कि कई स्थानों पर तो चेक बनाने में ही धन उगाही की गई। इस खेल में तहसील के कुछ लेखपालों पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं।
अब उन्हें खरीफ की फसल में पानी लगाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। तहसील क्षेत्र में रवी की फसल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से करीब 459 गांव के 1.9 लाख किसान प्रभावित हुए थे। शासन के निर्देश पर तहसील ने क्षेत्र का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट डीएम को भेजी थी, जिसमें किसानों के नुकसान का आकलन करते हुए दैवी आपदा राशि के रूप में 49.13 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी थी।
जिसके सापेक्ष शासन से आवंटित धनराशि में मात्र 8.35 करोड़ रुपये की धनराशि तहसील को मिली। इस रकम से प्रथम चरण में छोटे किसानों को चेकों का आवंटन किया गया। तहसील प्रशासन का दावा है कि अब तक 22,755 किसानों को चेक आवंटित कर दी गई है, पर हकीकत यह है कि इसमें भी करीब 2500 चेक लेखपालों के माध्यम से धीमी गति से बांटे जा रहे। ऐसे में चेक से वंचित आपदा प्रभावित किसान परेशान हैं।
अधिकांश किसानोें ने साहूकारों से पैसा लेकर खरीफ की बुआई व धान की रोपाई तो कर दी, पर अब बारिश न होने के कारण खेत मेें पानी लगाने के लिए उन्हें पैसे की जरूरत है। इसके लिए उन्हें अफसरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि सरकार से मिलने वाली दैवी आपदा चेक मिल जाए तो वह उसका पैसा खरीफ में लगाकर फसल बचा सकते हैं, अन्यथा अबकी भी उन्हें संकट का सामना करना पड़ेगा।
इधर, जिन किसानाेें को चेकें आवंटित की गई हैं, उनमें से कई किसान चेक भुगतान को बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि जिस किसान को दैवी आपदा की चेक दी जाती है, उसे बैंक में भुगतान के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है। अधिकांश चेक का भुगतान नहीं हो पाता और पीड़ित किसान को बैरंग घर लौटना पड़ता।
उधर, किसानों को दैवी आपदा चेक वितरण में खेल किया जा रहा है। किसानों की माने तो दो बीघा खेती के मालिक को 3200 रुपये और आठ बीघे के मालिक को 1500 रुपये की चेक मनमाने तरीके से वितरित की जा रही है। आरोप है कि कई स्थानों पर तो चेक बनाने में ही धन उगाही की गई। इस खेल में तहसील के कुछ लेखपालों पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं।