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Hardoi News: गहा नाला पर चार करोड़ रुपये से बनेगा 48 मीटर लंबा पुल
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हरदोई। बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत बिलग्राम-रहुला-जफरपुर मार्ग पर गहा नाले पर जर्जर पुल ढहने के बाद नए पुल के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। डीएम के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग के खंड-दो ने पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। तीन करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से 48 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया जाएगा। पुल की चौड़ाई 10 मीटर रखी जाएगी।
गनीपुर में गहा नाला पर जर्जर पुल पांच जनवरी की शाम मौरंग भरा डंपर निकालने के दौरान ढह गया था। हालांकि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ था, लेकिन इस घटना से लोक निर्माण विभाग की खासी किरकिरी हुई थी। घटना के बाद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पुल का स्वामित्व किस विभाग के पास है। लाेक निर्माण विभाग के अभियंता पूरे मामले से खुद को अलग करते हुए पुल सिंचाई विभाग का बताने की कवायद करते रहे। शासन और डीएम की ओर से मांगी गई जानकारी में भी लोक निर्माण विभाग पुल का स्वामित्व मानने से इनकार करता रहा।
डीएम एमपी सिंह ने इस हीलाहवाली पर सख्त रुख दिखाते हुए लोक निर्माण विभाग के खंड-दो के अधिशासी अभियंता को गनीपुर में नए पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसमें सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से भी सहयोग लेने को कहा गया था। डीएम के सख्त तेवरों के बाद निर्माण खंड दो ने तीन करोड़ 90 लाख रुपये से पुल का निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। प्रस्ताव को शासन स्तर से मंजूरी मिलने और बजट अवमुक्त होते ही यहां निर्माण कार्य कराया जाएगा।
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अपने ही जाल में फंसते चले गए लोक निर्माण विभाग के अभियंता
डीएम एमपी सिंह ने घटना के बाद लोक निर्माण विभाग के खंड-दो के अधिशासी अभियंता से पूछा था कि पुल का स्वामित्व किसका है और पुल जर्जर होने के बाद यातायात रोकने का दायित्व किसका है। इसके जवाब में विभाग की ओर से लिखा गया कि उक्त सड़क बिलराया-पनवारी राष्ट्रीय राजमार्ग के किलोमीटर 202 से निकलकर रहुला होते हुए जफरपुर तक जाती है। इसकी लंबाई लगभग 12 किलोमीटर है। इस मार्ग का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना वर्ष 2009 में हुआ था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की अधिशासी अभियंता नीलम की ओर से बताया गया कि निर्माण के बाद उक्त सड़क लोक निर्माण विभाग के खंड-दो को हस्तांतरित की जा चुकी है। जिम्मेदारों ने सिंचाई विभाग को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, लेकिन नियमावली के मुताबिक संबंधित पुल के पहुंच मार्ग का निर्माण करने वाली संस्था का ही जिम्मा पुल की निगरानी का भी होता है। इस लिहाज से पुल लोक निर्माण विभाग का ही माना जाएगा।
मेरी प्राथमिकता गहा नाला पर नए पुल का निर्माण कराना है। गनीमत रही कि हादसे में कहीं कोई हताहत नहीं हुआ। जिम्मेदारी से बचकर भागने वाले अफसरों के बारे में भी उचित निर्णय किया जाएगा। शासन स्तर पर पुल के निर्माण का प्रस्ताव मंजूर कराने की कोशिश की जा रही है।
एमपी सिंह, डीएम
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गनीपुर में गहा नाला पर जर्जर पुल पांच जनवरी की शाम मौरंग भरा डंपर निकालने के दौरान ढह गया था। हालांकि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ था, लेकिन इस घटना से लोक निर्माण विभाग की खासी किरकिरी हुई थी। घटना के बाद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पुल का स्वामित्व किस विभाग के पास है। लाेक निर्माण विभाग के अभियंता पूरे मामले से खुद को अलग करते हुए पुल सिंचाई विभाग का बताने की कवायद करते रहे। शासन और डीएम की ओर से मांगी गई जानकारी में भी लोक निर्माण विभाग पुल का स्वामित्व मानने से इनकार करता रहा।
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डीएम एमपी सिंह ने इस हीलाहवाली पर सख्त रुख दिखाते हुए लोक निर्माण विभाग के खंड-दो के अधिशासी अभियंता को गनीपुर में नए पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसमें सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से भी सहयोग लेने को कहा गया था। डीएम के सख्त तेवरों के बाद निर्माण खंड दो ने तीन करोड़ 90 लाख रुपये से पुल का निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। प्रस्ताव को शासन स्तर से मंजूरी मिलने और बजट अवमुक्त होते ही यहां निर्माण कार्य कराया जाएगा।
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अपने ही जाल में फंसते चले गए लोक निर्माण विभाग के अभियंता
डीएम एमपी सिंह ने घटना के बाद लोक निर्माण विभाग के खंड-दो के अधिशासी अभियंता से पूछा था कि पुल का स्वामित्व किसका है और पुल जर्जर होने के बाद यातायात रोकने का दायित्व किसका है। इसके जवाब में विभाग की ओर से लिखा गया कि उक्त सड़क बिलराया-पनवारी राष्ट्रीय राजमार्ग के किलोमीटर 202 से निकलकर रहुला होते हुए जफरपुर तक जाती है। इसकी लंबाई लगभग 12 किलोमीटर है। इस मार्ग का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना वर्ष 2009 में हुआ था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की अधिशासी अभियंता नीलम की ओर से बताया गया कि निर्माण के बाद उक्त सड़क लोक निर्माण विभाग के खंड-दो को हस्तांतरित की जा चुकी है। जिम्मेदारों ने सिंचाई विभाग को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, लेकिन नियमावली के मुताबिक संबंधित पुल के पहुंच मार्ग का निर्माण करने वाली संस्था का ही जिम्मा पुल की निगरानी का भी होता है। इस लिहाज से पुल लोक निर्माण विभाग का ही माना जाएगा।
मेरी प्राथमिकता गहा नाला पर नए पुल का निर्माण कराना है। गनीमत रही कि हादसे में कहीं कोई हताहत नहीं हुआ। जिम्मेदारी से बचकर भागने वाले अफसरों के बारे में भी उचित निर्णय किया जाएगा। शासन स्तर पर पुल के निर्माण का प्रस्ताव मंजूर कराने की कोशिश की जा रही है।
एमपी सिंह, डीएम